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अब ट्रेनों के पहिए नहीं रुकेंगे! ट्रैक पर शव मिलने पर पुलिस का इंतज़ार किए बिना RPF की मौजूदगी में हटा सकेंगे रेलकर्मी

Published: Fri, 21 Aug 2026 04:55 PM (IST)Updated: Sun, 23 Aug 2026 11:00 AM (IST)

रांची रेल मंडल में अब ट्रैक पर शव मिलने से ट्रेनों का परिचालन बाधित नहीं होगा। जीआरपी की देरी पर ...और पढ़ें

जीआरपी के पहुंचने में देर होने पर आरपीएफ की मौजूदगी में रेलकर्मी शव को ट्रैक से किनारे कर सकेंगे। (तस्वीर: सांकेतिक)

जीआरपी के पहुंचने में देर होने पर आरपीएफ की मौजूदगी में रेलकर्मी शव को ट्रैक से किनारे कर सकेंगे। (तस्वीर: सांकेतिक)

HighLights

  1. शव के कारण ट्रेनों की देरी अब नहीं होगी।

  2. जीआरपी की अनुपस्थिति में आरपीएफ शव हटाएगी।

  3. पुलिस जांच के लिए साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएंगे।

जागरण संवाददाता, रांची। रेलवे ट्रैक पर किसी व्यक्ति के रनओवर होने के बाद शव हटाने में होने वाली देरी अब यात्रियों के सफर पर भारी नहीं पड़ेगी। रांची रेल मंडल में कई मामलों में शव तीन से चार घंटे या उससे अधिक समय तक ट्रैक पर पड़े रहने से यात्री और मालगाड़ियों का परिचालन प्रभावित हो रहा था।

ट्रेनें जहां-तहां रोकनी पड़ रही थीं और यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता था। इस समस्या को देखते हुए रेलवे ने ट्रैक पर या उसके आसपास शव मिलने की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए संयुक्त प्रक्रिया आदेश जारी किया है।

इसके तहत जीआरपी या स्थानीय पुलिस के मौके पर पहुंचने में देरी होने पर आरपीएफ की मौजूदगी में रेलकर्मी शव को ट्रैक से सुरक्षित किनारे कर सकेंगे, ताकि रेल परिचालन जल्द बहाल किया जा सके।

सूचना मिलते ही शुरू होगी कार्रवाई

घटना स्टेशन सीमा में होने पर लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, ट्रेन गार्ड, गैंगमैन या किसी अन्य रेलकर्मी को तत्काल स्टेशन मास्टर को सूचना देनी होगी।

स्टेशन मास्टर आपरेटिंग कंट्रोल, आरपीएफ और संबंधित जीआरपी या स्थानीय पुलिस को जानकारी देगा। इसके बाद आरपीएफ पोस्ट का प्रभारी अधिकारी और कर्मचारी बिना विलंब मौके पर पहुंचेंगे और जीआरपी/पुलिस के साथ समन्वय करेंगे।

पुलिस के आने में देर तो ट्रैक होगा खाली

मौके पर पहुंचने के बाद जीआरपी/पुलिस के आने के लिए कुछ समय प्रतीक्षा की जाएगी। लेकिन यदि उनके पहुंचने में विलंब होता है और शव के कारण ट्रेनों का परिचालन बाधित है, तो सहायक लोको पायलट, ट्रेन गार्ड, गैंगमैन या मौके पर मौजूद अन्य रेलकर्मी आरपीएफ की मौजूदगी में शव को ट्रैक के किनारे कर सकेंगे। शव को केवल उतना ही हटाया जाएगा, जितना ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए आवश्यक हो।

ब्लॉक सेक्शन में भी यही व्यवस्था

ब्लॉक सेक्शन में लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, ट्रेन गार्ड या गैंगमैन को ट्रैक पर शव दिखने पर तत्काल संबंधित स्टेशन मास्टर को सूचना देनी होगी। स्टेशन मास्टर आपरेटिंग कंट्रोल, आरपीएफ और संबंधित जीआरपी/स्थानीय पुलिस को जानकारी देगा।

आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालेगी। पुलिस के पहुंचने में देरी होने पर मौके पर मौजूद रेलकर्मी आरपीएफ की मौजूदगी में शव को ट्रैक से किनारे करेंगे।

साक्ष्य सुरक्षित रखने पर भी जोर

रेलवे ने स्पष्ट किया है कि ट्रैक खाली करने के दौरान पुलिस जांच के साक्ष्यों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। आरपीएफ घटनास्थल की अलग-अलग कोणों से तस्वीरें लेगी और छोटा वीडियो बनाएगी। शव और उसके आसपास की स्थिति भी रिकार्ड की जाएगी।

शव को कम से कम हिलाने-डुलाने का निर्देश दिया गया है। उसे एक से अधिक लोगों द्वारा उठाने से बचने को कहा गया है, ताकि फिंगरप्रिंट और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रभावित न हों।

पुलिस के आने तक शव की निगरानी

शव हटाने की प्रक्रिया की तस्वीर और वीडियो संबंधित जीआरपी/स्थानीय पुलिस के साथ साझा कर सुरक्षित रखी जाएगी। ट्रैक खाली होने के बाद भी आरपीएफ मौके पर मौजूद रहेगी और पुलिस के पहुंचने तक शव की निगरानी करेगी। जीआरपी/पुलिस के पहुंचने के बाद जांच रिपोर्ट और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर शव को अपने कब्जे में लिया जाएगा।

घायल को पहले अस्पताल पहुंचाया जाएगा

यदि घटना में व्यक्ति घायल अवस्था में मिलता है तो उसकी जान बचाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। संबंधित स्टेशन मास्टर तत्काल एंबुलेंस की व्यवस्था कर घायल को निकटतम अस्पताल पहुंचाने की कार्रवाई करेंगे।

स्थानीय लोगों की भी ली जा सकेगी मदद

यदि ब्लॉक सेक्शन में मौके पर कोई रेलकर्मी उपलब्ध नहीं है तो स्टेशन के सफाईकर्मी या पहले से चिन्हित स्थानीय व्यक्ति की मदद ली जा सकेगी। त्वरित कार्रवाई के लिए स्टेशन मास्टर और आरपीएफ पोस्ट प्रभारी को आसपास के गांवों और संबंधित क्षेत्रों में ऐसे लोगों की पहचान रखने का निर्देश दिया गया है, जिन्हें जरूरत पड़ने पर शव हटाने के लिए बुलाया जा सके।

रेलकर्मियों पर नहीं बनाया जाएगा दबाव

आदेश में कहा गया है कि शव हटाने की प्रक्रिया में रेलकर्मी, सफाईकर्मी या स्थानीय व्यक्ति पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला जाएगा। संयुक्त प्रक्रिया आदेश के तहत कार्रवाई करने वाले रेलकर्मियों को पुलिस या जीआरपी द्वारा अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किए जाने की बात भी कही गई है।

दुर्घटना मैनुअल के प्रावधान का हवाला

रेलवे ने इस प्रक्रिया को दक्षिण पूर्व रेलवे दुर्घटना मैनुअल के पैरा 10.21(बी) के प्रावधानों के अनुरूप बताया है। आदेश में उड़ीसा हाई कोर्ट के भगवान कृष्ण और सुबाराम नाग बनाम स्टेट मामले का भी उल्लेख किया गया है। इसमें शव को घटनास्थल से दूसरी जगह ले जाने मात्र को हत्या के साक्ष्य मिटाने के रूप में नहीं माना गया है।

यात्रियों को मिलेगा सीधा लाभ

इस व्यवस्था का सीधा लाभ यात्रियों को मिलेगा। रनओवर की घटना के बाद शव हटाने में होने वाली लंबी देरी कम होने से ट्रेनों को लंबे समय तक रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रभावित रेल परिचालन को जल्द सामान्य किया जा सकेगा और यात्रियों को अनावश्यक इंतजार व ट्रेन विलंब से राहत मिलने की उम्मीद है। 

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