झारखंड में NIA का बड़ा एक्शन: 1662 डेटोनेटर बरामद, बेहद लापरवाही से रखे जा रहे थे बारूद
एनआईए ने कोडरमा में विस्फोटकों के अवैध भंडारण और परिवहन के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। छापेमारी ...और पढ़ें

कोडरमा में चार ठिकानों पर छापेमारी, विस्फोटकों के अवैध भंडारण और परिवहन के नेटवर्क का खुलासा।
HighLights
एनआईए ने कोडरमा में दो आरोपियों को किया गिरफ्तार।
छापेमारी में 1662 डेटोनेटर, 16 लाख रुपये नकद बरामद।
अवैध विस्फोटक भंडारण-परिवहन नेटवर्क का हुआ खुलासा।
राज्य ब्यूरो, रांची। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने झारखंड के कोडरमा जिले में विस्फोटकों के अवैध भंडारण और परिवहन से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए गुरुवार को दो लोगों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने चार ठिकानों पर छापेमारी के दौरान 1662 नान-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, पांच डिजिटल डिवाइस और 16 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान महेश मेहता और शंकर यादव के रूप में हुई है। एनआईए के अनुसार, दोनों आरोपी विस्फोटकों को अवैध रूप से जमा करने और उन्हें अन्य आरोपियों तक पहुंचाने की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे।
एजेंसी का कहना है कि इस नेटवर्क के कारण आम लोगों की जान-माल को गंभीर खतरा पैदा हुआ था। यह कार्रवाई साल 2024 में बंगाल के साल्टोरा क्षेत्र में हुए मोटरसाइकिल विस्फोट से जुड़े मामले (आरसी-16/2024/एनआइए/डीएलआई) में की गई है।
इस मामले में अब तक तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। एनआईए ने अक्टूबर 2024 में इस केस को अपने हाथ में लिया था।
कोडरमा में चार ठिकाने पर छापेमारी
जांच में सामने आया है कि विस्फोटकों को बिना किसी वैध लाइसेंस के हासिल कर गुप्त नेटवर्क के जरिए अलग-अलग स्थानों पर जमा किया जा रहा था और उनका अवैध परिवहन किया जा रहा था। एजेंसी ने यह भी पाया कि विस्फोटकों को बेहद लापरवाही और खतरनाक तरीके से रखा और ले जाया जा रहा था।
एनआईए के मुताबिक, मामले की शुरुआत उस विस्फोट से हुई थी जिसमें विस्फोटकों के अवैध परिवहन के दौरान जॉयदेब मंडल उर्फ बबलू मंडल की मौत हो गई थी। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
फिलहाल एनआईए विस्फोटकों के स्रोत और उन्हें किन लोगों या स्थानों तक पहुंचाया जाना था, इसकी गहन जांच कर रही है। जिले में चार ठिकानों पर छापेमारी की गई है। अभी और खुलासे होने शेष हैं।
