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SIR Jharkhand: 10 अक्टूबर को मेगा हेल्प डेस्क, मतदाताओं को अनावश्यक परेशान नहीं करें; बुर्जुगों की रिवर्स मैपिंग

Published: Sun, 04 Oct 2026 12:05 PM (IST)

झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत सुनवाई में केवल भारतीय नागरिकता और संबंधित मतदान क्षेत्र का ...और पढ़ें

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने एसआईआर से जुड़े अधिकारियों को दिए स्पष्ट निर्देश।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने एसआईआर से जुड़े अधिकारियों को दिए स्पष्ट निर्देश।

HighLights

  1. सुनवाई में भारतीय नागरिकता और निवास की पात्रता जांची जाएगी।

  2. अनावश्यक दस्तावेज मांगने से बचें, मतदाताओं को परेशान न करें।

  3. 10 अक्टूबर को सभी मतदान केंद्रों पर मेगा हेल्प डेस्क।

राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत नोटिस की सुनवाई को लेकर स्पष्ट किया है कि इसमें सिर्फ यह देखा जाएगा कि कोई मतदाता भारतीय नागरिक तथा संबंधित मतदान क्षेत्र का सामान्य निवासी है या नहीं। नए मतदाताओं के लिए यह भी देखा जाएगा कि वह एक अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष पूरा कर चुका है या नहीं।

सुनवाई में मतदाताओं को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े, इसे लेकर उन्होंने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों, ईआरओ एवं एईआरओ को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम के सामने तार्किक विसंगति होने के कई कारण हो सकते हैं।

गणना प्रपत्र भरने के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा गलत जानकारी दर्ज हो जाना, विगत एसआइआर के दौरान गलत मैपिंग हो जाना अथवा पिछले एसआइआर में ही कोई जानकारी त्रुटिपूर्ण दर्ज होना इसके कारण हो सकते हैं।

उनके अनुसार, पिछले एसआइआर में हुई त्रुटियों को वर्तमान प्रक्रिया में ठीक करना सुनवाई का विषय नहीं है। वर्तमान सुनवाई का उद्देश्य पात्र भारतीय नागरिकों का मतदाता सूची में निबंधन सुनिश्चित करना है।

उन्होंने अधिकारियों को दिए गए दिशा-निर्देश में कहा गया है कि नोटिस के अलग-अलग कारणों के आधार पर मतदाताओं को अलग-अलग दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है। सुनवाई के दौरान संविधान के अनुच्छेद 326 एवं लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रविधानों के अनुरूप मतदाता की पात्रता सुनिश्चित की जाए।

वृद्ध मतदाताओं की होगी रिवर्स मैपिंग

जारी दिशा-निर्देश के अनुसार, जिन मतदाताओं की वर्ष 2003 की एसआइआर से मैपिंग उपलब्ध है, उनके मामले में मैपिंग के आधार पर भी मतदाता होने की पात्रता सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए मतदाता का नाम अथवा उसके माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी के नाम से मैपिंग की जाएगी।

वहीं, वृद्ध मतदाताओं के मामले में उन्हीं के नाम पर वांछित दस्तावेज अनुपलब्ध रहने पर उनके पुत्र–पुत्री से रिवर्स मैपिंग करते हुए भी सत्यापन किया जा सकता है, बशर्ते उनके पुत्र–पुत्री मतदाता सूची में निबंधित हों एवं पुत्र–पुत्री के दस्तावेज में उनके माता-पिता का नाम भी दर्ज हो।

10 अक्टूबर को सभी मतदान केंद्रों पर मेगा हेल्प डेस्क

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने मतदाताओं की सुविधा के लिए सभी मतदान केंद्रों पर 10 अक्टूबर को मेगा हेल्प डेस्क की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।

हेल्प डेस्क पर ऐसे पदाधिकारी/कर्मचारी उपलब्ध रहेंगे, जो नागरिकों को नोटिस की सुनवाई, दावा-आपत्ति, मतदाता सूची में नाम जोड़ने तथा अन्य संबंधित प्रक्रियाओं के संबंध में जानकारी उपलब्ध करा सकें। साथ ही वल्नरेबल/कमजोर वर्ग के पात्र भारतीय नागरिक मतदाताओं के निबंधन के लिए विशेष आउटरीच कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए गए हैं। 

बीएलओ घर जाकर मतदाताओं से आवश्यक दस्तावेज करेंगे संकलित

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत नोटिस प्राप्त मतदाताओं को सामान्य सुनवाई के लिए ईआरओ कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं है। मतदाताओं की सुविधा के लिए बीएलओ घर-घर जाकर आवश्यक दस्तावेज संकलित करेंगे और उन्हें ईसीआइनेट पर अपलोड करेंगे।

इससे ईआरओ द्वारा उपलब्ध तथ्यों एवं दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार निर्णय लिया जा सकेगा। नोटिस प्राप्त किसी मतदाता को सुनवाई हेतु, सुनवाई स्थल पर जाने की आवश्यकता नहीं है, फिर भी ऐसे मतदाता स्वयं ईआरओ कार्यालय अथवा नोटिस में निर्धारित सुनवाई स्थल पर उपस्थित होना चाहते हैं, तो वहां भी संबंधित पदाधिकारी उपलब्ध रहेंगे।

के. रवि कुमार ने कहा कि कई मतदाताओं द्वारा नोटिस के बाद आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जा चुके हैं। वहीं कुछ ऐसे मतदाता भी हैं, जिनका नाम वर्ष 2024 की मतदाता सूची में दर्ज था और जिन्होंने इन्यूमरेशन फार्म भी भरा है, लेकिन किसी कारणवश सुनवाई की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके हैं। ऐसे मतदाताओं को चिह्नित कर विशेष आउटरीच कार्यक्रम एवं कैंप में समाधान निकाला जाएगा।

नोटिस प्राप्त किसी मतदाता को सुनवाई हेतु सुनवाई स्थल पर जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। फिर भी ऐसे मतदाता सुनवाई स्थल पर आते हैं, तो वहां संबंधित पदाधिकारी उपलब्ध होंगे। उन्होंने पीवीटीजी, दिव्यांगजन, जनजातीय समूह, वृद्ध मतदाता, श्रमिक, गरीब, बेघर तथा वैसे मतदाताओं, जिनके माता-पिता से संबंधित विवरण उपलब्ध नहीं हैं, पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है।