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योग सिखाने वियतनाम गए थे झारखंड के दो बेटे, सड़क हादसे ने छीन ली जिंदगी; अब पार्थिव शरीर लौटने का इंतजार

By Mansi KumariEdited By: Mansi Kumari
Published: Wed, 30 Sep 2026 01:54 PM (IST)

वियतनाम के दा लात में हुए एक सड़क हादसे में झारखंड के दो योग प्रशिक्षकों, राजा कुमार और विनय कुमार ...और पढ़ें

वियतनाम में सड़क हादसे में झारखंड के दो योग प्रशिक्षकों की मौत।

वियतनाम में सड़क हादसे में झारखंड के दो योग प्रशिक्षकों की मौत।

HighLights

  1. वियतनाम में सड़क हादसे में झारखंड के दो योग प्रशिक्षकों की मौत।

  2. झारखंड सरकार मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये का मुआवजा देगी।

डिजिटल डेस्क, रांची। वियतनाम के दा लात (Da Lat) शहर में हुए एक भीषण सड़क हादसे में झारखंड के दो योग प्रशिक्षकों की मौत हो गई। मृतकों के पार्थिव शरीर इस सप्ताह भारत लाए जाने की संभावना है। एक सरकारी अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

मृतकों की पहचान रांची के राजा कुमार (24) और जमशेदपुर के विनय कुमार राय (25) के रूप में हुई है। दोनों वियतनाम की 'आदि योग अकादमी' (Adi Yoga Academy) में योग शिक्षक के रूप में कार्यरत थे।

कार और दोपहिया वाहन की टक्कर में गई जान

अधिकारी के अनुसार, 25 सितंबर को राजा और विनय का दोपहिया वाहन एक कार से टकरा गया था, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

परिजनों की गुहार: 'जल्द वापस लाए जाएं पार्थिव शरीर'

रांची निवासी राजा कुमार के पिता उमेश वर्मा, जो पेशे से बिजली मिस्त्री हैं, उन्होंने बताया, "मेरा बेटा ही परिवार का भरण-पोषण करता था और हमें पैसे भेजता था। वह दो-तीन महीने पहले ही रांची आया था। हादसे को पांच दिन बीत चुके हैं और उसका शव वहीं पड़ा है। हम चाहते हैं कि उसका पार्थिव शरीर जल्द से जल्द घर लाया जाए।"

राजा की मां रूपा देवी ने कहा कि शवों को भारत लाने में लाखों रुपये का खर्च बताया जा रहा है, जिसे वहन करने में परिवार असमर्थ है। उन्होंने सरकार से आर्थिक सहायता की अपील की है।

दूसरी तरफ, जमशेदपुर के शास्त्री नगर निवासी विनय कुमार राय के पिता रमेश राय ने बताया कि उनका बेटा दो साल पहले वियतनाम गया था। परिवार अंतिम संस्कार के लिए उनके पार्थिव शरीर के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।

वियतनाम में भारतीय समुदाय ने जुटाए 20 लाख रुपये

रमेश राय ने बताया कि वियतनाम में रह रहे विनय के दोस्तों और भारतीय समुदाय के लोगों ने शवों को भारत भेजने के लिए आवश्यक 20 लाख रुपये का फंड जुटाया है। उन्होंने भारतीय दूतावास से सभी औपचारिकताएं तेजी से पूरी करने का अनुरोध किया है।

वियतनाम में मौजूद विनय के चचेरे भाई अभिजीत राय ने फोन पर बताया कि स्थानीय पुलिस जल्द ही नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी कर देगी, जबकि डेथ सर्टिफिकेट पहले ही मिल चुका है। उन्होंने कहा कि अब भारतीय दूतावास को स्थानीय अधिकारियों पर दबाव बनाकर पार्थिव शरीर की शीघ्र वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए।

राज्य सरकार देगी 5-5 लाख रुपये का मुआवजा

झारखंड श्रम विभाग के 'माइग्रेशन सेल' की टीम प्रमुख शिखा लकड़ा ने बताया कि शवों को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इस सप्ताह पार्थिव शरीर भारत पहुंचने की उम्मीद है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि दोनों योग प्रशिक्षक व्यक्तिगत स्तर पर वियतनाम गए थे और किसी कंपनी के नियमित कर्मचारी नहीं थे, इसलिए शवों को लाने का खर्च परिजनों को ही उठाना पड़ रहा है, जिसमें वहां के भारतीय समुदाय ने वित्तीय मदद की है। शिखा लकड़ा ने कहा कि पार्थिव शरीर भारत पहुंचने पर राज्य सरकार के नियमों के तहत दोनों मृतकों के निकटतम परिजनों को 5-5 लाख रुपये की मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी। 

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