रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand Congress राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को केंद्रीय स्तर पर पार्टी का अध्यक्ष बनाने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस को उनकी हरकतों से गहरा सदमा लगा है। माना जा रहा है कि गहलोत के इशारे पर ही पार्टी के 90 से अधिक विधायकों ने आलाकमान के निर्देशों के विरुद्ध अलग राह चुनने का निर्णय लिया। बगावती रुख अख्तियार कर चुके कांग्रेस के विधायकों ने सचिन पायलट को अपना नेता मानने से इन्कार कर दिया है। इस कारण से केंद्र में अशोक गहलोत को अध्यक्ष बनाने और राज्य की बागडोर सचिन पायलट को देने की मंशा विफल होती दिख रही है।

पहली बार नहीं बुजुर्ग नेताओं की पार्टी में मनमानी  

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि कांग्रेस के किसी बुजुर्ग नेता ने अपनी मनमानी चलाने के लिए पार्टी को तोड़ने की कोशिश की है। पहले भी कई नेता मनचाहा पद अथवा पुरस्कार नहीं मिलने से नाराज होकर पार्टी छोड़कर चले गए हैं। कांग्रेस पार्टी में तमाम पदों को सुशोभित कर चुके गुलाम नबी आजाद ने एक दिन पहले ही अपनी नई पार्टी की घोषणा की है तो इसके पूर्व कांग्रेस छोड़कर जाने वाले नेताओं की एक लंबी सूची है।

आज दूसरी पार्टी में हैं यह बड़े दिग्गज नेता

पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह, पूर्व कानून मंत्री अश्वनी कुमार, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, पंजाब में कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रमुख सुनील जाखड़ आदि सीनियर नेताओं ने पार्टी में रहकर संघर्ष करने की बजाए अलग राह अपनाने को प्राथमिकता दी और आज यह सभी दूसरी पार्टियों में हैं।

इसबार युवा ही युवाओं का करेंगे चुनाव

कांग्रेस पार्टी ने उदयपुर अधिवेशन के बाद युवाओं को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया जिसके बाद केंद्रीय अध्यक्ष के चयन से पहले बनाए गए डेलीगेट्स मैं इस निर्णय की झांकी दिखती है। झारखंड में कांग्रेस के बड़े नेताओं की मानें तो 90 प्रतिशत से अधिक डेलीगेट्स युवा हैं अर्थात 50 वर्ष से कम उम्र के हैं। उदयपुर में पार्टी के अधिवेशन के बाद से ही युवाओं के लिए पार्टी में बेहतर माहौल बन रहा है।

सीनियर नेताओं को किनारे करने की तैयारी

झारखंड में पार्टी सूत्रों की मानें तो कई सीनियर नेताओं को किनारे करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। ऐसे में सुबोध कांत सहाय, रामेश्वर उरांव, फुरकान अंसारी, ददई दुबे जैसे नेताओं को मुख्यधारा से हटाकर पार्टी आगे बढ़ेगी। अभी भी रामेश्वर उरांव को छोड़कर किसी सीनियर नेता को पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई है।

युवाओं ने भी छोड़ी पार्टी लेकिन नुकसान कम

कांग्रेस के कई युवा नेताओं ने हाल के दिनों में पार्टी छोड़ी है लेकिन इससे पार्टी की छवि को उतना नुकसान नहीं हुआ है। ज्योतिरादित्य सिंधिया, हार्दिक पटेल, जितिन प्रसाद, जयवीर शेरगिल आदि युवा नेताओं ने अलग-अलग कारणों से पार्टी छोड़ दी लेकिन उस वक्त बुजुर्गों ने पार्टी को थामे रखा। अब उम्र दराज नेता भी पार्टी को छोड़ रहे हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए केंद्रीय स्तर पर रणनीति तैयार की जा रही है।

Edited By: M Ekhlaque

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