रांची, [नीरज अम्बष्ठ]। राज्य के होटलों, ढाबों व अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों के तलने में एक बार इस्तेमाल किए गए खाद्य तेल का दोबारा इस्तेमाल नहीं होगा। इन्हें प्रतिदिन खरीदे गए तेल, इस्तेमाल किए गए तेल, खराब तेल के डिस्पोजल आदि का पूरा ब्योरा रखना होगा, ताकि उस पर निगरानी रखी जा सके। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआइ) ने इसे एक जून से लागू करने का आदेश स्वास्थ्य विभाग को दिया है।

फिलहाल यह उन होटलों, रेस्टोरेंट, ढाबों व अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में लागू होगा, जहां प्रतिदिन 50 लीटर या इससे अधिक तेल का इस्तेमाल होता है। इन्हें किसी खाद्य पदार्थ को तलने में एक बार इस्तेमाल हो चुके तेल को एफएसएसएआइ द्वारा सूचीबद्ध उन एजेंसियों को डिस्पोजल के लिए देना होगा, जो बायो डीजल बनाने का कारोबार करते हैं। होटल व ढाबे इस्तेमाल किए जा चुके उन तेल को फ्रेश तेल में मिला नहीं सकेंगे, जिनमें 25 फीसद से अधिक टोटल पोलर कंपाउंड बन चुके हैं।

ऐसे तेल दोबारा फूड चेन में नहीं आएंगे। दरअसल, तेल में किसी खाद्य पदार्थ को तलने के बाद उसमें टोटल पोलर कंपाउंड बनने लगते हैं। एफएसएसआइए ने ऐसे कंपाउंड बनने की सीमा 25 फीसद निर्धारित कर दी है। इसका मतलब यह कि जिन तेल में इससे अधिक टोटल पोलर कंपाउंड बनते हैं, उनका इस्तेमाल दोबारा नहीं किया जा सकता।

स्वास्थ्य के लिए हानिकारक

किसी तेल का दो या तीन बार इस्तेमाल करने से तेल में कोई और तत्व बन जाता है। इसमें एक फ्लोरेसेंट कंपाउंड भी शामिल है जो स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होता है। जानकारों के अनुसार, ऐसा तेल सामने से तो पीला दिखता है लेकिन तिरछा देखने से हरा दिखता है। ऐसे तेल के इस्तेमाल से ह्रदयाघात, मधुमेह, कैंसर आदि बीमारियों के खतरे बढ़ जाते हैं।

टोटल पोलर कंपाउंड की जांच के लिए खरीदी जाएगी मशीन

खाद्य तेलों में टोटल पोलर कंपाउंड की मात्रा की जांच के लिए फिलहाल कोई मशीन खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों के पास नहीं है। ऐसे तेल को फिलहाल सैंपल लेकर जांच के लिए लैब के लिए ही भेजा जा सकता है। खाद्य निदेशालय ने टोटल पोलर कंपाउंड टेस्टिंग मशीन की खरीद के लिए प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग को दिया है। ऐसी मशीनें सभी खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों की दी जाएगी जो होटलों, ढाबों में सीधे जाकर जांच कर सकेंगे।

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Posted By: Sujeet Kumar Suman

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