संवाद सूत्र, चान्हो : आठ वर्षीय बिटिया को छोड़कर घर से लापता सरस्वती 12 वर्ष बाद जब परिवार से मिली तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आंखों से आंसू झरने लगे। गला भर आया। मानों उसे पूरी दुनिया मिल गई हो। वीडियो काल से उसने अपनी बड़ी हो चुकी बिटिया को भी खूब निहारा। ओडिशा के भद्रक जिले से लापता सरस्वती को परिवार से मिलाने में लापता हेल्प डेस्क की अहम भूमिका रही।

रांची जिले के चान्हो प्रखंड के बीजूपाड़ा स्थित माहेर आश्रम में रह रही 45 वर्षीय सरवती आश्रम में गुरुवार को अपने पति से मिली। इसके बाद पति के साथ घर रवाना हो गई। वर्ष 2010 में वह मानसिक रूप से बीमार थी। भद्रक के नाकंडी थाना क्षेत्र के जुरागडिया गांव स्थित ससुराल से अचानक लापता हो गई थी। पति भटकृष्णा प्रधान ने काफी खोजबीन की। कुछ पता नहीं चला। तीन वर्ष लावारिस भटकते रहने के बाद 11 जून 2013 को सरवती महाराष्ट्र के पुणे पुलिस को मिली। वहीं पर माहेर आश्रम में उसका इलाज शुरू हुआ। उसकी स्थिति में काफी सुधार आने लगा। वह हिदी बोलने लगी। इस कारण संस्था ने उसे झारखंड के आश्रम में भेज दिया, ताकि घर परिवार का पता चल सके। 17 अक्टूबर 2016 को वह यहां चली आई। यहां काके के रिनपास में इलाज हुआ तो और स्वस्थ हो गई। इसी बीच लापता पीड़ितों को परिवार से मिलाने वाली ह्यूमन राइट्स इक्वलिटी फाउंडेशन के पंकज प्रसाद को सरवती की कहानी बताई गई। पंकज प्रसाद एवं उनके साथी जितेंद्र पाडेय ने ओड़िया भाषा में सरस्वती से बात की। भद्रक जिले की टीम के साथी संजीव नायक व गंजाम जिले के सुरेंद्र नाहक से संपर्क कर पूरी जानकारी दी। संस्था की हेल्प डेस्क ने दो दिनों के अंदर परिवार को खोज लिया।

इसके बाद परिवार आश्रम पहुंचा। कागजी प्रक्रिया पूरी कर सरस्वती पति के साथ घर चली गई। आठ वर्ष की जिस बिटिया को वह छोड़ गई थी, अब वह 21 वर्ष की हो गई है। बिटिया ने जैसे ही वीडियो काल पर मां को देखा, पहचान गई।

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