रांची, जासं। रांची सदर अस्पताल में जेरियाट्रिक वार्ड को खुले एक माह से अधिक हो गए लेकिन अब तक यहां डाक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी है। बड़े ताम-झाम के साथ पिछले माह इसका उद्घाटन किया गया था। लेकिन अब तक किसी मरीज को भर्ती नहीं किया गया है। उद्घाटन के बाद से अब तक वार्ड में ताला लटका हुआ है। वार्ड में कुल 10 बेड की व्यवस्था की गई है। सभी सुविधाएं भी यहां दी गईं हैं। लेकिन डाक्टर नहीं होने से बुजुर्ग मरीज इलाज नहीं करा पा रहे।

सिविल सर्जन डा. विनोद कुमार ने बताया कि डाक्टरों की कमी है। जो भी बुजुर्ग आते हैं उन्हें एचडीयू में भर्ती किया जाता है। अभी वहां कुछ मरीज भर्ती भी हैं। उन्हें डा. एके झा देखते हैं। हालांकि जेरियाट्रिक के लिए कोई चिकित्सक नहीं हैं। बताया कि अगले 10 दिनों में दो डाक्टरों की तैनाती इस वार्ड में की जाएगी। इसके लिए वाकिंग इंटरव्यू होना है। आठ डाक्टरों की नियुक्ति होनी है। इसमें से दो डाक्टर जेरियाट्रिक वार्ड के लिए होंगे। जेरियाट्रिक वार्ड में डाक्टर बहाल होने के बाद बुजुर्ग मरीजों को भर्ती किया जा सकेगा। बता दें कि सिविल सर्जन ने उद्घाटन के समय कहा था कि सप्ताहभर के अंदर जेरियाट्रिक वार्ड में डाक्टर बहाल कर दिए जाएंगे। एक बार फिर से सिविल सर्जन अगले 10 दिनों में डाक्टरों की तैनाती की बात कह रहे।

क्या है जेरियाट्रिक वार्ड में : जेरियाट्रिक वार्ड में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, सांस और दिल संबंधी परेशानियों का बेहतर तरीके से इलाज हो सकेगा। सदर अस्पताल रांची में खुले जेरियाट्रिक वार्ड में सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। कोविड के कारण बुजुर्गों की परेशानी बढ़ी : कोविड के कारण बुजुर्गों को सांस लेने, हृदय की बीमारियां, फेफड़े, डायबिटीज की समस्या आदि बढ़ी है। डाक्टरों का कहना है कि 60 प्लस से ऊपर के लोगों में गंभीर बीमारियों के लक्षण देखने को मिले हैं। ऐसे में जेरियाट्रिक वार्ड में इनका इलाज जरूरी है।

Edited By: Madhukar Kumar