यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 23, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
JPSC: छठी जेपीएससी का मेरिट लिस्ट रद, 326 लोगों की जाएगी नौकरी, संशोधित मेरिट लिस्ट जारी करने का रास्ता साफ
JPSC Hearing झारखंड हाई कोर्ट ने आज छठी जेपीएससी के मामले में अपना फैसला सुनाया है। इससे पहले अदालत ने ...और पढ़ें

रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड हाई कोर्ट ने छठी जेपीएससी के मेरिट लिस्ट को रद करने पर अपनी मुहर लगा दी है। चीफ जस्टिस डा रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की अदालत ने एकलपीठ के आदेश के खिलाफ दाखिल अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि एकलपीठ में आदेश बिल्कुल सही है और इसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। इसलिए प्रार्थियों की अपील याचिका खारिज की जाती है। इसके बाद अब 326 लोगों की नौकरी जाने की संभावना है। सात जून 2021 को एकलपीठ ने छठी जेपीएससी के मेरिट लिस्ट को यह कहते हुए रद कर दिया था कि इसमें विज्ञापन की शर्तों का उल्लंघन किया गया है। पेपर वन (हिंदी व अंग्रेजी) में सिर्फ क्वालिफाइंग मार्क्स लाना था, लेकिन जेपीएससी ने इसे कुल प्राप्तांक में जोड़ दिया। इसके अलावा अभ्यर्थियों को प्रत्येक पेपर में निर्धारित न्यूनतम अंक लाना अनिवार्य है। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि विज्ञापन के अनुसार सुधार कर संशोधित मेरिट लिस्ट जारी किया जाए। अदालत ने सरकार को यह भी निर्देश दिया था कि जेपीएससी के उन अधिकारियों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाए, जिनकी वजह से ऐसी गड़बड़ी हुई है। एकल पीठ के आदेश के खिलाफ प्रार्थी शिशिर तिग्गा सहित करीब दो सौ नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों ने खंडपीठ में अपील दाखिल की है। सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने 20 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बुधवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए एकल पीठ के आदेश के बरकरार रखा है।
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प्रार्थियों का तर्क- जेपीएससी का परिणाम सही
20 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया था कि जेपीएससी द्वारा पेपर वन के अंक को कुल प्राप्तांक में जोड़ा जाना सही है। इसमें किसी प्रकार की कोई त्रुटि नहीं है। छठी जेपीएससी में कुल छह पेपर होने थे जिसके लिए कुल प्राप्तांक 1050 निर्धारित था। ऐसे में अगर पेपर वन के अंक को हटा दिया जाए तो कुल प्राप्तांक 950 होता है। इसलिए जेपीएससी ने विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप ही पेपर वन के अंक को कुल प्राप्तांक में जोड़ा है।
एकलपीठ का आदेश बिल्कुल सही
सुनवाई के दौरान वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार, अपराजिता भारद्वाज और कुमारी सुगंधा ने अदालत को बताया था कि विज्ञापन में पेपर वन में सिर्फ क्वालिफाइंग अंक लाने की शर्त लगाई गई है। इसमें सभी अभ्यर्थियों को मात्र तीस अंक लाने की बात कही थी। इसका उद्देश्य परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के हिंदी और अंग्रेजी विषय की जानकारी की परीक्षा लेना था। इसलिए पेपर वन क्वालिफाइंग पेपर होने की वजह से इसका अंक कुल प्राप्तांक नहीं जोड़ा जाना था। लेकिन जेपीएससी ने इसे जोड़कर मेरिट लिस्ट बनाई है। इसके अलावा सभी पांच पेपर में कैटेगरी वाइज न्यूनतम अंक लाना था। इसका भी पालन नहीं किया गया। इसलिए मेरिट लिस्ट का रद करने का एकलपीठ का आदेश सही है।
अब आगे क्या हो सकता है
हाई कोर्ट की खंडपीठ के आदेश के बाद छठी जेपीएससी के मेरिट लिस्ट को रद करने का रास्ता साफ हो गया है। बताया जा रहा है कि मेरिट लिस्ट संशोधन के बाद नौकरी करने वाले डेढ़ सौ से अधिक अभ्यर्थियों की नौकरी जाएगी। इतने प्रार्थियों की ओर से हाई कोर्ट के खंडपीठ में याचिका दाखिल की गई थी। लेकिन उन्हें हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। ऐसे में अब उनकी पास सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने का विकल्प बचा है।
सरकार ने नहीं दाखिल की थी अपील
इस मामले में एकल पीठ के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने अपील दाखिल नहीं की थी। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने कहा था कि सरकार एकलपीठ के आदेश का पालन करेगी। यानी छठी जेपीएससी के मेरिट लिस्ट को रद कर पुन: संशोधित मेरिट जारी किया जाएगा। हालांकि इसके खिलाफ जेपीएससी ने अपील दाखिल कर दी थी। लेकिन बाद उनकी ओर से एक आवेदन देकर उसे वापस लेने की गुहार लगाई गई थी।
