राज्य ब्यूरो, रांची : कृषि निदेशक छवि रंजन ने कृषि पदाधिकारियों से कहा है कि टीम वर्क के रूप में काम करते हुए किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाए। मंगलवार को रबी पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसान अन्नदाता है, उसे उसका दर्जा मिलना ही चाहिए। रबी कार्यशाला में इस वर्ष के लिए 12.09 लाख हेक्टेयर में खेती और 17.88 लाख एमटी उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस मौके पर कृषि निदेशक ने स्वीकारा कि अधिकतर जिलों के उपायुक्तों का फोकस कृषि पर नहीं रहता। उन्होंने कहा कि उपायक्तों को इस प्राथमिक क्षेत्र पर फोकस करना चाहिए। कृषि पदाधिकारी अपने स्तर से पहल कर जिला स्तर पर गठित टास्क फोर्स की बैठक नियमित रूप से जिला उपायुक्तों के साथ करें।

कृषि निदेशक ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लिए यह जरूरी है कि सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों को मिले। कहा, राज्य सरकार की इंटरेस्ट सबवेंशन योजना के तहत किसानों को ब्याज दरों में तीन फीसद की छूट दी जाती है लेकिन इसका लाभ भी उन्हें अपेक्षाकृत नहीं मिल पा रहा है। गत वर्ष इस मद में 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था लेकिन व्यय मात्र 1.5 करोड़ ही हो सका।

छवि रंजन ने स्पष्ट कहा कि रबी के दौरान किसानों को सही समय पर बीज मुहैया कराएं। किसानों को गलत बीज न मिले इस पर विशेष नजर रखें। विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के लिए भी किसानों को प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा राज्य में इस बार भी दस जिले सुखाड़ग्रस्त घोषित किए गए हैं। आचार संहिता के बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा।

इस मौके पर निदेशक भूमि संरक्षण एफएन त्रिपाठी, निदेशक समेति सुभाष सिंह और उप निदेशक विकास कुमार उपस्थित थे।

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जैविक राज्य के रूप में पहचान बना सकता है झारखंड : कुलपति

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आरएस कुरील ने कहा कि झारखंड जैविक राज्य के रूप में अलग पहचान बना सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य में फर्टिलाइजर का उपयोग अपेक्षाकृत कम होता है। राज्य में 98 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का प्रयोग होता है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 138 किग्रा प्रति हेक्टेयर है। उन्होंने कहा कि झारखंड फूड डेफिसिट राज्य है इसे फूड सरप्लस राज्य कैसे बनाया जाए इस पर विशेष फोकस होना चाहिए। उन्होंने कृषि रकबा बढ़ाने और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया। कहा, झारखंड में दस लाख हेक्टेयर कृषि रकबे का विस्तार किया जा सकता है। इसी से उत्पादकता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि झारखंड में करीब 20 लाख एमटी का फूड डेफीसिट है। एरिया एक्सपेंशन और क्रापिंग इंटेनसिटी बढ़ाकर इसे दूर किया जा सकता है।

Posted By: Jagran

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