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RIMS में होने जा रहे बड़े बदलाव, 10 नए विभाग खुलेंगे; 150 सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टरों की होगी बहाली

Published: Fri, 16 Oct 2026 10:59 AM (IST)

रिम्स की 66वीं गवर्निंग बाडी की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनमें 10 नए विभाग खोलना, 150 सुपर ...और पढ़ें

रांची रिम्स की फाइल फोटो। जागरण

रांची रिम्स की फाइल फोटो। जागरण

HighLights

  1. 10 नए विभाग खुलेंगे, 150 सुपर स्पेशियलिटी सीटें बढ़ेंगी।

  2. परिसर के कायाकल्प पर 466 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

जागरण संवाददाता, रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने और डाक्टरों की कमी दूर करने के लिए बड़े बदलाव की तैयारी है। रिम्स की 66वीं गवर्निंग बॉडी (जीबी) की बैठक में 10 नए विभाग शुरू करने, 150 सुपर स्पेशियलिटी सीट बढ़ायी जाएगी, जो अभी 11 सीट है। साथ ही पीजी की 176 से 250 सीट बढ़ेंगे।

नर्सों के 106 नए पद सृजित करने और पूरे परिसर के कायाकल्प पर 466 करोड़ रुपये खर्च करने समेत कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इसके अलावा आयुष्मान भारत योजना के तहत बेहतर सेवाएं देने के लिए 100 आयुष्मान मित्रों की बहाली की जाएगी।

अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था भी चरणबद्ध तरीके से स्पेशल आक्सिलियरी पुलिस (सैप) के हवाले की जाएगी, साथ ही होमगार्ड जवानों को रिम्स से हटाया जाएगा। साथ ही रिम्स के बर्न वार्ड को विस्तार देते हुए वर्ल्ड क्लास सेंटर बनाया जाएगा।

बैठक में रिम्स के प्रभारी निदेशक प्रो. डॉ. डीके सिन्हा को अवधि विस्तार देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। इस पर अंतिम निर्णय के लिए प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा जाएगा। वहीं, स्थायी निदेशक की नियुक्ति के लिए जल्द विज्ञापन जारी करने की बात कही गई है। प्रभारी निदेशक इसी माह सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

ऐसे में कैबिनेट से समय पर मंजूरी नहीं मिलने पर रिम्स में नए प्रभारी निदेशक की नियुक्ति करनी पड़ सकती है। स्थायी निदेशक की नियुक्ति होने तक प्रो. सिन्हा को पद पर बनाए रखने के प्रस्ताव पर कैबिनेट विचार करेगा। अगर समय से फैसला नहीं लिया गया तो अगले दो माह के लिए वरीयता के हिसाब से नए प्रभारी निदेशक कुर्सी संभाल सकते हैं।

मालूम हो कि स्थायी निदेशक की नियुक्ति की फाइल पहले से ही स्वास्थ्य मंत्री के पास पड़ी है। दूसरी ओर, स्थायी निदेशक की नियुक्ति छह माह के भीतर करने का प्रविधान है।

10 नए विभागों में मिलेगी सुपर स्पेशियलिटी सुविधा

रिम्स में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, एंडोक्रिनोलॉजी, क्लिनिकल हेमेटोलॉजी, रूमेटोलॉजी, न्यूरो एनेस्थीसिया, कार्डियक एनेस्थीसिया, न्यूक्लियर मेडिसिन, इमरजेंसी मेडिसिन सहित 10 नए विभाग शुरू करने की योजना है। इन विभागों के शुरू होने से गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधा बढ़ेगी। मरीजों को संबंधित विशेषज्ञों से इलाज कराने के लिए दूसरे राज्यों का रुख करने की जरूरत कम होगी।

डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए 150 सुपर स्पेशियलिटी सीट बढ़ाने प्रक्रिया तेज करने का निर्णय लिया गया है। बहाली प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए रिम्स नियमावली में आवश्यक संशोधन और नई चयन समिति के गठन के प्रस्ताव पर सहमति दी गई है। इसके अलावा चिकित्सकों के 319 पदों का पुनर्गठन होगा और 16 नए पद सृजित किए जाएंगे।

