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लोहे-प्लास्टिक के बेजान कबाड़ को अनमोल धरोहर में बदल रहे साहिबगंज के अमृत प्रकाश, PM मोदी भी कर चुके हैं तारीफ

Published: Thu, 22 Oct 2026 03:23 PM (IST)

साहिबगंज के कलाकार अमृत प्रकाश बेकार लोहे और प्लास्टिक के कबाड़ को जीवंत कलाकृतियों में बदल रहे हैं, जिससे उन्हें 'वेस्ट टू वंडर पार्क' सजाने का मौका मिला है।

मूर्ख को ज्ञान देना यानी गदहे को ज्ञान देना। इसलिए गदहे की पीठ पर पुस्तक है। सौ: जागरण

मूर्ख को ज्ञान देना यानी गदहे को ज्ञान देना। इसलिए गदहे की पीठ पर पुस्तक है। सौ: जागरण

HighLights

  1. अमृत प्रकाश साहिबगंज के कलाकार हैं, कबाड़ से बनाते हैं अद्भुत कलाकृतियां।

  2. वह 22 हजार वर्गफीट 'वेस्ट टू वंडर पार्क' को सजा रहे हैं।

  3. प्रधानमंत्री मोदी ने अमृत प्रकाश की कलाकृतियों की खूब सराहना की है।

डॉ. प्रणेश, साहिबगंज। बेजान लोहा और प्लास्टिक का कचरा बोल उठे, तो उसे सिर्फ कला नहीं 'अमृत' कहते हैं। इनके हाथों का स्पर्श पाकर पुरानी साइकिल-बाइक के पुर्जे, नट-बोल्ट और भंगार के बर्तन जीवंत कलाकृतियां बन बतियाने लगती हैं। झारखंड के साहिबगंज के विलक्षण कलाकार अमृत प्रकाश इसी जादुई कला से पहचाने जाते हैं। ॉ

कबाड़ से कलात्मक कृति गढ़ने वाले इस विशिष्ट कलाकार के हुनर का कमाल ही है कि वह शहर में 22 हजार वर्गफीट में बन रहे 'वेस्ट टू वंडर पार्क' को ढेरों अद्भुत कलाकृतियों से सजा रहे हैं। अनुपयोगी-बेकार वस्तुओं को अनमोल धरोहर बनाकर वह स्वच्छ पर्यावरण का संदेश भी दे रहे। 

कबाड़ बस से बनी आकर्षक कैफेटेरिया

फासिल्स पार्क में अमृत द्वारा बनाए 65 फीट का डायनासोर, उधवा बर्ड सेंचुरी में बनाए पक्षियों की कलाकृति, पीएम संग्रहालय में बिरसा मुंडा की प्रतिमा, राज्यभर में शिबू सोरेन की प्रतिमा, पटना के सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय में गुरु-शिष्य की कलाकृति और कबाड़ बस से बनी आकर्षक कैफेटेरिया उनकी कल्पनाशीलता को नई ऊंचाई दे रही हैं।

पटना से आर्ट एंड क्राफ्ट की पढ़ाई

अमृत बचपन से ही कुछ न कुछ नया करते रहे हैं। रेलवे लोको वर्कशॉप में कार्यरत पिता ड्यूटी से घर लौटते, तब कपड़ों पर ग्रीस-मोबिल, कालिख लगा रहता। यहीं से वे रंगों और कचरे के प्रति आकर्षित हुए। रेलवे स्कूल से प्रारंभिक पढ़ाई के बाद आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज, पटना में प्रतिभा निखरी। यहां से गोल्ड मेडल लेकर कोलकाता से मास्टर ऑफ फाइन आर्ट की डिग्री भी ली।

अमृत ने कहा, वर्ष 2012 में पटना में पढ़ाई के क्रम में कबाड़ से कलाकृति बनाने का आइडिया आया। पहली कलाकृति तिरंगा गुटखा के पाउच से नशा मुक्ति का संदेश देने वाला "बच्चा' बनाया। वह किलकारी बाल भवन पटना में रखा हुआ है। 

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वेस्टेज से लिखा गया लव पटना सौ: अमृत प्रकाश

पटना नगर निगम के अनुरोध पर कबाड़ से 14 फीट की चिड़िया 'गोरैया' बनाया जो कंकड़बाग गोलंबर पर लगा हुआ है। दो साल पूर्व स्क्रैप से 'आइ लव चकाचक पटना' कलाकृति बनाई। जिसे 15 अगस्त 24 को झांकी में प्रथम पुरस्कार मिला। दिल्ली व जयपुर की आइसीए गैलरी में आयरन स्क्रैप से बना 'बालक' भी प्रदर्शित है।

