Ranchi News: खलारी कोयलांचल में खुलेआम उगाही, व्हाट्सएप कॉल से मिल रही जान से मारने की धमकियां
खलारी कोयलांचल में अज्ञात अपराधियों ने सीसीएल डकरा परियोजना कांटा घर पर फायरिंग कर दहशत फैलाई। कोयला कारोबारियों को व्हाट्सएप ...और पढ़ें

करोड़ों की सुरक्षा, फिर भी एक धमकी में ठप हो जाता है कोयला उठाव। सांकेतिक तस्वीर

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जागरण संवाददाता, मैक्लुस्कीगंज। खलारी कोयलांचल क्षेत्र में गोलियों की तड़तड़ाहट और उगाही का खेल अब आम हो चुका है। शुक्रवार को खलारी थाना क्षेत्र के सीसीएल एनके एरिया के डकरा परियोजना स्थित रोड सेल कांटा घर पर दिनदहाड़े अंधाधुंध फायरिंग कर अज्ञात हथियारबंद अपराधियों ने इलाके में दहशत फैला दी। इस घटना से सीसीएल कर्मचारी और कोयला व्यवसायी सहमे हुए हैं।
स्थानीय थाना द्वारा लगातार गश्ती के दावों और परियोजना स्थलों पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तैनाती के बावजूद मोटरसाइकिल से पहुंचे अपराधी वारदात को अंजाम देकर आराम से फरार हो गए। इससे सीसीएल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुलकर सामने आ गई है।
सीसीएल के एनके और पिपरवार एरिया में सुरक्षा के नाम पर हर महीने करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद उग्रवादी और अपराधी तत्वों की एक धमकी पर ही कोयले का उठाव बंद हो जाता है। इन क्षेत्रों में कोई भी कोयला व्यवसायी सुरक्षित माहौल में काम करने को तैयार नहीं है।
चौंकाने वाली बात यह है कि कोयला कारोबारियों को सीधे व्हाट्सएप कॉल के जरिए धमकियां दी जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार “देवा उर्फ आदिल”, “ऋषिकेश ” और “विभीषण ”, सुदर्शन जैसे नामों से कॉल कर कारोबारियों से लेवी की मांग की जा रही है। लेवी नहीं देने की सूरत में जान-माल को गंभीर नुकसान पहुंचाने और खुलेआम गोली मारने की धमकी दी जा रही है। इससे पूरे कोयलांचल में भय का माहौल व्याप्त है।
आंकड़ों के मुताबिक इन दोनों क्षेत्रों में
लगभग 1200 CISF जवान,50 राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल,150 से अधिक होमगार्ड और दो थानों की पुलिस फोर्स तैनात है। सीसीएल थानों को वाहन उपलब्ध कराती है, जबकि अन्य सुरक्षा एजेंसियों को प्रतिमाह वेतन के रूप में भुगतान किया जाता है। सूत्र बताते हैं कि केवल CISF पर ही करीब 5 करोड़ रुपये प्रतिमाह खर्च किए जा रहे हैं।
इतनी व्यापक सुरक्षा और भारी खर्च के बावजूद आए दिन कोयला कारोबारियों से फोन पर उगाही और धमकियों का सिलसिला जारी है। पूर्व में भी कांटा घरों के आसपास अपराधी और नक्सली कई संगीन वारदातों को अंजाम दे चुके हैं, जिनमें कई कारोबारियों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
लगातार मिल रही धमकियों और प्रशासनिक निष्क्रियता से तंग आकर अब कोयला व्यवसायियों ने एनके और पिपरवार क्षेत्र से अपना कारोबार समेटने का मन बना लिया है। सवाल यह है कि जब सुरक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, तो आखिर अपराधियों के हौसले बुलंद क्यों हैं और इस उगाही के खेल पर कब लगाम लगेगी?
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