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रांची जमीन घोटाला: दस्तावेज गायब करने में CI और लिपिक ने राजस्व कर्मचारी पर फोड़ा ठीकरा, रिमांड पर लेगी ACB

Published: Thu, 24 Sep 2026 10:03 PM (IST)

एसीबी ने नामकुम अंचल कार्यालय से दाखिल खारिज दस्तावेज गायब होने के मामले में सीआई मनोज कुमार दीक्षित और लिपिक दीपक कुमार को गिरफ्तार किया है।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो रांची। (जागरण)

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो रांची। (जागरण)

HighLights

  1. दाखिल खारिज दस्तावेज गायब होने पर सीआई, लिपिक गिरफ्तार।

  2. आरोपियों ने राजस्व कर्मचारी महली को जिम्मेदार ठहराया।

  3. एसीबी अब दोनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी।

राज्य ब्यूरो, रांची। नामकुम अंचल कार्यालय से दाखिल खारिज (म्यूटेशन) के दस्तावेज गायब होने के मामले में झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक दिन पहले वहां के अंचल निरीक्षक (सीआई) मनोज कुमार दीक्षित व तत्कालीन लिपिक दीपक कुमार को गिरफ्तार किया था।

दोनों ने एसीबी को पूछताछ में बताया है कि दस्तावेज गायब करने में उनकी भूमिका नहीं है। दस्तावेज राजस्व कर्मचारी महली को दी गई थी।

इसके लिए महली ही जिम्मेदार है। हालांकि, उन दोनों के जवाब से एसीबी संतुष्ट नहीं है। एसीबी अब उन दोनों ही आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी।

गिरफ्तारी के बाद एसीबी की प्रारंभिक पूछताछ में दोनों आरोपितों ने दस्तावेज गायब करने का ठिकरा महली पर फोड़ा। एसीबी ने जब पूछा कि उक्त दस्तावेज महली को किस तारीख को दी गई थी, तब दोनों ने चुप्पी साध ली।

दोनों अपने जवाब से एसीबी को संतुष्ट नहीं कर सके। उनके गोल-मटोल जवाब से उनकी भूमिका और भी संदिग्ध हो गई है। पूरा मामला नामकुम अंचल के दाखिल-खारिज वाद संख्या 356आर-27/2013-14 से जुड़ा है।

झारखंड हाईकोर्ट के कड़े निर्देश के बाद एसीबी रांची थाने में 26 अगस्त को कांड संख्या 18/2026 दर्ज किया गया था। प्रारंभिक जांच में ही तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) डॉ. श्वेता वर्मा, तत्कालीन सीआई मनोज कुमार दीक्षित और लिपिक दीपक कुमार की सीधी संलिप्तता के साक्ष्य मिले थे।

निजी कंपनी के नाम पर हुई थी जमाबंदी

पूरा मामला नामकुम अंचल के धुर्वा थाना क्षेत्र के डुंडू गांव स्थित खाता नंबर 32 के प्लाट नंबर 776, 820, 821 और 822 की 1.22 एकड़ जमीन से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार मूल रैयत की मां ने वर्ष 1978-79 (निबंधन संख्या 23आर) में 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी।

पारिवारिक बंटवारे के बाद वैध उत्तराधिकारी दखल-कब्जे में थे। इस बीच अंचल कार्यालय के सिंडिकेट ने रिकार्ड में भारी हेरफेर करते हुए करीब दो एकड़ जमीन का अवैध म्यूटेशन कर दिया था।

करीब 1.22 एकड़ जमीन पर प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम से अवैध जमाबंदी की गई थी। 17 अगस्त 2016 को जब असली रैयत को दोहरी जमाबंदी का नोटिस थमाया गया, तब जाकर फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। अब एसीबी की जांच में अन्य आरोपितों की भी भूमिका उजागर होगी।

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