रांची, [आनंद मिश्र]। Jharkhand Political Updates हम मूढ़ हैं, जो हमें राज्य सरकार का काम नहीं दिखता। विपक्ष वाले भी यूं ही धरती-आकाश सिर पर उठाए रहते हैं। स्वतंत्रता दिवस पर जब हुजूर ने बताया तो पता चला कि फ्रांस से राफेल और रूस से कोरोना का टीका लाने के अलावा यहां सब कुछ पहले ही किया जा चुका है। रोजी-रोजगार, काम-धाम, अनाज-पानी सबकी व्यवस्था हो चुकी है। अब किसानों की बात न करिएगा, वो तो अंदरूनी सियासत से जुड़ा मामला है। दरअसल, तीर कमान और पंजे ने आपस में हाथ जरूर मिला रखा है, लेकिन दोनों का पॉलिटिकल एजेंडा अलग-अलग है। कर्ज माफी को हाथ वालों ने राष्ट्रीय स्तर पर पेटेंट करा रखा है। अब जब मुख्य समारोह का मंच तीर-धनुष के हवाले होगा, तो एजेंडा भी उन्हीं का चलेगा। तो, एजेंडा खालिस झारखंडी है, इसमें मिलावट की तनिक भी गुंजाइश नहीं है।

हाई लेवल कमेटी

राजनीति में मुद्दे दफनाए नहीं जाते। पक्ष-विपक्ष की पूरी दुकान इन मुद्दों से ही चलती है। विपक्ष में रहो तो मुद्दों को पैदा करो, उन्हें कुरेदो, उछालो और सत्ता पक्ष में आते ही पहले तो उन मुद्दों पर मौन साधो, फिर कुछ दिन बाद हाई लेवल कमेटी का गठन कर दो। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि कार्यकाल तकरीबन निकल ही जाता है। यदि रिपोर्ट आ भी गई, तो सरकार के स्तर से उस पर मंथन में कुछ वक्त जाया होना लाजमी है। तब तक अगले चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाती है। ऐसा ही होता रहा है और आगे भी ऐसा ही होगा। सत्ता चलाने का आजादी के बाद का यह फार्मूला हमेशा से कामयाब रहा है। तो, अपने झारखंड के जो बंदे यह सोच रहे हैं कि सबकी मनोकामनाएं पूरी हो जाएंगी, वे एक बार फिर सो जाएं और अगले स्वतंत्रता दिवस का इंतजार करें। जय हिंद।

दोस्ती दांव पर

रूस ने कोरोना वैक्सीन बनाने का दावा किया है! अमेरिका को भरोसा नहीं! लेकिन, हमें है। और, इससे भी ज्यादा भरोसा हमें छोटे नवाब की दोस्ती पर है। नेहरूजी के बाद रूस से दोस्ती की विरासत की डोर इन्होंने ही थाम रखी है। डंके की चोट पर मुखियाजी को भरोसा दिलाया था कि वैक्सीन की पहली खेप रूस से झारखंड ही आएगी, तो अब समय दोस्ती की परीक्षा का आ गया है। टेस्ट पेपर लेकर कमल दल वाले भी बैठे हैं। कहते हैं कि लिटमस टेस्ट करेंगे। रंग बदलता है या नहीं। लेकिन, अपने डॉक्टर साहब रंग बदलने वालों में से नहीं हैं। वादा किया था, तो निभाएंगे। रूस ने नहीं दी, तो खुद बनाएंगे। फिलहाल अपने फार्मूले से बनाए गए टीके की टेस्टिंग हाथ वाले खेमे में कर रहे हैं। खुराक ऐसे लोगों को देने में जुटे हैं, जिनकी इम्युनिटी कमजोर है।

अंगूर खट्टे हैं...

राजस्थान में पायलट की सफल लैंडिंग हो गई। खुशी राजस्थान से ज्यादा झारखंड के हाथ वाले खेमे में उफान मार रही है। फ्यूज हो चुके बल्ब से भी रोशनी फूट पड़ी है। वहां की सियासी हलचल की पल-पल की गतिविधि पर पैनी नजर लगा रखी थी। इधर लोग ताना भी मारने लगे थे, अब झारखंड की बारी है। पिछले कुछ दिन बहुत भारी थे, करवट बदलते बीते। टोले के मुखिया कुछ ज्यादा ही परेशान थे, कोरोना मीटर की तरह बीपी-शुगर सब बढ़ गया था। अब इनके सुर थोड़े मद्धिम पड़ गए हैं। कहने लगे हैं कि बस देखते जाइए। इन्हें गिराने के लिए तो कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। बस रस्सी डालकर छोड़ दीजिए, खुद इतना उछल-कूद मचाएंगे कि देर-सवेर लपेटे में आ ही जाएंगे। इससे ज्यादा कुछ कहने में फंसने का डर है। इनकी मायूसी देखकर तो हम यही कहेंगे कि अंगूर खट्टे हैं जनाब।

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