त्योहार आते ही क्यों जागता है खाद्य विभाग? सैंपल की जांच रिपोर्ट आने से पहले ही बिक जाती हैं मिलावटी मिठाइयां
दीपावली और छठ पर मिठाइयों की बिक्री बढ़ी है, लेकिन खुली मिठाइयों की निर्माण तिथि या बेस्ट बिफोर डेट की ...और पढ़ें

खुली मिठाइयों पर बेस्ट बिफोर डेट लिखने का नियम 2021 में वापस लिया गया।
HighLights
खुली मिठाइयों पर बेस्ट बिफोर डेट अनिवार्य नहीं।
एफएसएसएआइ ने 2021 में नियम वापस लिया।
पैकेटबंद मिठाइयों पर ही लेबलिंग लागू है।
जागरण संवाददाता, रांची। दीपावली और छठ पूजा को लेकर राजधानी की मिठाई दुकानों में तैयारियां तेज हो गई हैं। दुकानों में तरह-तरह की मिठाइयां सजने लगी हैं और खरीदारी भी बढ़ रही है। लेकिन इस बीच मिठाइयों की गुणवत्ता और उनकी ताजगी को लेकर एक अहम सवाल खड़ा है।
ग्राहक दुकान से मिठाई तो खरीद रहे हैं, लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं मिल पा रही कि खुली मिठाई कब तैयार की गई है और उसे कितने समय तक सुरक्षित रूप से खाया जा सकता है। खासकर डिसप्ले काउंटर में रखी खुली मिठाइयों पर निर्माण तिथि और बेस्ट बिफोर की जानकारी नहीं होती।
हालांकि, खुली मिठाइयों पर बेस्ट बिफोर डेट प्रदर्शित नहीं करने को फिलहाल नियमों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने वर्ष 2020 में खुली मिठाइयों की बिक्री के दौरान उनके ट्रे या कंटेनर पर मिठाई का नाम, कीमत और बेस्ट बिफोर डेट प्रदर्शित करने का प्रावधान किया था। लेकिन वर्ष 2021 में इस व्यवस्था को वापस ले लिया गया।
इसके पीछे खुले में बिकने वाली मिठाइयों की निगरानी और उनकी उपयोग अवधि निर्धारित करने में व्यावहारिक कठिनाइयों को वजह बताया गया। जिला खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी पवन कुमार के अनुसार, वर्ष 2020 में खुली मिठाइयों पर बेस्ट बिफोर डेट प्रदर्शित करने का प्रावधान किया गया था, लेकिन वर्ष 2021 में इसे वापस ले लिया गया।
वर्तमान में पैकेटबंद मिठाइयों के लिए लेबलिंग का प्रावधान लागू है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम लगातार मिठाईयों का सैंपल जांच के लिए भेजते रहते हैं।
पैकेटबंद मिठाइयों पर जानकारी देना जरूरी
खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत पैकेटबंद खाद्य उत्पादों पर आवश्यक विवरण देना अनिवार्य है। इसमें निर्माण या पैकिंग की तारीख, उपयोग की अंतिम तिथि अथवा बेस्ट बिफोर, सामग्री और अन्य निर्धारित जानकारियां शामिल होती हैं।
ऐसे उत्पाद खरीदते समय ग्राहकों को पैकेट पर लिखी जानकारी जरूर देखनी चाहिए। वहीं, खुली मिठाइयों के मामले में निर्माण तिथि और ताजगी की जानकारी प्रदर्शित करने की बाध्यता नहीं होने से ग्राहकों के पास मिठाई की गुणवत्ता परखने के सीमित विकल्प रह जाते हैं।
त्योहारों में ही तेज होती है जांच
मिठाइयों की गुणवत्ता और मिलावट की जांच भी एक बड़ी चुनौती है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से नियमित अंतराल पर जांच और नमूने संग्रह करने की जरूरत है, लेकिन त्योहारों के आसपास ही छापेमारी की गतिविधियां अधिक दिखाई देती हैं।
इस दौरान दुकानों से मिठाइयों के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे जाते हैं। समस्या यह है कि जांच रिपोर्ट आने में समय लग जाता है। तब तक त्योहार बीत चुका होता है और मिलावट की पुष्टि होने की स्थिति में भी संबंधित मिठाइयों की बिक्री और खपत हो चुकी होती है। नमूनों की जांच रिपोर्ट समय पर मिले और गड़बड़ी पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई हो, तभी मिलावट पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
ग्राहक रखें सावधानी
मिठाई खरीदते समय ग्राहक उसकी रंगत, गंध, बनावट और दुकान में रखरखाव की स्थिति पर ध्यान दें। पैकेटबंद मिठाई लेते समय निर्माण तिथि, बेस्ट बिफोर डेट और पैकेट की सील जरूर जांचें। दुकानदारों को भी मिठाइयों को ढककर रखने, साफ-सफाई बनाए रखने और निर्माण व भंडारण की जानकारी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने की पहल करनी चाहिए।
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