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रांची विश्वविद्यालय के नए पीजी कोर्सों में छात्रों की बेरुखी, डेटा साइंस और सांख्यिकी में शून्य आवेदन

Published: Tue, 13 Oct 2026 09:20 AM (GMT+05:30)

रांची विश्वविद्यालय के नए पीजी कोर्स एमएससी सांख्यिकी और डेटा साइंस में 20-25 दिन बाद भी एक भी आवेदन नहीं ...और पढ़ें

एमए इन एजुकेशन में आए हैं 16 आवेदनएमएससी सांख्यिकी व डेटा साइंस में एक भी आवेदन नहीं।

एमए इन एजुकेशन में आए हैं 16 आवेदनएमएससी सांख्यिकी व डेटा साइंस में एक भी आवेदन नहीं।

HighLights

  1. रांची विश्वविद्यालय के नए पीजी कोर्सों में छात्रों की कम रुचि।

  2. एमएससी डेटा साइंस और सांख्यिकी में अभी तक शून्य आवेदन।

  3. एमए एजुकेशन कोर्स को मिले 16 आवेदन, प्रक्रिया जारी।

जागरण संवाददाता, रांची। रांची विश्वविद्यालय में तीन नए कोर्स शुरू किए जाते हैं और नामांकन प्रक्रिया शुरू की जाती है। लेकिन 20 दिन बाद एक कोर्स एमए इन एजुकेशन में तो 10 से अधिक आवेदन आए हैं, लेकिन एमएससी डेटा साइंस और सांख्यिकी में अभी तक एक भी आवेदन किसी विद्यार्थी ने नहीं किया है।

इन तीनों कोर्स को एकेडमिक काउंसिल से पास कराया गया था और इसका सिलेबस भी पूरी तरह से तैयार है। वहीं पीजी स्तर पर शुरू हुए ये तीनों कोर्स में जाब की अपार संभावनाएं हैं इसके बावजूद रांची विवि को इनमें पढ़ाने के लिए विद्यार्थी ही नहीं मिल रहे हैं।

पीजी के नए दो कोर्स को है विद्यार्थियों का इंतजार

रांची विश्वविद्यालय के पीजी के दो नए कोर्स एमएससी इन डेटा साइंस और सांख्यिकी को विद्यार्थियों का इंतजार है। ये दोनों कोर्स गणित विभाग के अंतर्गत संचालित होने हैं। आवेदन की प्रक्रिया पिछले महीने से शुरू हो चुकी है और अब तक 20 से 25 दिन गुजर चुके हैं।

लेकिन आवेदन की संख्या जीरो है। गणित विभाग के विभागाध्यक्ष डा. अबरार अहमद का कहना है कि इन दोनों कोर्स में सत्र 2026-28 के अनुसार नामांकन लिया जा रहा है। चांलसर पोर्टल के माध्यम से नामांकन लिया जा रहा है।

कितने आवेदन अभी तक आए हैं इसकी जानकारी मुझे नहीं है। वहीं एजुकेशन विभाग के अंतर्गत संचालित होने वाला कोर्स एमए इन एजुकेशन में अब तक 16 आवेदन आए हैं।

पीजी स्तर पर शुरू हुए हैं दोनों कोर्स

रांची विश्वविद्यालय में पीजी स्तर पर दो कोर्स की शुरुआत की गयी है। इसमें पहला एमएससी इन सांख्यिकी और एमएससी इन डेटा साइंस शामिल है। प्रत्येक कार्यक्रम में 30 सीटें निर्धारित की गई हैं।

इन पाठ्यक्रमों को वर्तमान समय की शैक्षणिक एवं औद्योगिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को डेटा विश्लेषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, सांख्यिकीय माडलिंग, अनुसंधान तथा विभिन्न सरकारी एवं निजी क्षेत्रों में रोजगार एवं उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर प्राप्त हो सकें।

दोनों कोर्स करने से ये होंगे फायदे

एमएससी सांख्यिकी कोर्स को करने पर सरकारी विभाग में नौकरी के अपार मौके हैं। जनसंख्या विभाग, जनगणना और संख्यिकी से जुड़े कार्य करने हो तो सरकारी विभाग में नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। जनसंख्या, इलेक्शन कमीशन या किसी भी अन्य सरकारी आंकड़ों से संबंधित कार्य में स्टेटिस्टिक्स की महत्वपूर्ण भूमिका है।

सरकारी नौकरी में पैसा और पद दोनों में ही सुनहरा अवसर प्राप्त होता है। शुरुआती वेतन आमतौर पर 4 लाख से 8 लाख रुपये प्रति वर्ष होता है, जो अनुभव के साथ बढ़कर 15 लाख रुपये या उससे अधिक हो सकता है।

वहीं डेटा साइंस का कोर्स करने के बाद हेल्थकेयर, फाइनेंस, ई-कॉमर्स और आईटी सेक्टर में डेटा साइंटिस्ट, डेटा एनालिस्ट, मशीन लर्निंग इंजीनियर और बिजनेस इंटेलिजेंस एनालिस्ट जैसे पदों पर बेहतरीन रोजगार के अवसर मिलते हैं।

भारत में एक डेटा साइंटिस्ट की औसत मासिक सैलरी लगभग 70,000 रुपये से 1,25,000 रुपये (वार्षिक 8 लाख से 14 लाख रुपये) के बीच होती है। शुरुआती स्तर (फ्रेशर) पर यह कमाई कम होती है, जबकि अनुभव बढ़ने के साथ यह लाखों रुपये प्रति माह तक पहुंच जाती है।

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