राज्य ब्यूरो, रांची : अब शिक्षकों को मिलनेवाले राष्ट्रीय अवार्ड में किसी तरह की पैरवी-पहुंच या गड़बड़ी नहीं चलेगी। अधिकारी अपने पसंद के शिक्षकों की अनुशंसा भी नहीं कर सकेंगे। इस अवार्ड के लिए पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन आवेदन मंगाने से यह सब संभव नहीं हो सकेगा। केंद्र सरकार ने पहली बार इस अवार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन मंगाने शुरू किए हैं।

इसके लिए केंद्र का पोर्टल 30 जून तक खुला रहेगा। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के पदाधिकारियों ने गुरुवार को राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के पदाधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग कर इस अवार्ड के लिए अधिक से अधिक शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन कराने का निर्देश दिया। साथ ही चयन प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी। इधर, केंद्र के निर्देश के आलोक में विभाग के अपर सचिव शैलेश कुमार चौरसिया ने सभी डीईओ और डीएसई को पत्र भेजकर अधिक से अधिक शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

इसके तहत राज्य से अब तीन शिक्षकों की अनुशंसा इस अवार्ड के लिए भेजी जाएगी। राष्ट्रीय स्तर पर अवार्ड के लिए सभी राज्यों से प्राप्त अनुशंसाओं में प्रतियोगिता हो सकेगी। बता दें कि पहले इस अवार्ड के लिए शिक्षकों से आवेदन नहीं मंगाए जाते थे। जिलों से प्राप्त अनुशंसा के आधार पर राज्य स्तरीय कमेटी चयन कर केंद्र को अपनी अनुशंसा भेजती थी। अवार्ड के लिए शिक्षकों के नाम भेजने में जिला स्तर पर भेदभाव की बात भी सामने आती थी।

अब नई प्रक्रिया के अनुसार, ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी जिला स्तर पर उपायुक्तों की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा की जाएगी। स्क्रूटनी कर पुरस्कार के लिए शिक्षकों की अनुशंसा स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को 15 जुलाई तक भेजी जाएगी। राज्य स्तर पर शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी जिलों से प्राप्त अनुशंसा में से शिक्षकों का चयन कर राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए 31 जुलाई तक केंद्रीय कमेटी को भेजेगी। केंद्र सरकार इसपर अंतिम निर्णय लेगी।

Posted By: Jagran

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