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रांची रिम्स में फर्जी जाति-आवासीय प्रमाणपत्र देने वाले मेडिकल छात्रों का रद होगा नामांकन, जांच शुरू

Published: Mon, 06 Jul 2026 10:55 AM (IST)

रांची रिम्स ने 2025-26 बैच के सभी एमबीबीएस छात्रों के जाति और आवासीय प्रमाणपत्रों के सत्यापन का फैसला किया है। ...और पढ़ें

तीन छात्रों का नामांकन रद होने के बाद जागा रिम्स प्रबंधन

तीन छात्रों का नामांकन रद होने के बाद जागा रिम्स प्रबंधन

HighLights

  1. रिम्स 2025-26 बैच के सभी एमबीबीएस छात्रों के प्रमाणपत्रों की जांच करेगा।

  2. फर्जी दस्तावेज पाए जाने पर छात्रों का नामांकन तुरंत रद्द होगा।

  3. पहले भी दो एमबीबीएस छात्रों का नामांकन फर्जी प्रमाणपत्र पर रद्द।

अनुज तिवारी, रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर एमबीबीएस में नामांकन लेने के लगातार सामने आए मामलों के बाद प्रबंधन ने बड़ा फैसला लिया है। अब नए शैक्षणिक सत्र 2025-26 में नामांकित सभी एमबीबीएस छात्रों के जाति एवं आवासीय प्रमाणपत्रों का विभिन्न जिलों के जिला प्रशासन को सत्यापन के लिए भेज दिया गया है। 

सत्यापन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर संबंधित छात्र का नामांकन तत्काल रद किया जाएगा और नियमानुसार आगे की कार्रवाई होगी। 

एमबीबीएस की 180 सीटों पर नामांकन

रिम्स प्रबंधन का मानना है कि इस कदम से प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए मेडिकल सीट हासिल करने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। वर्ष 2025-26 बैच में एमबीबीएस की 180 सीटों पर नामांकन हुआ है। 

अब सभी विद्यार्थियों के दस्तावेजों की क्रमवार जांच कराई जाएगी। संस्थान के जन संपर्क पदाधिकारी डॉ. शिशिर बताते हैं कि अभी जो भी नामांकन होता है उसकी पूरी जांच काउंसिल के द्वारा की जाती है, जिसके बाद ही नामांकन की प्रक्रिया रिम्स में होती है। 

लेकिन कुछ छात्रों के फर्जी प्रमाण पत्र मिलने के बाद प्रबंधन खुद से सभी छात्र-छात्राओं के प्रमाण पत्र की जांच करवा रहा है। इससे पहले भी किसी की शिकायत मिलने पर जांच होता था।

दो छात्रों का पहले ही रद हो चुका है नामांकन

रिम्स में अब तक फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर प्रवेश लेने वाले दो एमबीबीएस छात्रों का नामांकन रद किया जा चुका है। हाल ही में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र आशीष कुमार का जाति प्रमाणपत्र साहिबगंज जिला प्रशासन की जांच में फर्जी पाया गया। शिकायत मिलने पर रिम्स ने प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए उपायुक्त को पत्र भेजा था। 

जांच रिपोर्ट में प्रमाणपत्र अमान्य मिलने के बाद छात्र का नामांकन रद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इससे पहले वर्ष 2025 बैच की छात्रा काजल कुमारी का भी दाखिला रद किया गया था। गिरिडीह प्रशासन की जांच में उसका जाति प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया था। 

आरोप था कि उसने आरक्षित श्रेणी का लाभ लेने के लिए जाली प्रमाणपत्र का उपयोग कर एमबीबीएस सीट हासिल की थी। जांच पूरी होने के बाद दिसंबर 2025 में उसका नामांकन निरस्त कर दिया गया।

बीडीएस की छात्रा का भी प्रमाणपत्र निकला था फर्जी

रिम्स में केवल एमबीबीएस ही नहीं, बीडीएस पाठ्यक्रम में भी फर्जी प्रमाणपत्र का मामला सामने आ चुका है। बीडीएस छात्रा ओली विश्वकर्मा के जाति प्रमाणपत्र की शिकायत मिलने पर जांच कराई गई थी। जिला प्रशासन की रिपोर्ट में उसका प्रमाणपत्र भी फर्जी पाया गया था।

सीआईडी भी कर रही जांच

रिम्स में फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए नामांकन के मामलों की जांच सीआईडी भी कर रही है। हाल के महीनों में सीआईडी की टीम संस्थान पहुंचकर निदेशक, अधीक्षक सहित अन्य से पूछताछ कर चुकी है तथा संबंधित दस्तावेज भी अपने साथ ले गई है। ऐसे में रिम्स प्रबंधन अब सभी छात्रों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन कर भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी में है।

250 सीट बढ़ाने की तैयारी भी

रिम्स प्रबंधन एक ओर फर्जी प्रमाणपत्र पर सख्ती कर रहा है तो दूसरी ओर एमबीबीएस की 250 सीटें बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है। हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के साथ हुई समीक्षा बैठक में एमबीबीएस, एमडी-एमएस और एमडीएस की सीटें बढ़ाने के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना, फैकल्टी और अन्य मानकों की समीक्षा की गई थी। 

विभाग ने रिम्स को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मानकों को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है। यदि सभी मानक पूरे हो जाते हैं तो आने वाले वर्षों में एमबीबीएस की सीटों में और वृद्धि हो सकती है।

जांच की जरूरत क्यों?

रिम्स प्रबंधन का मानना है कि एक मेडिकल सीट हासिल करने के लिए हजारों छात्र प्रतिस्पर्धा करते हैं। ऐसे में यदि कोई अभ्यर्थी फर्जी जाति या आवासीय प्रमाणपत्र के आधार पर प्रवेश लेता है तो वह वास्तविक पात्र छात्र का अधिकार छीनता है। इसी कारण अब प्रवेश के बाद भी सभी दस्तावेजों का जिला प्रशासन से सत्यापन कराने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

अब आगे क्या होगा

समीक्षा बैठक में प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद रिम्स सभी छात्रों के जाति एवं आवासीय प्रमाणपत्र संबंधित जिलों के उपायुक्त कार्यालय भेजेगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी भी छात्र के दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं तो उसका नामांकन तत्काल रद कर दिया जाएगा और आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए मामला संबंधित एजेंसियों को भेजा जाएगा।

रिम्स एमबीबीएस

  • रिम्स में एमबीबीएस की वर्तमान सीटें : 180
  • राज्य कोटे से अधिकांश छात्रों का होता है नामांकन
  • 2025 बैच के दो छात्रों का फर्जी जाति प्रमाणपत्र पर नामांकन रद
  • 2026 में एक और छात्र का प्रमाणपत्र जांच में फर्जी
  • अब 2025-26 बैच के सभी छात्रों के जाति व आवासीय प्रमाणपत्र का होगा सत्यापन