रामगढ़ से रांची की दूरी हुई कम, धूल भरे रास्तों से फोरलेन और एक्सप्रेसवे तक का सफर; बेहतर रेल कनेक्टिविटी
झारखंड राज्य के गठन के 25 वर्षों में रामगढ़ के परिवहन क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव आया है, जिससे यात्रा सुगम ...और पढ़ें

रामगढ़ से होकर गुजरती रेलवे लाइन। (तस्वीर: जागरण)
HighLights
रामगढ़ में 25 वर्षों में परिवहन का चेहरा बदला।
फोरलेन, सिक्सलेन सड़कों और रेल कनेक्टिविटी में सुधार।
बरकाकाना को विश्व स्तरीय स्टेशन बनाने की योजना।
संवाद सूत्र, रामगढ़। संयुक्त बिहार से अलग होकर 15 नवंबर 2000 को जब झारखंड अस्तित्व में आया, तब रामगढ़ हजारीबाग जिले का महज एक अनुमंडल हुआ करता था। उस दौर में परिवहन का मतलब सुबह-शाम चलने वाली एक-दो सरकारी बसें, धूल उड़ाते ट्रक और कुजू से रांची जाने वाला एक थका देने वाला सफर था।
आज, झारखंड गठन के 25 वर्षों बाद रामगढ़ राज्य के सबसे व्यस्त और सुगम मार्गों में से एक बन चुका है, जहां रांची तक का सफर अब महज एक घंटे में पूरा हो रहा है। राज्य बनने के शुरुआती सात वर्षों तक रामगढ़ में परिवहन की रीढ़ केवल पुराना एनएच-33 (रांची-पटना रोड) था।
यह दो लेन का टूटा-फूटा मार्ग था, जहां भारी वाहनों की आवाजाही के कारण अक्सर लंबा जाम लगा रहता था। गांवों में कच्ची सड़कें थीं और बरसात के दिनों में पतरातू, गोला व दुलमी के कई गांव जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट जाते थे।
रेल परिवहन की बात करें तो तब सिर्फ बरकाकाना जंक्शन था, जो मुख्य रूप से कोयला ढुलाई के लिए जाना जाता था। आम आदमी के लिए यात्री ट्रेनें न के बराबर थीं और शहर से गांवों को जोड़ने का एकमात्र साधन ऑटो हुआ करते थे।
फोरलेन से लेकर एक्सप्रेसवे तक
समय के साथ तस्वीर बदली। साल 2015 में हजारीबाग-रांची फोरलेन, रामगढ़-कुजू बाईपास और बरकाकाना-भुरकुंडा-सायल रोड के निर्माण ने शहर को ट्रैफिक जाम से बड़ी मुक्ति दिलाई। पुराना एनएच-33 अब आधुनिक एनएच-20 के रूप में फोरलेन और सिक्सलेन में तब्दील हो रहा है। इसके अलावा, ओरमांझी-गोला-जैनामोड़ भारतमाला एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य तेजी से जारी है।
सबसे बड़ा क्रांतिकारी बदलाव रेलवे सेक्टर में देखने को मिला। टाटीसिलवे-सांकी नई रेल लाइन (2019) और बरकाकाना-रांची नई रेल लाइन के शुरू होने से रामगढ़ सीधे राजधानी रांची से जुड़ गया।
अब बरकाकाना से रांची के लिए नियमित पैसेंजर ट्रेनें और हटिया-सांकी ट्रेनें चल रही हैं। कोयला ढुलाई के साथ-साथ यात्री सुविधाओं में भी अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर बरकाकाना से राजधानी एक्सप्रेस का परिचालन फिर से शुरू करने की मांग लगातार उठ रही है (वर्तमान में यह ट्रेन लोहरदगा-टोरी होते हुए चलाई जाती है)।
सड़क परिवहन के मोर्चे पर भी निजी और सरकारी बसों के साथ-साथ ई-रिक्शा और सीएनजी ऑटो की भरमार है। अब रामगढ़ बस स्टैंड से रांची, हजारीबाग, बोकारो और जमशेदपुर के लिए आसानी से बसें मिल जाती हैं।
भविष्य की योजनाएं: वर्ल्ड क्लास बनेगा बरकाकाना जंक्शन
आने वाले 20-25 वर्षों में रामगढ़ के परिवहन तंत्र को और अधिक आधुनिक बनाने की बड़ी योजनाएं हैं।
- सड़क नेटवर्क: एनएच-20 और एनएच-23 को 6-लेन एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा। साथ ही, रांची-पटना के बीच इलेक्ट्रिक बस कॉरिडोर चलाने की योजना है।
- रेलवे का आधुनिकीकरण: बरकाकाना जंक्शन को एक 'वर्ल्ड क्लास स्टेशन' और लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित किया जाएगा। कोल इंडिया की बंद पड़ी लाइनों पर मेट्रो या रैपिड रेल जैसे लोकल ट्रेन नेटवर्क का प्रस्ताव है, जो पतरातू, भुरकुंडा, कुजू और गोला को आपस में जोड़ेगा।
- ग्रामीण विकास: गांव के स्तर पर ई-ऑटो चार्जिंग स्टेशन, ग्रामीण बस सेवा शुरू की जाएगी और पीएमजीएसवाई-4 (PMGSY-IV) के तहत 100 की आबादी वाले हर टोले तक पक्की सड़क पहुंचाई जाएगी।
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