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रिम्स अतिक्रमण मामले में आदिवासी नेत्री निशा भगत को हाई कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत

Published: Thu, 09 Jul 2026 12:11 PM (IST)

झारखंड हाई कोर्ट ने रिम्स भूमि अधिग्रहण और अतिक्रमण हटाने के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में आदिवासी नेत्री निशा ...और पढ़ें

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HighLights

  1. निशा भगत को झारखंड हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिली।

  2. रिम्स भूमि अधिग्रहण विरोध प्रदर्शन से जुड़ा था मामला।

  3. सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में दर्ज थी प्राथमिकी।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने रिम्स भूमि अधिग्रहण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में आदिवासी नेत्री निशा भगत की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने बुधवार को जमानत प्रदान की। एक अन्य फैसले में हाई कोर्ट ने अलकतरा घोटाले के तीन आरोपित को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।


सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शिशिर राज ने पक्ष रखते हुए कहा कि निशा भगत आदिवासियों के अधिकारों और जनहित के मुद्दों को उठा रही थीं। उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी तथ्यों पर आधारित नहीं है और उन्हें गलत तरीके से आरोपित बनाया गया है।

रिम्स परिसर के समीप जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान का विरोध करने तथा सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने निशा भगत समेत अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

इसी मामले में गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए उन्होंने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। बता दें निशा आदिवासियों के हक के लिए लड़ती रहीं हैं। 

अलकतरा घोटाले के तीन आरोपित बरी

झारखंड हाई कोर्ट ने अलकतरा घोटाला मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व सहायक अभियंता उपेंद्र कुमार सिंह, उमेश पासवान और राजबली राम को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। जस्टिस राजेश कुमार की एकलपीठ ने वर्ष 2019 में सीबीआइ की विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा के आदेश को निरस्त करते हुए तीनों की आपराधिक अपील स्वीकार कर ली।

मामला वर्ष 2009 में दर्ज सीबीआइ कांड से जुड़ा है। आरोप था कि अलकतरा की खरीद में अनियमितता, फर्जीवाड़ा और वित्तीय गड़बड़ी कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। जांच के बाद सीबीआइ ने भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था।

सीबीआइ की विशेष अदालत ने वर्ष 2019 में तीनों आरोपितों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई के बाद झारखंड हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले की समीक्षा की और दोषसिद्धि एवं सजा के आदेश को निरस्त कर दिया।

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