रांची, राज्य ब्यूरो। रांची जिले का गांव संग्रामपुर बड़ी चर्चा में है इन दिनों। गांव के दर्जन भर युवा सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में फंसे हैं। हाइवे से कट कर एक पक्की सड़क गांव के लिए जाती है। रपटीली राहें औऱ घूरती आखें। शरीर पर टंगा कपड़ों का चिथड़ा। खिली धूप और हल्की ठंड के बीच पैर नंगे। खेत में कमरतोड़ मेहनत के बाद उपजे धान को घरों तक पहुंचाने की जद्दोजहद। लग रहा है जैसे निराला की कविता वह तोड़ती पत्थर...की पंक्ति फिर एक बार जीवंत हो उठी है। अगर कुछ अलग है तो वह पग-पग पर बढ़ता खौफ। दहशत। जितनी आखें हमें घूरतीं, उससे कहीं ज्यादा गांव में कायम खौफ से आगाह करातीं। उस खौफ से जिसने इस इलाके में दहशत का राज कायम कर रखा है।

पुलिस के सर्च ऑपरेशन से डरे-सहमे ग्रामीण हर शख्स को आशंका की नजर से देखते, सुनते हैं। आरोपियों का नाम जुबां पर लाने से भी कतराते हैं। हर सवाल का बस एक जवाब - हमें नहीं पता, आगे पूछ लीजिए। सवाल पूछने पर लोग ठीक से हिंदी में जवाब नहीं दे पाते। आसानी से बात भी नहीं करते। कुछ भी पूछने पर रहस्यमयी मुस्कान और आपके सवाल पूछने व वहां जाने के आपके मकसद को पहचानने की मासूम सी कोशिश करते हैं। टुन्नी देवी अपनी भाषा में कहती हैं, 'केकरो छऊवा पुता हो, गलत करेवाला के फांसी कर सजा मिलेक चाही। पुलिस के चाही कि दोषी के सजा दिलाए, लेकिन बेकसूर मन के सजा नई होवेक चाही। इस बुजुर्ग दादी का दर्द उस बेटी के लिए है। उसकी हालत यह है कि लॉ की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म की घटना सुनकर टुन्नी देवी बीमार पड़ चुकी हैं। वह अपने घर के आंगन में दवा लेकर बैठी थीं। समय-समय पर दवाइयां खाकर खुद को संभाल रही हैं।

इस गांव में पहुंचकर आरोपी युवाओं के घर की तलाश वर्तमान माहौल में बहादूरी से कम नहीं। इस गांव तक पहुंचने वाले रास्ते में बमुश्किल चार से पांच लोग मिले। किसी को लग रहा कोई सरकारी अफसर घर की जांच करने आया है। कोई कर्ज वसूली के  डर से खुद को छिपाने की कोशिश करता नजर आ रहा। कोई पुलिस का आदमी समझ कर रास्ता मोड़ लेता है। यह गांव  छोटे-छोटे टोले में बसा है। कुछ कच्चे, कुछ पक्के घर, लोगों के होने का एहसास करा रहे हैं। गांव में एक सरकारी स्कूल का पक्का भवन है। यह शिक्षा की बदहाल स्थिति खुद ब खुद बयां कर रहा है। जिला मुख्यालय से महज 14 किमी दूर स्थित इस इलाके में पहुंचते-पहुंचते हमारा तंत्र हाफ जाता है। लोग अपनी भाषा मेंं बातें करने पर कुछ खुलते हैं, लेकिन कुरेदने पर ही इक्का-दुक्का लोग झिझकते हुए जवाब देते हैं। चुनाव है किसे वोट करेंगे, पूछने पर लगभग सभी लोग चतुराई से कोई सटीक जवाब नहीं देते। दुष्कर्म के आरोपों में फंसे युवकों का नाम लेते ही खामोशी छा जाती है।

बड़ी मेहनत से कांड के मुख्य आरोपित के घर की दहलीज तक पहुंचते हैं। गांव के सबसे अंतिम छोर पर पिता के पैर में चोट लगी है। अंगुली में पट्टी बंधी है। मां ठीक सामने दूसरे घर के दरवाजे पर धान पीट रही है। घर के बच्चे बेपरवाह खेल रहे हैं। घटना के बाद रिश्तेदार पहुंचे हुए हैं। कोई कुछ बताने को तैयार नहीं। बेटे के दरवाजे पर तीन अनजान चेहरे को देखकर मां धीरे-धीरे आती है। नाम पूछने पर मौन साध लेती है। प्रधानमंत्री आवास, पेंशन के बारे में पूछने पर अपना नाम बताती है। शिकायत है कि अब तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला। चार बेटे हैं। एक बेटे को पुलिस पकड़ कर ले गई है। वह अपने परिवार के साथ अलग रहता है।

दूसरे घर में बस एक महिला है। दो बच्चों को संभाल रही है। घरों के पास इधर-उधर बीयर की बोतलें दिख रही हैं। घटना में संलिप्तता के सवाल पर बस एक जवाब, वो लड़का ऐसा नहीं, शराब पिलाकर दोस्त अपने साथ ले गए। बहरहाल, इन सब चर्चा के बाद लौटने के क्रम में गांव वाले ताकीद कर रहे हैं, जरा जल्दी निकल जाएं, सूरज डूबने से पहले। इशारा साफ था। यहां भय है। इशारों को समझते हुए लौटने की राह पकड़ी।

अपने किए की सजा भुगतेगा :

मुख्य आरोपित माना जा रहा सुनील मुंडा के पिता बेयारी मुंडा ने कहा कि अगर सुनील मुंडा ने गलत किया है, तो अपने किए की गलती का सजा भुगतेगा। ऐसी हरकत करना गलती नहीं पाप है। उन्हें कानून कतई रहम न करे। गलती करने में उनका बेटा या कोई और, सजा मिलनी चाहिए।

घटना हृदय विदारक, दोषियों को मिले सजा :

कुलदीप उरांव की भाभी कहती हैं कि घटना हृदय विदारक है। दोषियों को हर हाल में सजा मिलनी चाहिए। हालांकि कुलदीप ने गलती की है या नहीं, यह नहीं जानती।

गांव वालों ने कहा, गलत संगत की वजह से फंसे दलदल में :

सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने संग्रामपुर गांव को दागदार बना दिया है। उस गांव में रहने वाला हर व्यक्ति छात्रा के लिए संवेदना रख रहा। लोगों का कहना था कि घटना में शामिल कुछ लोग पूरी तरह से गलत हैं, कुछ लोग संगत की वजह से गलत काम में शामिल हो गए। इस गलती के लिए कभी उन्हें माफी नहीं मिल सकती।

Posted By: Alok Shahi

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