यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 21, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Ranchi News: वर्ल्ड टेलिविजन डे-बुद्धू बाक्स कहा जाने वाला टेलिविजन आज हो गया स्मार्ट
Ranchi Newsआज वर्ल्ड टेलिविजन डे है। टेलिविजन की उपयोगिता भविष्य संघर्ष आदि पर चर्चा करने के लिए प्रतिवर्ष 21 नवंबर ...और पढ़ें

रांची, जासं : आज वर्ल्ड टेलिविजन डे है। टेलिविजन की उपयोगिता, भविष्य, संघर्ष आदि पर चर्चा करने के लिए प्रतिवर्ष 21 नवंबर को वर्ल्ड टेलिविजन डे मनाया जाता है। वर्तमान समय अत्याधुनिक तकनीक का है। हालांकि इतने सारे अत्याधुनिक तकनीकयुक्त गैजेट होने के बावजूद टेलिविजन का अलग ही महत्व है। एक समय इडियट बॉक्स कहलाने वाला टेलिविजन का स्वरूप भी बदलकर स्मार्ट हो गया है। हालांकि वर्तमान समय में जो मुकाम और शोहरत टेलिविजन को प्राप्त हुआ है। वह सफर इतना आसान भी नहीं रहा है। 80 के दशक में जहां बड़ा सा ब्लैक एंड ह्वाइट शटर वाले बक्से को टेलिविजन कहा जाता था, वहीं आज यह क्यू लेड में बदल गया है और विस्तार लागातार जारी है।
कैसे हुआ टेलिविजन का अविष्कार
वर्ष 1927 अमेरिकी वैज्ञानिक जॉन लॉगी बेयर्ड ने में टेलिविजन का आविष्कार किया था। वर्ष 1934 में यह पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप ले चुका था। धीरे-धीरे यह मनोरंजन और सूचना के प्रचार-प्रसार का एक महत्वपूर्ण जरिया बन गया।
टेलिविजन का इतिहास
भारत में टेलिविजन का पदापर्ण 1950 में हुआ। चेन्नई के एक इंजीनियरिंग छात्र ने प्रदर्शनी में पहली बार टेलिविजन सबके सामने रखा। वर्ष 1965 में ऑल इंडिया रेडियो ने प्रतिदिन टीवी ट्रांसमिशन शुरू किया था। लेकिन वर्ष 1976 में सरकार ने टेलिविजन को ऑल इंडिया रेडियो से अलग कर दिया। उसके बाद वर्ष 1982 में पहली बार राष्ट्रीय टेलिविजन चैनल की शुरूआत हुई और इसी वर्ष पहला रंगीन टीवी भी अस्तित्व में आया।
रांची में 20 हजार से 2.50 लाख तक के टेलिविजन की मांग
80 के दशक में ब्लैक एंड ह्वाइट टीवी का बोलबाला था। उसके बाद कलर टीवी, प्रोजेक्टर टीवी व एलसीडी का दौर आया। वर्तमान में एलईडी का जमाना है। लोग प्लाज्मा टीवी को भूल चुके हैं। अब क्यू लेड टीवी का समय चल रहा है। बात अगर राजधानी रांची की करें तो, यहां के बाजारों में 20 हजार से 16 लाख रुपये तक की टीवी उपलबध है। हालांकि लोग 20 हजार से 2.5 लाख रुपये मूल्य के टीवी को खरीदना अधिक पसंद करते हैं। ईजी ईएमआई सुविधा के कारण इस रेंज की टीवी मध्यम आय वर्ग के लोगों के पहुुंच में है।
जमाना क्यू लेड का
विक्रेताओं के मुताबिक अब तक लोग यूएचडी 4के देखते थे। लेकिन अब जमाना क्यू लेड टीवी का है। बाजार में क्यू लेड, नियो क्यू लेड और फ्रेम क्यू लेड का विस्तृत रेंज 43, 55, 65 व 85 इंच में उपलब्ध है। हालांकि लोग 43 और 55 इंच की क्यू लेड टीवी को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। क्यू लेड टीवी में क्वांटम डॉट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है, जो अन्य टीवी की तुलना में सौ प्रतिशत कलर वैल्यू देता है।
स्मार्ट बना गूगल टीवी
स्मार्ट टीवी भी नेक्स्ट जेनरेशन एंड्राइड टीवी या गूगल टीवी में बदल गया है। इन टीवी में स्मार्ट इंटेलिजेंस के साथ अत्याधुनिक फीचर दिए गए हैं। इन स्मार्ट टीवी पर कई एप्लीकेशंस प्री-लोडेड आती हैं या बाद में एप स्टोर से लोड की जा सकती हैं। कुछ स्मार्ट टीवी से तो नेटफ्लिक्स, अमेजन जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर लाइव टीवी व फिल्म स्ट्रीमिंग भी होती हैं।
नेट सर्फिंग भी
कई स्मार्ट टीवी बिल्टइन वेब ब्राउजर फीचर के साथ मौजूद हैं। जिससे इन पर आसानी से इंटरनेट सर्फ किया जा सकता है। मोबाइल से फोटो और वीडियो देख सकते हैं, उन्हें किसी के साथ शेयर भी कर सकते हैं।
प्रतिक्रिया
एक वक्त ब्लैक एंड ह्वाइट टीवी का था। अब अत्याधुनिक तकनीकयुक्त क्यू लेड टीवी का जमाना है। अधिकांश लोग इन्हें ही खरीदना पंसद कर रहे हैं।
आलोक गोयनका, विक्रेता।
एक समय में टेलिविजन के अविष्कार ने दुनिया में क्रांति ला दी थी। आज भी इसका महत्व कम नहीं हुआ है। अत्याधुनिक तकनीक के कारण मौजूदा दौर में यह एक शक्तिशाली जनसंचार के माध्यम के रूप में सामने आया है।
