सारंडा वन रिजर्व में जैव विविधता संरक्षण को 37 करोड़ की केंद्रीय सहायता, 31 हजार हेक्टेयर पर वन्यजीव अभयारण्य
राज्य सरकार सारंडा में 31 हजार हेक्टेयर से अधिक वनभूमि पर वन्यजीव अभयारण्य बना रही है। इस जैव विविधता के ...और पढ़ें

स्थानीय लोगों को संरक्षण प्रयासों से जोड़ने के लिए दिया जाएगा प्रशिक्षण।
HighLights
स्थानीय लोगों को संरक्षण प्रयासों से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण मिलेगा।
केंद्र सरकार के जैव विविधता बोर्ड से 37 करोड़ की सहायता।
दिसंबर में केंद्रीय टीम सारंडा के साल वृक्षों का अध्ययन करेगी।
राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य सरकार ने सारंडा में 31 हजार हेक्टेयर से अधिक वनभूमि पर वन्यजीव अभयारण्य बनाने की पहल की है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बन रहे इस फारेस्ट रिजर्व में करीब 89 प्रजाति की वनस्पति है। इस जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार से 37 करोड़ की सहायता राशि मिलेगी।
इससे यहां रहने वाले स्थानीय लोगों को जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इस वर्ष दिसंबर में केंद्रीय जैव विविधता बोर्ड की टीम यहां आकर वनस्पतियों का अध्ययन करेगी। वन्यजीव अभयारण्य के लिए राज्य सरकार ने भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से आवश्यक निर्देश मांगे हैं।
इसमें वनस्पतियों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विशेषज्ञों की नियुक्ति और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा लातेहार में टाइगर सफारी के लिए भी जैव विविधता बोर्ड अपनी सलाह राज्य सरकार को देगा।
केंद्रीय सहायता से मिली राशि से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन भी किया जाएगा। इसके जरिए वनोत्पाद संग्रह कर उन्हें बाजार तक पहुंचाने में मदद भी की जाएगी।
साल वृक्षों पर होगा अध्ययन
सारंडा में एशिया का सबसे बड़ा साल वृक्षों का वन है। जैव विविधता बोर्ड के सलाहकार विज्ञानी विवेक चौधरी ने बताया कि अफ्रीका के कुछ हिस्सों में सालवृक्ष के वन लगाए गए लेकिन पौधों का ग्रोथ सही नहीं रहा।
दिसंबर में सारंडा का अध्ययन करने के लिए पहुंचने वाली टीम यहां के सालवृक्षों की वृद्धि के कारकों की पहचान करेगी। इनकी वैज्ञानिक परख कर देश के दूसरे हिस्सों में सालवृक्ष लगाने पर भी विचार किया जाएगा।
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