पासपोर्ट रखकर मेड का काम कराने का आरोप! नर्स बनने दुबई गई रांची की बेटी फंसी; सरकार से सकुशल वापसी की गुहार
रांची की मोनिका कच्छप नर्स की नौकरी के लिए दुबई गई थीं, लेकिन आरोप है कि वहां उनका पासपोर्ट छीनकर ...और पढ़ें

नर्स की नौकरी के लिए दुबई गई मोनिका कच्छप फंसी। (एआई जेनरेटेड इमेज)
HighLights
नर्स की नौकरी के लिए दुबई गई मोनिका कच्छप फंसीं।
पासपोर्ट छीनकर घरेलू काम कराने का आरोप, परिवार चिंतित।
डिजिटल डेस्क, रांची। नर्स की नौकरी कर परिवार का सहारा बनने का सपना लेकर रांची की मोनिका कच्छप दुबई गई थीं। परिवार को उम्मीद थी कि नौकरी मिलने के बाद घर की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। लेकिन अब परिवार अपनी बेटी की सुरक्षित वापसी के लिए सरकारी मदद की गुहार लगा रहा है। आरोप है कि दुबई पहुंचने के बाद मोनिका का पासपोर्ट अपने पास रख लिया गया और उन्हें अलग-अलग घरों में काम करने के लिए भेजा गया।
मोनिका के पिता रत्ना कच्छप ने 29 सितंबर को एयरपोर्ट थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। शिकायत में प्रियंका, रितेश, मोहम्मद मेराज अंसारी समेत अन्य लोगों के नाम हैं। परिवार ने नौकरी के नाम पर विदेश भेजने, पासपोर्ट रखने, जबरन काम कराने और भारत लौटने के लिए रकम मांगे जाने का आरोप लगाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और मोनिका की सुरक्षित वापसी के लिए भारतीय दूतावास से संपर्क किए जाने की बात कही गई है।
साढ़े तीन साल की नर्सिंग पढ़ाई, फिर दुबई का रास्ता
मोनिका ने करीब साढ़े तीन साल का नर्सिंग कोर्स किया है। परिवार के अनुसार, नौकरी की तलाश के दौरान उनकी ऑनलाइन बातचीत दुबई की एएमडी ट्रेंड सॉल्यूशन एलएलसी और एजेंट प्रियंका से हुई। उन्हें नर्स की नौकरी के साथ रहने और खाने की सुविधा देने का भरोसा दिया गया था।
परिवार का कहना है कि नौकरी की प्रक्रिया के लिए मोनिका ने 22 अप्रैल को 15 हजार रुपये फोनपे के माध्यम से दिए थे। इसके बाद 5 मई को वह दिल्ली से शारजाह पहुंचीं। परिवार का आरोप है कि अगले ही दिन उनका पासपोर्ट ले लिया गया।
नौकरी के बजाय घरों में काम कराने का आरोप
परिवार के मुताबिक, 7 मई को मोनिका को अजमान स्थित कार्यालय ले जाया गया। वहां उनसे अरबी भाषा में लिखे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए गए। आरोप है कि बाद में उन्हें बताया गया कि उनके ऊपर 12,600 दिरहम का कर्ज है।
परिवार का दावा है कि मोनिका को इस रकम के नाम पर भारत लौटने से रोका गया और पुलिस में शिकायत करने पर जेल भेजने की धमकी दी गई। उनका मोबाइल फोन भी ले लिए जाने और व्हाट्सऐप की पुरानी चैट हटाने का आरोप है। इसके बाद मोनिका को एक घर में घरेलू काम के लिए रखा गया। परिवार के अनुसार, करीब एक महीने बाद उन्हें दूसरे घरों में बुजुर्गों की देखभाल के लिए भेजा जाने लगा। भाषा की परेशानी के बीच वह लगातार घर लौटने की बात कहती रहीं।
मां की बीमारी ने बढ़ाई परिवार की चिंता
परिवार के अनुसार, मोनिका की मां की तबीयत खराब है। मां की बीमारी की जानकारी मिलने के बाद मोनिका ने भारत वापस आने की इच्छा जताई। आरोप है कि इसके बावजूद उनका पासपोर्ट वापस नहीं किया गया और भारत लौटने के लिए रकम मांगी गई।
मोनिका का परिवार रांची में कृषि पर निर्भर है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने बेटी के बेहतर भविष्य की उम्मीद में उसे विदेश भेजा था, लेकिन अब उनकी सबसे बड़ी चिंता उसकी सुरक्षित वापसी है। परिवार ने झारखंड सरकार और विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप कर मोनिका को जल्द भारत लाने की अपील की है। पुलिस प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
