रांची, जेएनएन। रिटायर्ड आइपीएस अधिकारी मृत्युंजय किशोर मीतू की बहन को रांची के खादगढ़ा बस स्टैंड से एक 12 वर्ष की बच्ची को जबरन ले जाने की कोशिश महंगी पड़ी। उन्हें जबरन बच्ची को खींचते देख वहां मौजूद बस स्टैंड के एजेंट ह्यूमन ट्रैफिकिंग से जुड़ा मामला समझ उनसे उलझ गए और बच्ची को ले जाने से रोका। इसपर रिटायर्ड आइपीएस की बहन उन एजेंटों से उलझ गईं।

उधर बच्ची रोते हुए जाने से इन्कार कर रही थी। इतने में एजेंटों ने खादगढ़ा टीओपी और लोअर बाजार थाना प्रभारी को सूचना दे दी। मामले की सूचना मिलते ही मौके पर लोअर बाजार थानेदार सतीश कुमार मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी ली। इस दौरान भी महिला बच्ची को ले जाने की जिद पर अड़ी रही। सूचना पाकर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की सदस्य तनुश्री सरकार ने बच्ची को तत्काल प्रेमाश्रय भेजने के लिए कहा। इसके बाद महिला को पुलिस ने प्रेमाश्रय पहुंचा दिया। रिटायर्ड आइपीएस के घर से जुड़ा होने की वजह से इस मामले का दबाने की भी कोशिश की गई।

आज होगा बच्ची का बयान

बच्ची को शुक्रवार को सीडब्ल्यूसी की बेंच में प्रस्तुत किया जाएगा। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष सहित अन्य बच्ची का बयान लेंगे। फिलहाल बच्ची का क्या आरोप है, उसे क्यों ले जाया जा रहा था, आदि बातों की जानकारी सीडब्ल्यूसी को नहीं मिली है। सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष रूपा कुमारी ने कहा है कि बच्ची को फिलहाल प्रेमाश्रय में रखा गया है। शुक्रवार को बयान लेने के बाद ही पूरा मामला स्पष्ट हो पाएगा।

स्थानीय एजेंटों और अन्य लोगों के अनुसार बच्ची रिटायर्ड आइपीएस के घर मजदूरी करती थी। वहां से परेशान होकर भाग निकली थी। भनक लगने पर उसके पीछे रिटायर्ड आइपीएस की बहन भी वहां पहुंच गईं थी, जो जबरन बच्ची को खींच कर ले जा रही थी। वहीं कुछ लोगों ने यह भी जानकारी दी है कि बच्ची को बाहर से काम के लिए लाया गया था। उसे लेने के लिए रिटायर्ड अधिकारी की बहन वहां पहुंची थीं। इस दौरान हंगामा हो गया।

Posted By: Alok Shahi

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