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न रिसेप्शन, न रजिस्टर में नाम: रांची के पॉश इलाकों में फल-फूल रहा शॉर्ट स्टे का कारोबार

Published: Sun, 11 Oct 2026 11:18 PM (IST)

पुलिस की सख्ती के बाद रांची में होटलों की जगह शॉर्ट स्टे अपार्टमेंट का चलन बढ़ रहा है, जहां बिना ...और पढ़ें

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. पुलिस की सख्ती से शॉर्ट स्टे अपार्टमेंट का चलन बढ़ा।

  2. बिना पहचान सत्यापन के फ्लैट बुक हो रहे, सुरक्षा चिंताएं।

  3. आवासीय सोसायटियों में शोर-शराबा, निवासियों को परेशानी।

जागरण संवाददाता, रांची। होटलों में पुलिस की छापेमारी और पहचान सत्यापन की सख्ती के बीच राजधानी में ठहरने का एक नया विकल्प शॉर्ट स्टे बनता जा रहा है।

कुछ घंटे या एक रात के लिए आवासीय अपार्टमेंट का फ्लैट बुक कीजिए, चाबी लीजिए और भीतर चले जाइए। न होटल का रिसेप्शन, न सोसायटी के रजिस्टर में नाम-पता दर्ज कराने की अनिवार्यता।

कम से कम कुछ परिसरों में व्यवस्था ऐसी ही होने की शिकायत है। मोटी कमाई के लिए फ्लैट मालिक और संचालक आवासीय परिसरों को कम अवधि के किराये के कारोबार में बदल रहे हैं।

इसका सबसे बड़ा खामियाजा उन परिवारों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्होंने सुरक्षित माहौल के लिए लाखों रुपये खर्च कर फ्लैट खरीदा है।

एक फ्लैट से हजारों की कमाई, सत्यापन की व्यवस्था कहां?

रांची में शॉर्ट स्टे का बाजार कितना आकर्षक हो चुका है, इसका अंदाजा किराये की दरों से लगाया जा सकता है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, कुछ फ्लैटों के लिए कुछ घंटों या एक दिन के ठहराव पर छह से आठ हजार रुपये तक मांगे जा रहे हैं।

ऑनलाइन मंचों पर भी रांची में निजी फ्लैट और सर्विस्ड अपार्टमेंट कम अवधि के ठहराव के लिए उपलब्ध हैं। मुनाफे का गणित समझना मुश्किल नहीं है।

जिस फ्लैट को सामान्य किराये पर देने से महीने भर की निश्चित आय होती है, उसे कम अवधि के लिए बार-बार बुक कराकर अधिक कमाई की संभावना बनती है। लेकिन इस कारोबार में अतिथि की पहचान, उसके ठहरने की अवधि और गतिविधियों का रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है, यही सबसे बड़ा सवाल है।

चेशायर रोड से चिरौंदी तक उठे सवाल

राजधानी में शॉर्ट स्टे फ्लैटों को लेकर विवाद की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। चेशायर रोड स्थित एक सोसायटी में एक वन बीएचके फ्लैट को करीब छह हजार रुपये में बुक किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

एक युवती के अपने दोस्त के साथ फ्लैट में होने की जानकारी मिलने पर उसके पिता के पहुंचने से वहां हंगामा हुआ। घटना के बाद सोसायटी के निवासियों ने कम अवधि के लिए फ्लैट देने की व्यवस्था पर सवाल उठाए।

इसी तरह चिरौंदी-मोरहाबादी स्थित एसोटेक हिल्स में भी शॉर्ट स्टे फ्लैट को लेकर विवाद की शिकायत सामने आई थी। निवासियों के अनुसार, रात करीब दो बजे तक फ्लैट में तेज आवाज में पार्टी चल रही थी।

विरोध करने पर अभद्र व्यवहार और धमकी देने के आरोप भी लगाए गए। ये घटनाएं बताती हैं कि समस्या केवल अनजान लोगों की आवाजाही तक सीमित नहीं, बल्कि शोर-शराबे और सोसायटी के साझा माहौल से भी जुड़ी है।

गार्ड के पास चाबी, रजिस्टर में नहीं नाम

सबसे गंभीर स्थिति उन परिसरों में बनती है, जहां फ्लैट संचालक या मालिक सुरक्षा गार्ड के पास चाबी रख देते हैं। बुकिंग कराने वाला व्यक्ति गार्ड से चाबी लेकर फ्लैट में चला जाता है।

यदि उसका नाम, मोबाइल नंबर, पहचान पत्र और आने-जाने का समय दर्ज नहीं होता, तो घटना के बाद उसकी पहचान करना मुश्किल हो सकता है। सोसायटी के स्थायी निवासियों को भी यह पता नहीं चलता कि उनके आसपास कौन ठहरा है।

ऐसी व्यवस्था में पुलिस के लिए भी तत्काल यह पता लगाना कठिन हो सकता है कि संबंधित फ्लैट में कौन रह रहा था। हालांकि, शॉर्ट स्टे पर आए प्रत्येक व्यक्ति को संदिग्ध मानना उचित नहीं है। असली समस्या बिना सत्यापन और जवाबदेही के ठहरने की व्यवस्था है।

क्या कहता है नियम

झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 317 में होटल या लाजिंग हाउस के रूप में परिसर के इस्तेमाल के लिए लाइसेंस का प्रावधान है। किसी आवासीय फ्लैट को लगातार इस तरह चलाया जा रहा है या नहीं, इसकी जांच नियमानुसार की जा सकती है।

शॉर्ट स्टे का कारोबार करने वालों के लिए अतिथि की पहचान और ठहराव का रिकार्ड रखना, सोसायटी को जानकारी देना तथा लागू लाइसेंस और उपयोग संबंधी नियमों का पालन करना जरूरी है।

सवाल किसी की निजी जिंदगी पर निगरानी का नहीं, बल्कि साझा आवासीय परिसर की सुरक्षा और जवाबदेही का है। आखिर जिस सोसायटी में परिवार स्थायी रूप से रहते हैं, वहां कुछ घंटों के मुनाफे के लिए उनकी सुरक्षा और निजता से समझौता क्यों हो।

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