प्रोन्नति में मरीजों को देखने और पढ़ाने वालों को प्राथमिकता

रिम्स में डॉक्टरों की प्रोन्नति के लिए नई सेवा शर्तों को मंजूरी दी गई है। अब रिसर्च पेपर के साथ पीजी विद्यार्थियों को गाइड करने और अधिक मरीजों का इलाज करने वाले चिकित्सकों को भी प्रोन्नति में अतिरिक्त अंक और प्राथमिकता दी जाएगी। अब तक प्रोन्नति में रिसर्च पेपर को प्रमुख आधार माना जाता था। नई व्यवस्था से मरीजों के इलाज और मेडिकल शिक्षा में योगदान को भी महत्व मिलेगा।

नर्सों के 106 और हॉस्पिटल मैनेजर के 12 पद बनेंगे 

अस्पताल में नर्सिंग सेवाओं को मजबूत करने के लिए 106 नए पद सृजित किए जाएंगे। इसके अलावा 144 नर्सिंग स्टाफ की नियुक्ति की प्रक्रिया भी चल रही है। अस्पताल के संचालन और प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए हॉस्पिटल मैनेजर के 12 पद सृजित किए जाएंगे। आयुष्मान योजना के मरीजों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 100 आयुष्मान मित्रों की बहाली की जाएगी।

नॉन टीचिंग के 100 पद घटेंगे, नए तकनीकी पद बनेंगे

रिम्स में नॉन टीचिंग पदों की संख्या 1962 से घटाकर 1862 करने का निर्णय लिया गया है। घटाए गए पदों के पुनर्गठन के तहत आईटी मैनेजर, हॉस्पिटल मैनेजर, लैब टेक्नीशियन सहित आवश्यक पदों के सृजन पर जोर दिया जाएगा। बैठक में रिम्स रेगुलेशन, 2014 के स्थान पर रेगुलेशन एक्ट 2026 लाने का निर्णय लिया गया।

पीजी छात्रों व रेजिडेंट डॉक्टरों को हॉस्टल का देना होगा शुल्क

रिम्स परिसर के जीर्णोद्धार पर 466 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। इसके तहत विभिन्न विभागों, हॉस्टल और डॉक्टरों के आवासीय परिसर सहित अन्य भवनों का विकास किया जाएगा। पीजी विद्यार्थियों और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए डीआईजी ग्राउंड में पीपीपी मोड पर हास्टल बनाया जाएगा। यहां डाक्टर निर्धारित शुल्क देकर रह सकेंगे। इसी मैदान में आधुनिक खेल परिसर विकसित करने की भी योजना है।

ईको और अल्ट्रासाउंड मशीनों की होगी खरीदारी

मरीजों को जांच के लिए लंबी कतारों से राहत दिलाने के लिए नई ईको और अल्ट्रासाउंड मशीनें खरीदी जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि इन जांचों के लिए मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। कई बार समय पर जांच नहीं होने से इलाज में भी देरी होती है।

रिम्स की सुरक्षा की जिम्मेदारी अब सैप के हाथ 

रिम्स परिसर की सुरक्षा व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से सैप के जवानों को सौंपी जाएगी। वर्तमान में तैनात होमगार्ड जवानों की संख्या धीरे-धीरे कम करते हुए सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सैप को देने की योजना है। रिम्स के बेहतर संचालन के लिए 10 नई समितियों के गठन का निर्णय लिया गया है।

इनमें स्थायी एवं लेखा समिति, स्थायी प्रोन्नति समिति, स्थायी शैक्षणिक समिति, स्थायी संपदा समिति, स्थायी तकनीकी समिति, स्थायी भंडार एवं निविदा समिति, स्थायी अस्पताल समिति और स्थायी सुरक्षा समिति सहित अन्य समितियां शामिल हैं। पहले रिम्स में पांच समितियां थीं। नई समितियों के गठन से प्रशासनिक और तकनीकी कार्यों को व्यवस्थित करने का लक्ष्य है।

जीबी में जो भी निर्णय लिया जाता है उसे किसी भी हाल में अगली जीबी तक अमल में लाना होगा। इस संबंध में निदेशक को स्पष्ट निर्देश दिया गा है कि वे सभी निर्णय को समय से पूरा करें ताकि जो निर्णय लिया जाता है उससे मरीजों, छात्रों व डाक्टरों को लाभ मिल सके।

-डॉ. इरफान अंसारी, स्वास्थ्य मंत्री। 

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