दिनभर निजी अस्पताल में इलाज, रात होते ही रिम्स और सदर अस्पताल रेफर! बढ़ रहा मौत का आंकड़ा
रांची के निजी अस्पताल रात में गंभीर मरीजों को रिम्स और सदर अस्पताल रेफर कर रहे हैं, जिससे सरकारी अस्पतालों ...और पढ़ें

रांची रिम्स की फोटो।
HighLights
निजी अस्पताल रात में गंभीर मरीजों को सरकारी अस्पताल भेज रहे।
अधूरी जानकारी से सरकारी अस्पतालों में इलाज में बाधा।
जागरण संवाददाता, रांची। राजधानी के निजी अस्पतालों में इलाजरत अति गंभीर मरीजों को रात के समय रिम्स और सदर अस्पताल रेफर करने का मामला सामने आया है। स्थिति यह है कि निजी अस्पतालों से रेफर किए जाने वाले करीब 70 प्रतिशत मरीज रात 8 बजे से सुबह 3 बजे के बीच सरकारी अस्पतालों में पहुंचते हैं।
इनमें कई ऐसे मरीज होते हैं, जिनकी स्थिति पहले से ही बेहद नाजुक होती है। मरीजों को रेफर करने के बाद निजी अस्पतालों की एंबुलेंस उन्हें रिम्स या सदर अस्पताल में छोड़कर लौट जाती हैं। कई बार मरीज के इलाज, दी गई दवाओं और अब तक की जांच से संबंधित पूरी जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई जाती। इससे सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों के सामने इलाज शुरू करने में मुश्किलें आती हैं।
निजी अस्पतालों की इस कार्यप्रणाली से रिम्स पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। गंभीर मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने से उपलब्ध संसाधनों, विशेषकर वेंटिलेटर और आइसीयू बेड पर दबाव पड़ता है।
नतीजतन, दूसरे अस्पतालों से सीधे पहुंचने वाले ऐसे मरीज, जिन्हें समय पर वेंटिलेटर और गहन चिकित्सा की जरूरत होती है, उन्हें भी इंतजार करना पड़ सकता है। चिकित्सकों का मानना है कि कई मरीजों की हालत इतनी बिगड़ चुकी होती है कि उन्हें बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे मामलों में मौत का आंकड़ा भी बढ़ता है।
बिना इलाज के ब्योरे के भेजे जा रहे मरीज
रिम्स ट्रामा सेंटर के डीएमएस डॉ. साकेत वर्मा के अनुसार, निजी अस्पतालों से रेफर होकर आने वाले मरीजों के साथ उनके इलाज का पूरा ब्योरा नहीं मिलता। यह जानकारी भी कई बार उपलब्ध नहीं होती कि मरीज को अब तक कौन-सी दवाएं दी गई हैं, कौन-सी जांच हुई है और उसकी स्थिति में कितना बदलाव आया है।
ऐसे में रिम्स पहुंचने पर चिकित्सकों को नए सिरे से मरीज की स्थिति समझनी पड़ती है। इससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित होती है और पहले से संसाधनों की कमी झेल रहे अस्पताल पर अतिरिक्त भार पड़ता है।
पहले भी दिए जा चुके हैं दिशा-निर्देश
निजी अस्पतालों को मरीज रेफर करने की प्रक्रिया और जरूरी सावधानियों के संबंध में पहले भी बैठक कर दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद रात के समय गंभीर मरीजों को सरकारी अस्पतालों में भेजने और अधूरी जानकारी के साथ रेफर करने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में निजी अस्पतालों की जवाबदेही तय करने और रेफरल व्यवस्था की निगरानी की जरूरत महसूस की जा रही है।
रेफरल व्यवस्था में सुधार क्यों जरूरी
- रेफरल से पहले स्थिरीकरण जरूरी: मरीज को रेफर करने से पहले उसकी स्थिति को यथासंभव स्थिर करना और जरूरी प्राथमिक उपचार देना चाहिए।
- इलाज का पूरा ब्योरा अनिवार्य: मरीज के साथ जांच रिपोर्ट, दी गई दवाओं, उपचार की जानकारी और रेफर करने का स्पष्ट कारण भेजा जाना चाहिए।
- वेंटिलेटर की उपलब्धता की जानकारी: गंभीर मरीज को भेजने से पहले संबंधित अस्पताल में बेड और वेंटिलेटर की उपलब्धता की जानकारी लेना जरूरी है।
- एम्बुलेंस में प्रशिक्षित कर्मी: अति गंभीर मरीज को बिना चिकित्सकीय निगरानी या जरूरी जीवनरक्षक सुविधाओं के रेफर करना जोखिम भरा हो सकता है।
- रेफरल का समय और कारण दर्ज हो: निजी अस्पतालों से आने वाले मरीजों का समय, बीमारी की गंभीरता और रेफर करने का कारण दर्ज किया जाए।
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