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रांची में घर का होटल जैसा इस्तेमाल पड़ सकता है भारी, शॉर्ट स्टे को लेकर नगर निगम के क्या हैं नियम?

Published: Sun, 27 Sep 2026 01:37 PM (IST)

रांची में आवासीय अपार्टमेंट को शॉर्ट स्टे के लिए देने का चलन बढ़ रहा है, जिस पर नगर निगम की कार्रवाई का सवाल उठ रहा है।

एआई जनरेटेड फोटो

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HighLights

  1. आवासीय अपार्टमेंट को शॉर्ट स्टे पर देना नियमों का उल्लंघन।

  2. लगातार लॉजिंग कारोबार की तरह उपयोग पर निगम करेगा जांच।

  3. नियम तोड़ने पर रांची नगर निगम कर सकता है दंडात्मक कार्रवाई।

जागरण संवाददाता, रांची। रांची में अपार्टमेंट को शार्ट स्टे के लिए देने का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। ऑनलाइन साइटों पर एक रात से लेकर कुछ दिनों के लिए पूरे अपार्टमेंट की बुकिंग हो रही है।

अब सवाल यह है कि जिस अपार्टमेंट को आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृति मिली है, उसे लगातार शार्ट स्टे के लिए चलाने पर रांची नगर निगम क्या कार्रवाई कर सकता है?

इस मामले के जानकार वरीय अधिवक्ता विक्रमादित्य रॉय के अनुसार झारखंड में शार्ट स्टे या एयरबीएनबी के लिए अलग से कोई कानून नहीं है।

इसलिए हर ऑनलाइन बुकिंग को अपने आप अवैध नहीं कहा जा सकता, लेकिन यदि आवासीय अपार्टमेंट का इस्तेमाल लगातार अलग-अलग लोगों को रात के हिसाब से ठहराने, ऑनलाइन बुकिंग लेने, नियमित सफाई कराने और भुगतान लेकर लाजिंग कारोबार की तरह किया जा रहा है तो उसके वास्तविक उपयोग और स्वीकृत उपयोग की जांच जरूरी होगी।

झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011, झारखंड भवन उपविधि, 2016, व्यापार लाइसेंस नियम तथा लाज, हास्टल, बैंक्वेट हाल और धर्मशाला से जुड़े नियम अलग-अलग उपलब्ध हैं। निगम का बाजार विभाग व्यावसायिक गतिविधियों के नियमन के साथ लाज, हास्टल और अन्य ऐसी इकाइयों के पंजीकरण का काम भी करता है।

स्वीकृत उपयोग से अलग मिला तो पहले होगी जांच

अधिवक्ता विक्रमादित्य रॉय बताते हैं कि सामान्य किराये पर किसी परिवार को अपार्टमेंट देना और उसे लगातार रोज नए मेहमानों के लिए उपलब्ध कराना एक जैसी स्थिति नहीं है।

यदि कोई अपार्टमेंट आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत है, लेकिन उसका इस्तेमाल नियमित रूप से रात के हिसाब से बुकिंग लेकर ठहरने की सुविधा देने में हो रहा है, तो नगर निगम यह देख सकता है कि यह इस्तेमाल स्वीकृत भवन योजना और लागू नियमों के अनुरूप है या नहीं।

झारखंड भवन उपविधि में भवनों के उपयोग और अलग-अलग उपयोग श्रेणियों का प्रावधान है। उपविधि में ‘बोर्डिंग या लाजिंग हाउस’ को भी अलग उपयोग श्रेणी के रूप में शामिल किया गया है।

नियम टूटे तो निगम क्या कर सकता है?

विक्रमादित्य रॉय के अनुसार यदि जांच में आवासीय अपार्टमेंट का इस्तेमाल स्वीकृत उपयोग से अलग पाया जाता है तो मामला केवल ऑनलाइन बुकिंग तक सीमित नहीं रहेगा।

नगर निगम संबंधित मालिक या संचालक को नोटिस देकर स्थिति स्पष्ट करने को कह सकता है और लागू नियमों के अनुसार अनधिकृत उपयोग को रोकने की कार्रवाई कर सकता है।

नगरपालिका कानून में भवन के स्वीकृत उपयोग में बिना अनुमति बदलाव को रोकने की व्यवस्था है। उपलब्ध नगरपालिका प्रावधानों में नगर आयुक्त को अनधिकृत उपयोग रोकने का आदेश देने और नियमों के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई का अधिकार भी दिया गया है।

इसलिए कार्रवाई का आधार यह होगा कि अपार्टमेंट का वास्तविक इस्तेमाल क्या है, उसे किस उपयोग के लिए स्वीकृति मिली है और उस गतिविधि के लिए आवश्यक अनुमति या पंजीकरण है या नहीं।

सिर्फ ऑनलाइन बुकिंग से नहीं मिलती नगर निगम की अनुमति

किसी अपार्टमेंट का ऑनलाइन साइट पर सूचीबद्ध होना नगर निगम की अनुमति नहीं माना जा सकता। ऑनलाइन बुकिंग एक व्यावसायिक सुविधा है, जबकि भवन का उपयोग और स्थानीय निकाय की अनुमति अलग विषय है।

रांची नगर निगम खुद अपनी वेबसाइट पर व्यापार लाइसेंस की व्यवस्था के साथ लाज, हास्टल, बैंक्वेट हाल और धर्मशाला के पंजीकरण की व्यवस्था बताता है।

ऐसे में शार्ट स्टे संचालक के लिए यह देखना जरूरी है कि वह जिस तरह अपार्टमेंट का इस्तेमाल कर रहा है, उसके लिए कौन-कौन से नियम लागू होते हैं।

सोसाइटी के नियम भी होंगे लागू

अधिवक्ता राय के अनुसार मामला केवल नगर निगम के नियमों तक सीमित नहीं है। संबंधित अपार्टमेंट सोसायटी या एसोसिएशन के उपविधि भी महत्वपूर्ण होंगे।

यदि सोसायटी के नियमों में अपार्टमेंट के इस्तेमाल को लेकर कोई प्रतिबंध है तो मालिक को सोसायटी स्तर पर भी आपत्ति का सामना करना पड़ सकता है। सुरक्षा, पार्किंग, साझा परिसर और रोज नए लोगों के आने-जाने जैसे मुद्दे भी इसी से जुड़े हैं।

विक्रमादित्य के अनुसार किसी व्यक्ति द्वारा कभी-कभार अपना अपार्टमेंट किसी मेहमान को ठहरने के लिए देना और किसी फ्लैट को लगातार रात के हिसाब से ऑनलाइन बुक कराकर लाजिंग कारोबार की तरह चलाना अलग परिस्थितियां हैं।

इसलिए केवल यह देखकर कि अपार्टमेंट ऑनलाइन बुक हो रहा है, उसे अवैध घोषित नहीं किया जा सकता। जांच में वास्तविक उपयोग, स्वीकृत भवन योजना, लागू नगर निगम नियम और आवश्यक लाइसेंस या पंजीकरण की स्थिति देखना जरूरी होगा।

अब निगम के सामने बड़ा सवाल

रांची में शार्ट स्टे का कारोबार बढ़ने के साथ अब नगर निगम के सामने यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि आवासीय अपार्टमेंट में कितनी अवधि तक और किस तरीके से शार्ट स्टे की अनुमति है, किस स्थिति में इसे लाजिंग कारोबार माना जाएगा और नियम टूटने पर कौन-सी कार्रवाई होगी। यही स्पष्टता अपार्टमेंट मालिकों, सोसायटियों और वहां रहने वाले परिवारों—तीनों के लिए जरूरी है।

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