रांची विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी से नई शिक्षा नीति प्रभावित, इंटर्नशिप और प्रशिक्षण कार्यक्रम बाधित
रांची विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी के कारण नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत इंटर्नशिप और प्रशिक्षण कार्यक्रम बाधित ...और पढ़ें

विवि में है शिक्षकों की भारी कमी एनइपी के संचालन में हो रही है परेशानी।
HighLights
शिक्षकों की कमी से रांची विश्वविद्यालय में एनईपी संचालन बाधित।
स्नातक पांचवें सेमेस्टर के इंटर्नशिप, ट्रेनिंग कार्यक्रम प्रभावित।
लगभग 30,000 छात्रों को एनईपी का पूरा लाभ नहीं।
जागरण संवाददाता, रांची। रांची विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी है और इसी के बीच न्यू एजुकेशन पालिसी का संचालन किया जा रहा है। जिसकी वजह से कोर्स का तो संचालन हो रहा है लेकिन इसके अंतर्गत आने वाले इंटर्नशिप और ट्रेनिंग प्रोग्राम धरातल पर नहीं आ पा रहे हैं। केवल असाइनमेंट से काम चलाया जा रहा है। स्नातक के पांचवें सेमेस्टर में इंटर्नशिप और ट्रेनिंग प्रोग्राम करवाना है, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है।
विवि में 1353 शिक्षकों की जरूरत, 40 प्रतिशत से चल रहा है काम
रांची विश्वविद्यालय में एनईपी के तहत स्नातक की पढ़ाई 2022 से शुरू की गयी। इसके सिलेबस में पूरी तरह बदलाव किया गया था। लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण सिलेबस के सभी पार्ट को पूरा करने में परेशानी आ रही है।
विवि में प्रोफेसर के 42, एसोसिएट प्रोफेसर के 153 और असिस्टेंट प्रोफेसर के 1158 पद स्वीकृत हैं। लेकिन वर्तमान में विवि के कालेजों और पीजी विभागों में लगभग 450 शिक्षक ही कार्यरत है। इस वजह से स्नातक के लगभग 30 हजार विद्यार्थियों को एनइपी के सिलेबस का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
स्नातक के सेमेस्टर फाइव में है इंटर्नशिप का प्रावधान
सेमेस्टर-5 में इंटर्नशिप का प्रावधान किया गया है। यह चार क्रेडिट यानी 100 अंक का है। रांची विश्वविद्यालय से जुड़े कालेजों में कला, विज्ञान, वाणिज्य, मानविकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लगभग 30 विषय संचालित हैं। हर विषय के लिए अलग-अलग संस्थानों की आवश्यकता होती है। यही सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती बन रही है।
स्नातक स्तर के 30 विषयों में के सभी छात्रों के इंटर्नशिप के लिए संस्थान उपलब्ध कराना कठिन है। इसलिए छात्रों से असाइनमेंट, प्रोजेक्ट या फील्ड रिपोर्ट लेकर शैक्षणिक आवश्यकता पूरी की जा रही है। भूगोल, एंथ्रोपोलाजी जैसे विषयों के छात्रों को इंटर्नशिप कराने के लिए पहल की गई है। शिक्षकों के 40 प्रतिशत से अधिक पद खाली रहना भी बड़ी बाधा है।
छात्रों को इंटर्नशिप करवाना भी है जरूरी
एनइपी सिलेबस से स्पष्ट है कि केवल परीक्षा पास करना पर्याप्त नहीं होगा। छात्र को यह भी साबित करना होगा कि वह सीखी हुई पढ़ाई को वास्तविक परिस्थितियों में लागू कर सकता है। इसी कारण इंटर्नशिप को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया। लेकिन कालेजों के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि एक साथ हजारों छात्रों को इंटर्नशिप करानी हो तो उन्हें भेजा कहां जाए।
