रांची, जासं। आज शायद ही ऐसा कोई क्षेत्र है जिसमें लड़कियों ने अपनी छाप नहीं छोड़ी हो। लड़कियों के लिए अधिक समर्थन, उन्हें नया मौका देने के लिए राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत की गई। 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है और इसे मनाने का उद्देश्य लड़कियों को प्रेरित करना, जागरूकता फैलाना और लोगों को आज की लड़कियों की शक्ति से अवगत कराना है।

आज हमारे शहर की कई ऐसी युवतियां हैं जिनकी सफलता आसमान छू रही हैं। फैशन से लेकर समाज सेवा तक में यह अपना दम दिखा रही हैं। शिक्षा में असमानता, पोषण, कानूनी अधिकार, चिकित्सीय देख-रेख, सुरक्षा, सम्मान, बाल विवाह आदि में बालिका को असमानता का शिकार होना पड़ता है। राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत वर्ष 2009 से की गई, 24 जनवरी के दिन इंदिरा गांधी को नारी शक्ति के रूप में याद किया जाता है, वह इसी दिन प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठी थीं।

फैशन डिजाइनिंग में कमा रहीं नाम : आईएनआईएफडी से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर रहीं नेहा ने अपने साथ-साथ रांची का नाम भी पूरी दुनिया में रोशन किया है। दिल्ली में आयोजित मिस मल्टीनेशनल प्रतियोगिता के लिए उन्हे कपड़े डिजाइन करने का मौका मिला था जिसमें कुल 18 देशों ने भाग लिया और इसमें नेहा ने बेस्ट नैशनल कॉस्ट्यूम का अवार्ड जीता। नेहा ने जो कपड़े डिजाइन किए वह रानी पद्मावती से प्रेरित है, उन्होने भारतीय परंपरा को कॉस्ट्यूम के द्वारा दर्शाया।

फैशन डिजाइनिंग कोर्स के पहले वर्ष की छात्रा नेहा को बचपन से फैशन डिजाइनिंग में रूचि रही है और आगे भी वह इसी क्षेत्र में नाम कमाना चाहती हैं। पूर्व में वह मीस टीन इंटरनेशनल के लिए भी कपड़े डिजाइन कर चुकी हैं जिसमें उन्होने झारखंड की सोहराई व कोहबर कला को कॉस्ट्यूम पर उभारा था। इस प्रतियोगिता में कुल 20 देशों ने भाग लिया था और इंडिया फर्स्ट रनर अप रही थी।

विद्यार्थियों की बन रहीं आवाज : नेहा मारबी रांची विश्वविद्यालय स्टूडेंट्स यूनियन की अध्यक्ष हैं और अपने इस पद को वह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी मानती हैं। वह कहती है कि शिक्षा आगे बढऩे के लिए बहुत जरूरी है और जब तक देश की लड़कियां आगे नहीं बढ़ेंगी देश तरक्की नहीं कर सकता।

नेहा ने कॉलेजों में महिला सुरक्षा गार्ड रखे जाने, सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन लगाए जाने की पहल की है साथ ही उन्होने एंटी रैगिंग सेल को भी कॉलेजों में एक्टिव कराया है ताकि विद्यार्थियों को परेशानी नहीं हो। जिस पद को लड़कों के लिए उचित समझा जाता था आज उसी पद पर नेहा हैं और विद्यार्थियों के हित के लिए काम भी कर रही हैं। नेहा कहती हैं की हमें जरूरत है समाज से लिंग भेद खत्म करने की, हमें जरूरत है बेटियों का मनोबल बढ़ाने की, उन्हे आत्मनिर्भर बनाने की।

Posted By: Alok Shahi

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