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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 25, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

JPSC: छठी सिविल सेवा का संशोधित मेधा सूची तैयार करना इतना आसान नहीं, यहां समझिए कैसे...

By Sanjay KumarEdited By:
Published: Fri, 25 Feb 2022 11:22 AM (IST)Updated: Fri, 25 Feb 2022 11:24 AM (IST)

JPSC झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश कि छठी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा की मेधा सूची को रद कर नई मेधा ...और पढ़ें

JPSC: छठी सिविल सेवा का संशोधित मेधा सूची तैयार करने का आदेश
JPSC: छठी सिविल सेवा का संशोधित मेधा सूची तैयार करने का आदेश

रांची, (राज्य ब्यूरो)। JPSC छठी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा की मेधा सूची को रद कर नई मेधा सूची तैयार करने के झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश ने झारखंड लोक सेवा आयोग के साथ-साथ झारखंड सरकार की परेशानी बढ़ा दी है। एक तो सभी पदों पर नियुक्ति हो चुकी है, वहीं जेपीएससी के लिए संशोधित मेधा सूची तैयार करना आसान नहीं होगा। जानकारों के अनुसार, संशोधित मेधा सूची जारी करने में पेंच हो सकता है, क्योंकि इसमें कुछ वैसे अभ्यर्थी भी आ सकते हैं जो मुख्य परीक्षा में सफल नहीं होने के कारण साक्षात्कार में शामिल नहीं हो पाए थे।

इसको ऐसे समझिए...

उदाहरण के रूप में कोई अभ्यर्थी सभी विषयों में उत्तीर्ण है, लेकिन उसका कट आफ मार्क्स से एक अंक कम रहा होगा तो उसका चयन साक्षात्कार के लिए नहीं हुआ होगा। वहीं, कुछ अभ्यर्थी ऐसे भी होंगे जो एक या दो विषय में फेल होंगे, लेकिन कुल अंक कट आफ अंक से ऊपर है तो उनका चयन हो गया होगा। यदि ऐसा होता है तो संशोधित मेधा सूची में आनेवाले कुछ अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लेना पड़ सकता है, जिसके लिए कोर्ट से अनुमति भी लेनी पड़ सकती है।

आपको बता दें कि सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि आयोग ने अंतिम परिणाम जारी करने के बाद सभी अभ्यर्थियों के प्राप्तांक भी जारी कर दिए हैं और यह सार्वजनिक हो चुका है। ऐसे में साक्षात्कार लेने पर गोपनीयता का मामला उठ सकता है। इस तरह यह मामला और भी पेचीदा हो गया है।

अभ्यर्थी सर्वोच्च न्यायालय का भी खटखटा सकते हैं दरवाजा

यह भी कहा जा रहा है कि संशोधित मेधा सूची जारी होती है तो वैसे चयनित अभ्यर्थी सर्वोच्च न्यायालय का भी दरवाजा खटखटा सकते हैं जो मेधा सूची से बाहर हो जाएंगे। बता दें कि जेपीएससी ने अभ्यर्थियों के कुल प्राप्तांकों में मुख्य परीक्षा के पहले पत्र (हिन्दी एवं अंग्रेजी) के भी अंक जोड़ दिए थे जबकि यह केवल क्वालिफाइंग था। इसके अलावा प्रत्येक पत्र में न्यूनतम क्वालिफाइंग अंक लाना अनिवार्य था।

महाधिवक्ता दे चुके हैं संशोधित मेधा सूची जारी करने का परामर्श

झारखंड सरकार ने झारखंड उच्च न्यायालय के एकल पीठ के आदेश आने के बाद महाधिवक्ता से परामर्श लिया था। इसपर महाधिवक्ता ने संशोधित मेधा सूची जारी करने का परामर्श दिया था। हालांकि इस बीच ने जेपीएससी ने एकल पीठ के आदेश के विरुद्ध डबल बेंच में अपील याचिका दायर कर दी थी, लेकिन बाद में झारखंड सरकार के निर्देश पर वापस ले ली थी। इसके बाद झारखंड सरकार और जेपीएससी अभ्यर्थियों द्वारा दायर अपील याचिका के आदेश का इंतजार करता रहा। अब दोनों को संशोधित मेधा सूची जारी करने पर निर्णय लेना होगा।