रिम्स की नई पहल: 30 गरीब छात्रों को मुफ्त नीट कोचिंग, 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर होगा चयन
रांची के रिम्स ने आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों के लिए नीट की मुफ्त तैयारी शुरू की है। ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अनुज तिवारी, रांची। राज्य के सबसे बड़े अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) ने आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए चिकित्सा प्रवेश परीक्षा (नीट) की निश्शुल्क तैयारी की व्यवस्था आरंभ कर दी है।
संस्थान की इस योजना के तहत सीमित सीटों पर चयन कर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन रिम्स के मेडिकल छात्र-छात्राओं के द्वारा ही उपलब्ध कराया जाएगा।
इस संबंध में प्रबंधन ने बताया कि कुल 30 विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। चयन की प्रक्रिया पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर तय की गई है, जिससे आवेदन शुरू होते ही छात्रों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
शासी परिषद की बैठक के निर्णय पर बढ़ा कदम
इस योजना की खास बात यह है कि यह हाल ही में संस्थान की गवर्निंग बाडी (जीबी) की बैठक में लिए गए निर्णय का प्रत्यक्ष परिणाम है। बैठक में यह महसूस किया गया था कि राज्य के कई प्रतिभाशाली छात्र आर्थिक संसाधनों के अभाव में प्रतियोगी परीक्षाओं की समुचित तैयारी नहीं कर पाते। ऐसे में संस्थान स्तर पर उन्हें मार्गदर्शन देना जरूरी है। इसी सोच के तहत इस निश्शुल्क कोचिंग योजना को मूर्त रूप दिया गया है।
मेडिकोस करेंगे संचालन, मिलेगा विशेषज्ञ मार्गदर्शन
इस पूरी योजना का संचालन रिम्स के मेधावी चिकित्सक छात्र (मेडिकोस) करेंगे। ये छात्र स्वयं प्रतियोगी परीक्षाओं का अनुभव रखते हैं, जिससे चयनित विद्यार्थियों को परीक्षा की रणनीति, विषयगत समझ और समय प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर बेहतर मार्गदर्शन मिल सकेगा।
क्या हैं पात्रता की शर्तें
इस योजना का लाभ केवल झारखंड के स्थायी निवासी विद्यार्थियों को ही मिलेगा। साथ ही अभ्यर्थी का राज्य के सरकारी विद्यालय से पढ़ाई करना अनिवार्य रखा गया है। इसका उद्देश्य उन छात्रों तक अवसर पहुंचाना है, जो संसाधनों के अभाव में पिछड़ जाते हैं।
कोचिंग पूरी तरह निश्शुल्क होगी, हालांकि चयनित छात्रों को रहने और भोजन की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। इन विद्यार्थियों के लिए कोचिंग की व्यवस्था रिम्स परिसर में ही आयोजित होगी, जो अवकाश छोड़ हर दिन चलाया जाएगा।
इच्छुक छात्र-छात्राएं 6 अप्रैल आनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। रिम्स प्रशासन के अनुसार इस योजना को सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त है और इसे पारदर्शी तरीके से लागू किया जाएगा।
छात्रों के लिए क्यों है महत्वपूर्ण
राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निजी कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता अधिक है, जहां फीस काफी ऊंची होती है। ऐसे में यह पहल उन विद्यार्थियों के लिए राहत लेकर आई है, जो आर्थिक तंगी के कारण अच्छी तैयारी नहीं कर पाते।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की योजनाएं निरंतर चलती रहीं, तो ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के छात्र भी चिकित्सा जैसे प्रतिष्ठित क्षेत्र में अपनी जगह बना सकेंगे।
शिक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण
रिम्स की यह पहल केवल कोचिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक उत्तरदायित्व का भी उदाहरण प्रस्तुत करती है। संस्थान ने यह संदेश दिया है कि शिक्षा केवल संसाधनों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए संस्थागत सहयोग जरूरी है।
कुल मिलाकर, यह योजना झारखंड के उन विद्यार्थियों के लिए एक सुनहरा अवसर है, जो डाक्टर बनने का सपना देखते हैं, लेकिन आर्थिक बाधाओं के कारण पीछे रह जाते हैं। यदि इस पहल को व्यापक रूप दिया जाता है, तो यह राज्य में चिकित्सा शिक्षा के स्तर को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकती है।
