तीन साल में तीन टेंडर, फिर भी अधर में रिम्स का नया OPD भवन; लागत 196 से बढ़कर 256 करोड़ पहुंची
रिम्स में नए ओपीडी भवन का निर्माण तीन साल और तीन टेंडर के बाद भी शुरू नहीं हो सका है, ...और पढ़ें

रिम्स में ओपीडी के गलियारे में बैठे मरीज। (जागरण)
HighLights
नया ओपीडी भवन तीन साल से अटका, लागत बढ़ी।
एनएमसी ने 180 एमबीबीएस सीटों को सशर्त मंजूरी दी।
45 दिन में आधारभूत संरचना सुधारने का निर्देश।
जागरण संवाददाता, रांची। राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज रिम्स की आधारभूत संरचना पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
एक ओर नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 180 एमबीबीएस सीटों को सशर्त मान्यता देते हुए 45 दिनों के भीतर आधारभूत संरचना, फैकल्टी और क्लीनिकल सुविधाओं की कमियों को दूर करने के निर्देश दिए हैं।
वहीं, दूसरी ओर रिम्स के सबसे महत्वपूर्ण नए ओपीडी भवन का निर्माण तीन वर्षों में तीन बार टेंडर जारी किए जाने के बाद भी शुरू नहीं हो सका है। बल्कि नए ओपीडी भवन की अनुमानित लागत चार वर्षों 196.23 करोड़ से बढ़कर 256 करोड़ रुपये हो गया, जो सीधे सरकार के राजस्व पर असर डालेगा।
एनएमसी के अंडर ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (यूजीएमईबी) ने 28 जून को लेटर ऑफ रिन्यूअल (एलओआर) जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि यह मान्यता पूरी तरह सशर्त है।
मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) निर्धारित समय के बाद रिम्स का भौतिक, वर्चुअल अथवा हाइब्रिड निरीक्षण करेगा। यदि कमियां तो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम-2019 की धारा-26 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
विडंबना यह है कि जिन आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत एनएमसी ने बताई है, उनमें सबसे महत्वपूर्ण ओपीडी भवन का निर्माण ही वर्षों से फाइलों में अटका हुआ है।
2023 में विभिन्न परियोजनाओं के लिए 2200 करोड़ रुपये के जारी किए गए थे टेंडर
रिम्स के व्यापक विस्तार के लिए वर्ष 2023 में लगभग 2200 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का टेंडर जारी किया गया था।
इसमें 439.86 करोड़ रुपये का नया आईपीडी ब्लॉक, 409.38 करोड़ रुपये का सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक, 221.42 करोड़ रुपये का मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल तथा 196.23 करोड़ रुपये का नया ओपीडी ब्लॉक शामिल था। लेकिन पहली टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और बिना सटीक कारण बताए रद कर दी गई।
इसके बाद वर्ष 2024 में दोबारा टेंडर निकाला गया। इस बार ओपीडी भवन की लागत बढ़कर 256 करोड़ रुपये हो गई, लेकिन दूसरी बार भी प्रक्रिया अधूरी रह गई। 22 अप्रैल 2026 को झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड (जेएसबीसीसीएल) ने तीसरी बार टेंडर जारी किया, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
एमबीबीएस सीटें तो बचीं, लेकिन चुनौती अभी बाकी
एनएमसी की सशर्त मंजूरी से फिलहाल 2026-27 सत्र (रिन्युअल) में 180 एमबीबीएस सीटों पर नामांकन का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि यह राहत अस्थायी है।
आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित समय में आधारभूत ढांचे और फैकल्टी की कमियां दूर नहीं हुईं तो आगामी निरीक्षण के बाद सीटों पर भी असर पड़ सकता है।
मालूम हो कि अभी एनएमसी ने एमबीबीएस की सीट बढ़ाते हुए 250 सीटों पर नामांकन के लिए हरी झंडी दी है, लेकिन इसके लिए भी प्रबंधन को संसाधन को मजबूत करने को कहा गया है।
झारखंड हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन (झासा) के प्रदेश सचिव डॉ. मृत्युंजय का कहना है कि रिम्स जैसे राज्य के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान में अब केवल टेंडर निकालने से काम नहीं चलेगा।
मरीजों की सुविधा और मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अधूरी परियोजनाओं को युद्धस्तर पर पूरा करना होगा।
यदि निर्माण कार्य जल्द शुरू नहीं हुआ तो इसका असर न केवल रिम्स में आनेवाले मरीजों की चिकित्सा सेवाओं पर पड़ेगा, बल्कि भविष्य में मेडिकल शिक्षा और एनएमसी की मान्यता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा हो सकता है।
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