प्रधानमंत्री मोदी कर चुके हैं इनकी सराहना 

अमृत प्रकाश की कलाकृति प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री आवास के संग्रहालय में कबाड़ निर्मित बिरसा मुंडा की प्रतिमा रखी है। देवघर एयरपोर्ट पर रखी चार देवियों की कलाकृति भी पीएम मोदी को खूब भायी, जिसे उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर खूब सराहना की। गोल्डेन लेडी, टार्जन लेडी, संताल वुमेन और भक्तिनी नाम की यह कलाकृति 'नारीवंदन' थीम पर बनी है।

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सीबीएसई के पटना क्षेत्रीय कार्यालय में यह कलाकृति लगी है। सौ: अमृत प्रकाश

बिहार के मुख्यमंत्री आवास में उसने टेराकोटा का बिहार द्वार भी बनाया है। दिल्ली के बिहार भवन में भी  उनकी कलाकृति मौजूद है। अबतक दो हजार कलाकृति बना चुके अमृत ने बताया कि उनमें प्राय: लोहा-टिना, प्लास्टिक, धूल-मिट्टी का इस्तेमाल हुआ है। इनमें लगने वाला समय आकार-प्रकार पर निर्भर करता है। 

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इस तस्वीर के माध्यम से जेनरेशन चेंज को दिखाया गया है। सौ: जागरण 

सामान्यत: यह एक से दो हफ्ते तक होता है। कबाड़ जुटाने और कलाकृति में बदलने की पूरी प्रक्रिया में हजार-दो हजार रुपये खर्च होते हैं। पुरानी वस्तुएं प्राय: कबाड़ी बाजार से खरीदी जाती हैं। 

सीबीएसई कार्यालय, पटना में लगी कलाकृति 

पटना के सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय में अमृत द्वारा बनाई गुरु-शिष्य की आठ फीट ऊंची कलाकृति प्रदर्शित है। बीते साल क्षेत्रीय कार्यालय का निर्माण पूरा हुआ, तब सुंदरीकरण के इनके प्रस्ताव को स्वीकृति मिली। उन्होंने इसका निर्माण मार्बल डस्ट और सिलिका फाइबर से किया है। 

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सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय में लगी कलाकृति सौ: अमृत प्रकाश

कलाकृति में गुरु को पेड़ के रूप में दिखाया गया, जिसकी छांव में बच्चों का बौद्धिक विकास होता है। इसे बनाने में करीब दो माह का समय लगा। साहिबगंज में बनाने के बाद कलाकृति पटना ले जाकर स्थापित की गई।

सरकार ने बनवाई शिबू सोरेन की प्रतिमा 

सरकार के निर्देश पर इसी साल पहली पुण्यतिथि पर अमृत प्रकाश द्वारा निर्मित 'दिशोम गुरु' शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा राज्य के सात जिलों (साहिबगंज, रामगढ़, चाईबासा, देवघर, गोड्डा व पाकुड़) में स्थापित की गयी। अन्य जिलों में भी प्रतिमा लगाने की योजना है। 

अमृत प्रकाश ने बिहार के मोतिहारी में 24 फीट का चरखा तथा आरा में चार जगह पर पीतल के 21 फीट के तलवार का निर्माण किया। शिबू सोरेन के निधन के बाद अमृत ने साहिबगंज सर्किट हाउस के सभागार की दीवारों पर उनके बचपन से लेकर मृत्यु तक की कहानी को रंगों से उकेरा। 

2000 टन स्क्रैप से बना रहे वेस्ट टू वंडर पार्क 

अमृत ने बताया कि डीसी हेमंत सती के समक्ष वेस्ट टू वंडर पार्क के निर्माण का प्रस्ताव रखा, प्रजेंटेशन दिया। उन्हें यह आइडिया अच्छा लगा और उन्होंने इसकी स्वीकृति दे दी। प्रशासन ने जमीन व राशि उपलब्ध करायी। सरकारी कार्यालयों से कबाड़ ले जाने की अनुमति दी। 

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15 अगस्त 24 को पटना में निकाली गयी झांकी सौ: अमृत प्रकाश

आमलोगों ने भी बढ़-चढ़कर कबाड़ उपलब्ध कराया। इसके बाद भी काफी मात्रा में स्क्रैप खरीदना पड़ा। कहा, 2000 टन स्क्रैप से यह पार्क दो साल से बन रहा है। इसमें झारखंड की 32 जनजातीय समुदाय की कलाकृति बनाई जा रही है।