रांची, [श्रद्धा छेत्री]। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि बचपन में शर्मीली व सहमी सी रहने वाली निकिता समाज के लिए बढ़-चढ़कर आवाज उठाएगी। समाज सेवी निकिता सिन्हा 2016 से लेकर अब तक 629 महिलाओं की शादी करा चुकी है। ये ऐसी महिलाओं की शादी थी, जिन्हें ढुकू प्रथा का शिकार होना पड़ा था। इस प्रथा में बिना शादी किए महिला- पुरुष एक साथ रह सकते हैं। ऐसे माता-पिता, जो अपनी बेटी की शादी धूमधाम से कराने में असमर्थ हैं, वे लोग अपनी बेटी को बिना शादी के ही विदा कर देते हैं। आमतौर पर ऐसी महिलाएं अपने हक व सम्मान से वंचित हैं।

ढुकू शब्द पहली बार सुना

निकिता ने बताया कि साल 2014 में वह मरंग्हडा में एक कार्यक्रम में गई थीं। कार्यक्रम में एक अधेड़ व्यक्ति से मुलाकात हुई। वह व्यक्ति मेरे पास आकर कहने लगा कि मैडम मेरी शादी करा दीजिए। उसकी बात सुन कर अजीब लगा। सोचने लगी कि आखिर उसने ऐसा क्यों कहा। अपने साथ काम करने वाली एक महिला से पूछा कि वह व्यक्ति, जो उस दिन कार्यक्रम में आया था, कहां रहता है। उसने जवाब दिया कि अच्छा ढुकू की बात कर रही हो। तब उसने कहा कि यहां तुम्हें हर जगह ढुकू मिलेंगे। निकिता ने बताया कि उन्होंने पहली बार ढुकू का नाम सुना।

2016 में 25 लोगों की कराई शादी

निकिता ने बताया कि गांव में कई ऐसी महिलाओं से मिलीं, जो बिना शादी किए किसी पुरुष के साथ रह रही थीं। इनमें कुछ अधेड़ भी थीं, जिनके बच्चे बड़े हो चुके थे। इन महिलाओं को उनके आदिवासी समाज में उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। लोग अच्छी दृष्टि से नहीं देखते थे। यह जानकार दुख हुआ। तभी ठान लिया था कि इन महिलाओं को समाज में इज्जत दिलाकर ही रहेंगी। इन महिलाओं की शादी कराने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहां के लोगों ने, पंडित ने विरोध किया लेकिन अपने संकल्प पर डटी रही। इस कार्य में वहां के डीसी ने मेरा साथ दिया और इस तरह मैंने पहली बार 25 लोगों की शादियां करवाई। इनमें एक पोता व उसके दादा की भी शादी करवाई।

4000 महिलाओं को शादी कराने का लक्ष्य

निकिता बताती हैं कि उनका सफर 25 महिलाओं की शादियां करा कर खत्म नहीं हुआ है। बल्कि इसकी शुरुआत हुई। निकिता ने रांची, गुमला, खूंटी, सिमडेगा व अन्य जिलों की कुल 629 महिलाओं की शादियां करवाईं। ये शादियां करवाने के लिए उन्हें समाज से कई जंग लड़नी पड़ी। लेकिन वह कभी डगमगाई नहीं। निकिता के अनुसार, जब वह बड़े अधिकारियों के पास सहयोग के लिए गईं तो उन्हें निराशा के अलावा और कुछ हाथ नहीं लगा।

कई बार लोगों ने यह भी कहा कि मैडम आप क्यों पैसे खर्च करना चाहती हैं, क्यों झमेला ले रही हैं। निकिता बताती हैं कि यह सुनकर काफी बुरा लगा। फिर उन्होंने सोचा कि वह इन लोगों की सोच नहीं बदल सकतीं। लेकिन अपने कार्य से उन महिलाओं को इज्जत जरूर दे सकती है। इस बार 4000 महिलाओं की शादी कराने का निश्चय किया है और इस लक्ष्य को पूरा करके ही दम लेना है।

क्या है ढुकू प्रथा

कई राज्यों में ढुकू प्रथा अलग-अलग नाम से प्रचलन में आज भी है। झारखंड के आदिवासी बहुल इलाकों में इस प्रथा का प्रचलन देखा जाता है। इसमें एक साथ रहते हुए बच्चे भी हो जाते हैं। इसमें सामाजिक मान्यता तो मिलती है, लेकिन वैधानिक अड़चनें आती हैं।

Edited By: Sujeet Kumar Suman