प्रदीप सिंह, रांची। ज्यादातर राज्यों से एक-एक कर सत्ता गंवा रही कांग्रेस की बदतर हालत के लिए पार्टी की कार्यप्रणाली भी कम जिम्मेदार नहीं है। यहां धरातल पर मेहनत से काम करने वाले नेताओं-कार्यकर्ताओं को पद पर बिठाने की बजाय वैसे लोगों को ज्यादा तवज्जो मिलती है, जो बड़े नेताओं की गणेश परिक्रमा के साथ धन-बल और प्रभाव का बखूबी इस्तेमाल करते हैं। ताजा मामला अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एसआइसीसी) के सदस्यों की नियुक्ति का है। झारखंड से इस सूची में 50 नेताओं को शामिल किया गया है। पहले यह संख्या 40 हुआ करती थी। इस बार इसमें 10 का इजाफा हुआ है।

एआइसीसी के तमाम सदस्य 16-18 मार्च को नई दिल्ली में होने वाले कांग्रेस महाधिवेशन में शिरकत करेंगे। एआइसीसी सदस्यों की सूची में ऐसे कई लोग शुमार हैं जिन्होंने एक भी व्यक्ति को कांग्रेस से नहीं जोड़ा, पार्टी का सदस्य नहीं बनाया। जबकि सदस्यता अभियान के दौरान यह वायदा किया गया था कि जो सबसे ज्यादा सदस्य बनाएगा उसे ही पार्टी अहम पदों की जिम्मेदारी देगी। उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का सदस्य बनाया जाएगा लेकिन यहां उल्टा ही हुआ। लगभग डेढ़ दर्जन वैसे लोगों को एआइसीसी का सदस्य बनाया गया है जिन्होंने सदस्यता अभियान के दौरान एक भी सदस्य नहीं बनाए। इसके अलावा बाहर से दल में आने वालों से लेकर एक ही परिवार के दो लोगों को भी इस सूची में शुमार किया गया।

एक ऐसे व्यक्ति को भी एआइसीसी का सदस्य बनाया गया जो प्रदेश कांग्रेस कमेटी का सदस्य तक नहीं है। इससे जमीनी स्तर पर दल के साथ जुड़े नेताओं-कार्यकर्ताओं में खासा रोष है। हालांकि कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने सदस्यता अभियान के दौरान महती भूमिका निभाई है। इसमें सुबोधकांत सहाय, सुखदेव भगत, प्रदीप कुमार बलमुचू, धीरज साहू और आलोक दुबे शुमार हैं। आलोक दुबे सदस्यता प्रभारी थे। लेकिन एआइसीसी के सदस्यों से इनका नाम गायब है। इसके अलावा सुबोधकांत सहाय खेमे के नेताओं की भी अनदेखी की गई है। प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुखदेव भगत द्वारा की गई अनुशंसा को भी दरकिनार किया गया।

झारखंड से एआइसीसी में इन्हें मिली जगह

डा. अजय कुमार, सुबोधकांत सहाय, प्रदीप कुमार बलमुचू, धीरज साहू, गोपाल साहू, गीताश्री उरांव, अरूण उरांव, सुखदेव भगत, रामेश्वर उरांव, केएन त्रिपाठी, प्रदीप तुलस्यान, केशव महतो कमलेश, रमा खलखो, राजेंद्र प्रसाद सिंह, मन्नान मलिक, गोपी लाल, चंद्रशेखर दुबे, अजय दुबे, मदन महतो, विजय सिंह, संतोष सिंह, तिलकधारी सिंह, सरफराज अहमद, फुरकान अंसारी, कृष्णानंद झा, आलमगीर आलम, कामेश्वर बैठा, सुलतान अहमद, अशोक चौधरी, मंजू कुमारी, प्रणव झा, बजरंगी यादव, शहजादा अनवर, दुलाल भुईयां, भीम कुमार, रविंद्र सिंह, ज्योति सिंह मथारू आदि।

दिल्ली में होगा हंगामा

झारखंड से एआइसीसी के सदस्यों के मनोनयन को लेकर पनप रहा आक्रोश दिल्ली में फूट सकता है। कई नेता इस बाबत तैयारी कर रहे हैं। ये महाधिवेशन के दौरान विरोध करेंगे। एक वरीय नेता ने बताया कि रणनीति तैयार की जा रही है। यही हाल रहा तो उनके लिए अन्य दलों में जाने के विकल्प भी खुले हैं। वे पार्टी नेताओं की कारस्तानी से आलाकमान को अवगत कराएंगे। ऐसे नेताओं के तेवर को देखते हुए फिलहाल आधिकारिक तौर पर एआइसीसी के सदस्यों की सूची को सार्वजनिक करने से परहेज किया जा रहा है। उन नेताओं को मोबाइल पर मैसेज भेजकर केंद्रीय महाधिवेशन में शामिल होने को कहा गया है जिन्हें एआइसीसी का सदस्य बनाया गया है।

सूची फाइनल करने में पीआरओ की सहमति नहीं

एआइसीसी के सदस्यों की सूची जारी करने के पूर्व पीआरओ की सहमति अनिवार्य है। झारखंड में पूर्व केंद्रीयमंत्री चरणदास महंत पीआरओ थे। उन्होंने सहायक पीआरओ के साथ पूरे प्रदेश का दौरा किया और तमाम कमेटियों के गठन में महती भूमिका निभाई। बताते हैं कि उनसे सूची फाइनल करने से पूर्व सहमति तक नहीं ली गई।

यह भी जानिए

-झारखंड में लगभग चार साल तक चला कांग्रेस का सदस्यता अभियान-इस दौरान 5.75 लाख सदस्य बनाए गए

-सदस्यता अभियान में झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने बिहार समेत ओडि़शा, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड आदि राज्यों को पीछ छोड़ा-सदस्यता से पार्टी फंड में आए लगभग 40 लाख रुपये।

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Posted By: Sachin Mishra

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