झारखंड के सीओ ऑफिस में भ्रष्टाचार का बोलबाला, कांके और रातू सहित इन अंचलों से शिकायतों की भरमार
झारखंड के अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं, जिसमें रिश्वतखोरी और म्यूटेशन में देरी प्रमुख है। ...और पढ़ें

भ्रष्टाचार के विरुद्ध सशक्त एजेंसी लोकायुक्त के पास भी लगातार आ रही हैं शिकायतें।
HighLights
अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।
रिश्वतखोरी और म्यूटेशन में देरी प्रमुख समस्या बनी हुई है।
लोकायुक्त और एसीबी ने कई भ्रष्ट अधिकारियों को गिरफ्तार किया।
दिलीप कुमार, रांची। झारखंड में अंचलों में सर्वाधिक भ्रष्टाचार की शिकायतें आ रही हैं। भ्रष्टाचार के विरुद्ध झारखंड की सशक्त एजेंसी लोकायुक्त व भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के पास अंचलों में भ्रष्टाचार की शिकायतों की भरमार है।
रिश्वत मांगने, बिना रिश्वत के म्यूटेशन नहीं करने, बेवजह लोगों को परेशान करने के मामले पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि छोटे-मोटे मामलों में भी अंचल में काम नहीं होने पर वरीय पदाधिकारियों के पास उनकी शिकायतें पहुंच रहीं हैं।
अभी दो दिन पहले ही भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में ही झारखंड हाई कोर्ट के आदेश पर एसीबी ने प्राथमिकी दर्ज कर नामकुम अंचल के तत्कालीन अंचल निरीक्षक (सीआई) मनोज कुमार दीक्षित तथा तत्कालीन कार्यालय लिपिक दीपक कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इतना ही नहीं, तत्कालीन अंचलाधिकारी डाॅ. श्वेता वर्मा व अन्य आरोपितों के विरुद्ध जांच तेज है।
गत वर्ष रांची के चुटिया थाने में तीन अंचलाधिकारी रवींद्र कुमार, अरविंद कुमार ओझा व सुमन कुमार सौरभ के अलावा अंचल निरीक्षक कमलकांत वर्मा, अनिल कुमार गुप्ता व राजस्व कर्मचारी सुनील मिंज व मनोरथ भगत के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पूरा मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा था।
लोकायुक्त के यहां सर्वाधिक शिकायतें अंचलों से संबंधित
इसी वर्ष अप्रैल महीने में लोकायुक्त जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता ने पदभार ग्रहण किया है। उनके पदभार ग्रहण के बाद से भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार शिकायतें लोकायुक्त कार्यालय में पहुंच रहीं हैं। प्रत्येक माह करीब 15 से 20 शिकायतें ऐसी हैं, जो सिर्फ जमीन से संबंधित हैं और अंचलों में भ्रष्टाचार से जुड़ी हैं।
कुछ तो ऐसी शिकायतें हैं, जिनमें आवेदक का कहना है कि वह जिस जमीन पर घर बनाकर रह रहा है, उसके म्यूटेशन आवेदन को अंचल ने यह लिखकर खारिज कर दिया कि आवेदक का जमीन पर दखल कब्जा नहीं है।
मतलब रिश्वत नहीं देने पर राजस्व कर्मचारी ने बिना भौतिक सत्यापन के फर्जी रिपोर्ट दी, जिसके आधार पर अंचलाधिकारी ने म्यूटेशन को अस्वीकृत कर दिया। लोकायुक्त व एसीबी में ऐसी शिकायतों की भरमार है।
अंचलों में भ्रष्टाचार के कुछ प्रमुख मामले
- बुढ़मू अंचल : एसीबी ने रांची के बुढ़मू अंचलाधिकारी सच्चिदानंद कुमार वर्मा व राजस्व उप निरीक्षक सह राजस्व कर्मचारी राजेश किशोर रवि व राजेश किशोर रवि के भाई गौतम किशोर को इसी वर्ष जुलाई महीने में गिरफ्तार किया था। तीनों पर दाखिल खारिज के बदले रिश्वत मांगने व वसूलने का आरोप है। जांच के पुष्टि के बाद एसीबी ने उनके विरुद्ध चार्जशीट भी दाखिल की थी।
- सदर अंचल चतरा : चतरा सदर अंचल में 15 सितंबर को एसीबी ने दाखिल खारिज के बदले 10 हजार रुपये रिश्वत लेते वहां के राजस्व कर्मचारी सतीश कुमार को एसीबी ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उसने दाखिल खारिज के लिए 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
- सदर अंचल रांची : एसीबी ने रांची के सदर अंचल के अंचलाधिकारी मुंशी राम को दो जनवरी 2025 को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उनपर जमीन संबंधित एक काम के निष्पादन के लिए रिश्वत मांगने का आरोप था। एसीबी उनके विरुद्ध चार्जशीट कर चुकी है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है। वे 37 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए थे और उनके घर से 11.42 लाख रुपये नकदी की बरामदगी हुई थी।
- सिल्ली अंचल : एसीबी रांची की टीम ने रांची के सिल्ली अंचल कार्यालय के अमीन गणेश महतो को आठ हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। इस मामले में वरीय पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
- नामकुम अंचल : एसीबी ने नामकुम अंचल के पूर्व अंचलाधिकारी मनोज कुमार, तत्कालीन प्रभारी अंचल निरीक्षक अशोक कुमार सिंह व हल्का कर्मचारी रतिया टोप्पो के विरुद्ध प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज की थी, जिसकी जांच चल रही है।
- हेहल अंचल : एसीबी ने हेहल अंचल के पूर्व सीआइ रहे अनिल कुमार सिंह के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी। यह प्राथमिकी मुख्यमंत्री के आदेश पर की गई थी। उनके विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उनके विरुद्ध आय की तुलना में 19 लाख 30 हजार रुपये अधिक की संपत्ति मिली थी।
- रातू अंचल : एसीबी ने वर्ष 20्र23 में म्यूटेशन के लिए 50 हजार रुपये रिश्वत मांगने के मामले में रातू अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) प्रदीप कुमार, राजस्व उप निरीक्षक सुनील कुमार सिंह व दलाल जाफर अंसारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
- बड़गाईं अंचल : रांची के बड़गाईं अंचल के पूर्व राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद को सबसे पहले ईडी ने ही गिरफ्तार किया था। उनके घर से 11 ट्रंक में जमीन के सरकारी दस्तावेज मिले थे। राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद पर जमीन के मूल दस्तावेज में हेराफेरी सहित कई आरोपों की पुष्टि हो चुकी है।
- कांके अंचल : पूर्व में लोकायुक्त के आदेश पर जांच में कांके के अंचल के मेसरा मौजा का एक मामला उजागर हुआ था, जिसमें एक दिन में ही कांके अंचल ने 50 डिसमिल जमीन का दाखिल खारिज कर दिया था। इस मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी अनिल कुमार व अंचल निरीक्षक दोषी मिले थे।
- कांके अंचल : कांके अंचल के पूर्व अंचलाधिकारी (सीओ) जयकुमार राम सहित छह के विरुद्ध ईडी ने चार्जशीट दाखिल की थी। उनपर कांके अंचल क्षेत्र में आदिवासी, भुईहरी व सरकारी प्रकृति की जमीन को फर्जी दस्तावेज पर जेनरल बनाकर बेचने का आरोप लगा था। बाद में सीओ जयकुमार राम का निधन हो गया था।
