रांची, जासं। इंटरनेशनल एजेंसी फोर प्रिवेंशन आफ ब्लाइंडनेस और विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से लोगों को अपनी आंखें बेहतर रखने और उसे लेकर जागरूकता फैलाने के लिए हर साल विश्व दृष्टि दिवस का आयोजन किया जाता है। इस बार का थीम है अपनी आंखों से करें प्यार। नियमित रूप से आंखों की जांच कराना, हरेक उम्र के लोगों में जागरूकता फैलाना इसका उद्देश्य है।

कोरोना संक्रमण से पीड़ित लोग अब कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसमें न्यूरो के बाद सबसे अधिक समस्या आंखों को लेकर है। पोस्ट कोविड मरीजों में दृष्टि समस्या अधिक दिख रही है। इसमें सबसे बड़ी समस्या आंखों की रोशनी पहले से कम होना है। इसे लेकर लोग नेत्र विशेषज्ञ के पास पहुंच रहे हैं। ऐसे सात प्रतिशत मरीजाें को चश्मे की जरूरत पड़ रही है। डाक्टरों का कहना है कि कोरोना के बाद आंखों को लेकर गंभीर समस्या आ रही है। जिन्हें कम उम्र में आंखों की समस्या होने की उम्मीद नहीं थी, उसे भी अब चश्मा लगाने की जरूरत पड़ रही है।

ऐसे में जरूरी है कि पोस्ट कोविड के मरीज सिर्फ बीपी और मधुमेह की ही जांच ना कराएं, बल्कि आंखों की भी जांच कराते रहें। राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) के नेत्र विभाग के डाक्टर राहुल कुमार बताते हैं कि कोरोना के बाद आंखों की समस्या पहली बार देखने को मिली है। इस पर अभी भी कई देशों में शोधकार्य चल रहा है। यह एक नई बीमारी है और इससे ठीक होने के बाद भी मरीजों को जिस तरह की समस्या आ रही है, उस पर अभी कई तरह के शोध होना बाकी है।

ओपीडी में आने वाले मरीजों में 15 प्रतिशत तक मरीज दृष्टि दोष के

रिम्स ओपीडी में आने वाले मरीजों में से 15 प्रतिशत मरीज दृष्टि दोष के आते हैं। इन मरीजों में पुरुष और महिलाओं की संख्या बराबर है, जिनमें रिफरेक्टिव एरर की समस्या है। ऐसे मरीजों की जांच में पता चलता है कि उनकी सामने की नजर कमजोर पड़ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें स्कूल, कालेज जाने वाले बच्चों की संख्या अधिक है। इस समस्या के बाद इन्हें चश्मे व दवाइयों का ही सहारा लेना पड़ रहा है।

कोरोना शरीर के विभिन्न अंगों के साथ आंखों को भी कर रहा प्रभावित

डा. राहुल बताते हैं कि कोरोना से पीड़ित लोगों के शरीर में वायरस ने हर अंग को प्रभावित किया है। ठीक होने के बाद यह पता चल रहा है कि इसने आंखों को भी प्रभावित किया। इसके बाद इस तरह की समस्या आ रही है। लेकिन जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमती अच्छी है, उन्हें पोस्ट कोविड के बाद भी अधिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। दूसरी ओर बच्चाें की बात की जाए तो एक तो कोरोना के बाद समस्या आई और दूसरी लगातार मोबाइल और कंप्यूटर के सामने बैठने से भी समस्या बढ़ी। इससे बच्चों की आंखों में रोशनी की कुछ समस्या देखी जा रही है।

समय पर मोतियाबिंद की जांच कराएं

रिम्स के डा. विवेक मिश्रा बताते हैं कि कोरोना को छोड़कर बात की जाए, तो मोतियाबिंद की समस्या भी काफी आ रही है। जानकारी के अभाव में मोतियाबिंद से अंधेपन का भी खतरा बढ़ा है। देश में 15 लाख से अधिक लोग अंधेपन से प्रभावित हैं और यह संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। नियमित रूप जांच करवाकर आखों की बीमारियों से बचाया जा सकता है। झारखंड की बात की जाए, तो यहां ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की समस्या आती है और मरीज तब अस्पताल आते हैं, जब अधिक कुछ करने का समय नहीं बचता। लोगों को चाहिए कि 50 की उम्र के बाद मोतियाबिंद की जांच तो जरूर करानी चाहिए।

आंखों को स्वस्थ रखने के लिए ये करें

संतुलित आहार लें : वैसे आहार जिनमें विटामिन सी, ई, ल्यूटिन, जिंक और ओमेगा 3 फैटी एसिड शामिल हों। साथ ही हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, पत्तागोभी, बीन आदि लें। खाने में मछली भी लें। इनमें शामिल एंटी आक्सीडेंट्स विजन को ठीक रखते हैं। मछलियों में ओमेगा 3 फैटी एसिड होते हैं।

आंखों की नियमि‍त कराएं जांच : अपनी दृष्टि बेहतर रखने के लिए नियमित रूप से चेकअप जरूरी है। समय पर आपको चश्मे की जरूरत है या नहीं, यह चिकित्सक ही बता पाएंगे।

अपने वजन को नियंत्रित रखें : चिकित्सकों का कहना है कि अपने वजन को हमें नियंत्रित रखना होगा। नियमित रूप से व्यायाम और संतुलित आहार जरूर है। डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, मोटापा आदि से आंखों को नुकसान पहुंचता है।

बाहर निकलें तो सनग्लासेज पहनें : बाहर धूप में निकलने पर सनग्लासेज पहनें। इससे यूवीए और यूवीबी रेडिएशन से बचाव हो जाता है।

हर 20 मिनट पर दृष्टि बदलें : यदि आप कंप्यूटर स्क्रीन को लगातार देख रहे हैं तो 20 मिनट के बाद ब्रेक लें। 20 फीट की दूरी पर रखी चीजों को कम से कम 20 सेकेंड तक देखें।

Edited By: Sujeet Kumar Suman