जागरण संवाददाता, रांची : रांची विश्वविद्यालय युवा महोत्सव के समापन के साथ इस वर्ष के विजेता टीम की घोषणा हुई। मेजबानी कर रही महिला कॉलेज रांची की टीम ओवर ऑल चैंपियन बनी। विजेता टीम ने सभी प्रतियोगिताओं में कुल 105 अंक प्राप्त किए। 72 अंक पा कर रामलखन सिंह यादव कॉलेज की टीम दूसरे स्थान पर रही।

महोत्सव में कुल 28 प्रतियोगिताएं हुई, जिसमें 18 कॉलेज के कुल 498 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों में छात्राओं की संख्या अधिक रही। छात्रों के मुकाबले 59 प्रतिशत छात्राओं ने महोत्सव में अपना योगदान दिया। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर रांची विवि की प्रतिकुलपति डॉ. कामिनी कुमार उपस्थित हुई। साथ में विवि के डीएसडब्ल्यू डॉ. केके वर्मा, कॉलेज की प्राचार्या डॉ. मंजू सिन्हा मौजूद थीं। अंतिम दिन कोई प्रतियोगिता नहीं हुई।

सुबह 11 बजे समापन समारोह शुरू हुआ। सभी कॉलेज और विभागों के प्रतिभागी और शिक्षक मैत्रेयी सभागार में उपस्थित रहे। डॉ. कमल बोस के संचालन में कई प्रस्तुतियों के बाद बारी-बारी से सभी इवेंट के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। अंत में विजेता और उपविजेता का नाम घोषित किया गया। प्राचार्या के संबोधन के बाद डॉ सुशील अंकन ने तीन दिनों के कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की।

अनुशासन के बगैर जीवन बिना डोरी के पतंग की तरह :युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि, रांची विवि की प्रतिकुलपति डॉ. कामिनी कुमार ने एक कहानी से माध्यम से लोगों को संदेश दिया। उन्होने कहा कि जब हम पतंग से डोरी को काट देते हैं, तो पतंग और उपर जाने के बजाय सीधा नीचे गिरती हैं। हमारी सफलता की राह में अनुशासन, हमारे माता-पिता और गुरुजन भी पतंग की डोरी के समान हैं। उनके होने को हम बाधा नहीं समझें।

उन्होने कहा कि इच्छाएं जीवन में बेहद जरूरी है। दृढ इच्छाएं संकल्प बनती हैं, और संकल्प के साथ जब पुरुषार्थ जुड़े तो वह सिद्धी बन जाती है।

महोत्सव का श्रेय पूरी टीम के हिस्से :महिला कॉलेज की प्राचार्या डॉ. मंजू सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि भले ही युवा महोत्सव की मेजबानी वीमेंस कॉलेज ने की है। लेकिन आयोजन को सफल बनाने में विश्वविद्यालय की पूरी टीम ने सहयोग किया है। उन्होने बहा कि सभी प्रतियोगिताओं के जज विभिन्न कॉलेजों से थे।

संचालन से ले कर अन्य कार्यो में ना केवल महिला कॉलेज बल्कि सभी कॉलेजों के शिक्षकों ने भरपूर सहयोग किया। मौके पर विवि के डीएसडब्ल्यू डॉ. केके वर्मा ने जानकारी दी कि अन्य जिले से आए प्रतिभागियों के ठहरने का भी प्रबंध एचआरडीसी में किया था।

उन्होने जीना यहां, मरना यहां गाना भी गाया। बिरसा कॉलेज खूंटी और मारवाड़ी कॉलेज के शिक्षकों को अनुभव साझा करने का मौके मिला। मारवाड़ी कॉलेज के प्रोफेसर इंचार्ज डॉ. कुमार अदितेंद्र नाथ शाहदेव ने कहा कि कला, पढ़ाई और खेल के किसी भी क्षेत्र में बच्चों को शत प्रतिशत देने की जरूरत है।

Posted By: Jagran

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