रांची : राची में हर दिन अलग-अलग कंपनियों के सैकड़ों सिम फर्जी दस्तावेज पर एक्टिवेट हो रहे हैं। इनका इस्तेमाल साइबर और अन्य अपराध की घटनाओं में हो रहा है। फर्जी आइडी से लिए गए सिम कार्ड से ही साइबर फ्रॉड बैंक अधिकारी बन कॉल कर रहे। मोबाइल डाटा सर्विसेज का भी इस्तेमाल हो रहा है। इसके बावजूद टेलीकम कंपनियां दस्तावेजों के सत्यापन के बिना धड़ल्ले से सिम कार्ड इश्यू कर रही हैं। लेकिन, पुलिस टेलीकम कंपनियों पर कोई सख्ती नहीं बरत रही है। राजधानी में हजारों ऐसी दुकानें हैं, जहां केवल आइडी कार्ड और फोटो लेकर जाने से सिम कार्ड एक्टिवेट कर दिया जाता है। रांची से एक्टिव किए गए सिम जामताड़ा, साहेबगंज, गुमला, सिमडेगा, खूंटी समेत कई जिलों में भेजे जा रहे हैं। वहां बैठे साइबर अपराधी और नक्सली समेत अन्य अपराधी इन सिम का इस्तेमाल कर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

डिस्टीब्यूटर से रिटेलर तक की होती है मिलीभगत

पिछले कई सालों से डिस्टीब्यूटर व रिटेलर निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के चक्कर में फर्जी सिम का कारोबार चला रहे हैं। यह फर्जीवाड़ा वितरकों, रिटेलरों व कंपनी के अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है। फर्जी फोटो व एड्रेस पर किसी भी व्यक्ति को फर्जी डेमो सिम बेचा जा रहा है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराध समेत कई गैर कानूनी कामों में हो रहा है। इसमें कौन सा व्यक्ति यह सिम चला रहा है, इसका कोई आधार नहीं होता। फर्जी सिम के जरिये युवतियों और महिलाओं को भी परेशान किया जाता है। सिम के एक्टिवेशन में आधार की अनिवार्यता नहीं आने से फर्जी सिम इश्यू करने का खेल जारी है।

डिस्टीब्यूटर हैं पहली कड़ी

डिस्टीब्यूटर के यहा से दुकानों पर जानेवाले एजेंट जो एक्टीवेट सिम दुकानदारों को देते हैं, उसके लिफाफे में उपभोक्ता और सिम विक्रेता की जानकारी के लिए भरे जानेवाले फॉर्म की सिर्फ रीसीट कॉपी होती है। पूरा डिटेल पहले से ही भरा रहता है। जैसे ही ग्राहक बिना आइडी के सिम लेने पहुंचता है मनमाने रुपये लेकर उसे सिम दे दिया जाता है। अब उपभोक्ता अपने मोबाइल पर सिम लगाता है, तो कस्टमर केयर को फर्जी व्यक्ति की जानकारी यानी जो रीसीट में लिखा होता है वह दिया जाता है, ताकि सिम बंद न हो। ऐसे सिम से किए गए अपराध सामने आने पर दुकानदार और डिस्टीब्यूटर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

टीआरएआइ के निर्देश का असर नहीं

भारतीय दूरसंचार नियामक आयोग (टीआरएआइ) ने पूरे देश में एक आइडी पर केवली नौ सिम देने का निर्देश जारी किया है। इस निर्देश को भी फर्जीवाड़ा करने वालों पर कोई असर नहीं है। चूंकि नौ सिम पूरा होने के बाद दूसरी फर्जी आइडी का इस्तेमाल कर सिमकार्ड लिए जा रहे हैं। ऐसे में टीआरआइ के निर्देश के बावजूद टेलीकम कंपनियों पर कोई असर नहीं पड़ा रहा है।

दिखावे का होता है वेरीफिकेशन

टेलीकॉम कंपनियों द्वारा सिम देने के बाद नाम और एड्रेस का वेरीफिकेशन के बाद उसे एक्टिवेट करने का नियम है। कंपनी का कॉल आने या उस नंबर से कॉल करने की सूरत में वेरीफिकेशन होता है। लेकिन, सवाल यह है कि जो व्यक्ति फर्जी आइडी से सिम लिया हो, वही बताएगा। कंपनी भी डिस्टीब्यूटर द्वारा भेजे गए आइडी प्रूफ को सही मानकर नियमों की खानापूर्ति करती है, जबकि दस्तावेज का सत्यापन नहीं होता।

टेलीकॉम विभाग की गाइडलाइन

-कस्टमर एक्विजिशन फॉर्म (सीएएफ) पर आइडी प्रूफ के साथ पासपोर्ट साइज का फोटोग्राफ लगा हो।

- सिम लेने वाले से फॉर्म भरवाने के साथ हस्ताक्षर लेना अनिवार्य।

- अनपढ़ व्यक्ति के अंगूठे का निशान फॉर्म में लिया जाए।

-दुकानदार को सीएएफ पर यह भी रिकॉर्ड करना है कि उसने सिम लेने वाले व्यक्ति को देखा है, फॉर्म में लगे फोटोग्राफ को मैच किया। एड्रेस और आइडेंटिटी प्रूफ को भी वेरिफाई करना है।

-फॉर्म में की गई एंट्री द्वारा सिम कार्ड की सेलिंग और एक्टीवेशन का डेट भी लिखना है।

-प्री एक्टिवेटेड सिम कार्ड नहीं बेचा सकता। ऐसा करने पर 50 हजार रुपये फाइन के रूप में वसूले जाने का प्रावधान है।

-सिम लेने के लिए गलत डॉक्यूमेंट देने पर दुकानदार 15 दिनों के भीतर एफआइआर दर्ज करवा सकते हैं।

'आपराधिक घटनाओं में फोन का इस्तेमाल होने से संबंधित आइडी का सत्यापन होता है। पुलिस कई बार दस्तावेजों के सही सत्यापन के बाद ही सिम देने का निर्देश जारी कर चुकी है।'

अमन कुमार, सिटी एसपी राची।

Posted By: Jagran

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