रांची में अगले दो साल तक नहीं होगा जलसंकट, बारिश से दूर हुई पानी की चिंता; गोंदा-गेतलसूद डैम लबालब
अच्छी बारिश के कारण रांची के गोंदा और गेतलसूद डैम लबालब भर गए हैं, जिससे अगले दो साल तक शहर ...और पढ़ें

गोंदा और गेतलसूद डैम लबालब, हटिया डैम भी भराव क्षमता के एक फीट दूर।
HighLights
गोंदा और गेतलसूद डैम अपनी अधिकतम क्षमता पर।
रांची को अगले दो साल तक पेयजल संकट से राहत।
हटिया डैम के प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण की आवश्यकता।
जागरण संवाददाता, रांची। अच्छी बारिश ने राजधानी रांची के लोगों को पेयजल संकट से बड़ी राहत दी है। मानसून में पर्याप्त वर्षा होने के कारण शहर के प्रमुख जलाशयों में इस बार पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर जल भंडारण हुआ है।
गोंदा और गेतलसूद डैम जहां अपनी अधिकतम क्षमता तक पहुंच चुके हैं, वहीं हटिया डैम भी भराव स्तर के काफी करीब है। जलाशयों में उपलब्ध पानी को देखते हुए अगले दो साल तक सामान्य परिस्थितियों में रांची शहर में बड़े पेयजल संकट की संभावना कम हो गई है।
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गोंदा डैम में इस वर्ष 2 अक्टूबर को जलस्तर 2128 फीट दर्ज किया गया, जो इसकी अधिकतम क्षमता के बराबर है। पिछले वर्ष इसी तारीख को जलस्तर 2127 फीट 6 इंच था।
यानी इस वर्ष गोंदा डैम में करीब छह इंच अधिक पानी है। वहीं, गेतलसूद डैम में इस वर्ष जलस्तर 1934 फीट 4 इंच पहुंच गया है। पिछले वर्ष 2 अक्टूबर को यह 1932 फीट 7 इंच था। इस तरह गेतलसूद डैम में करीब एक फीट 9 इंच अधिक पानी जमा है। यह डैम रांची की सबसे बड़ी जलापूर्ति व्यवस्था का आधार है।
रोजाना 52 एमजीडी से अधिक पानी की आपूर्ति
रांची शहर की पेयजल व्यवस्था मुख्य रूप से तीन जलाशयों पर निर्भर है। गेतलसूद डैम से रुक्का जलशोधन केंद्र के माध्यम से शहर के बड़े हिस्से में प्रतिदिन करीब 37 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी) पानी की आपूर्ति की जाती है।
वहीं, हटिया डैम से धुर्वा, एचईसी, एयरपोर्ट, रेलवे, तुपुदाना सहित आसपास के क्षेत्रों में करीब 10 एमजीडी पानी पहुंचाया जाता है। गोंदा डैम से राजधानी के कई शहरी इलाकों में प्रतिदिन करीब 5 एमजीडी पानी की आपूर्ति होती है। इस तरह तीनों जलाशयों से रांची शहर में रोजाना करीब 52 एमजीडी पानी की आपूर्ति की जाती है।
हटिया डैम पहुंचने वाले जलस्रोत क्षतिग्रस्त
तीनों जलाशयों में सबसे अलग स्थिति हटिया डैम की है। 26 सितंबर 2026 को इसका जलस्तर 2198 फीट 1 इंच दर्ज किया गया, जबकि इसकी अधिकतम क्षमता 2200 फीट है। यानी डैम अभी करीब एक फीट 11 इंच नीचे है।
पिछले वर्ष 26 सितंबर को जलस्तर 2198 फीट 6.5 इंच था। इस वर्ष पिछले साल की तुलना में करीब साढ़े पांच इंच कम पानी दर्ज किया गया है। जानकारों के अनुसार, हटिया डैम तक पहुंचने वाले प्राकृतिक जलस्रोतों में लगातार कमी इसका प्रमुख कारण है।
कैचमेंट क्षेत्र में बदलाव, छोटे जलस्रोतों के खत्म होने और प्राकृतिक प्रवाह कम होने से बारिश के बावजूद डैम में पानी का संचय प्रभावित हो रहा है। ऐसे में भविष्य में हटिया डैम को मजबूत रखने के लिए इसके कैचमेंट क्षेत्र और प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण की जरूरत है।
जलाशयों के जलस्तर की स्थिति
| जलाशय | वर्तमान जलस्तर | पिछले वर्ष का जलस्तर | अंतर | अधिकतम क्षमता |
| गोंदा डैम | 2128 फीट 6 इंच | 2127 फीट 6 इंच | 6 इंच अधिक | 2128 फीट |
| गेतलसूद डैम | 1934 फीट 4 इंच | 1932 फीट 7 इंच | 1 फीट 9 इंच अधिक | 1936 फीट |
| हटिया डैम | 2198 फीट 1 इंच | 2198 फीट 6.5 इंच | 5.5 इंच कम | 2200 फीट |
जल भंडारण से मिली राहत
पिछले वर्षों में गर्मी के दौरान डैमों का जलस्तर घटने से रांची में पेयजल संकट की स्थिति बनती रही है। इस बार बेहतर बारिश के कारण तीनों प्रमुख जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा हुआ है। इससे गर्मी के महीनों में जलापूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी। हालांकि, लंबी अवधि के लिए जलस्रोतों के संरक्षण और कैचमेंट क्षेत्र को सुरक्षित रखना जरूरी होगा।
जलाशयों की स्थिति राजधानीवासियों के लिए राहत देने वाली है। गर्मी में जल संकट की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी। शहर को पर्याप्त जलापूर्ति हो सकेगी। पर्याप्त जल भंडारण के बावजूद शहर में पानी की बर्बादी रोकना और नियमित आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखना होगा। प्रदेशभर में जलाशयों में बेहतर पानी एकत्र होने की सूचना है।
-योगेंद्र प्रसाद, मंत्री, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग
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