यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 10, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
क्या हाईकोर्ट के फैसले से लौटेगा सहारा में फंसे हजारों लोगों के पैसे, देखिए मामले पर झारखंड के वित्त मंत्री ने क्या कहा
राज्य सरकार के स्तर से सहारा और सेबी दोनों से इस संदर्भ में पत्राचार किया गया है। भाजपा विधायक नवीन ...और पढ़ें

रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड सरकार के वित्तमंत्री रामेश्वर उरांव ने स्वीकारा है कि पूरे देश की तरह झारखंड में भी छोटे-छोटे निवेशकों की बड़ी राशि सहारा समूह में फंसी हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इसे गंभीरता से ले रही है और इसे निकलवाने का प्रयास भी कर रही है। राज्य सरकार के स्तर से सहारा और सेबी दोनों से इस संदर्भ में पत्राचार किया गया है। भाजपा विधायक नवीन जायसवाल द्वारा इस संदर्भ में उठाए गए सवाल के जवाब में रामेश्वर उरांव ने यह जानकारी सदन को दी।
सर्वोच्च अदालत के फैसले का इंतजार
रामेश्वर उरांव ने सरकार की सीमाओं का भी जिक्र किया। कहा, दो तरह की कंपनियां होती हैं। एक चिटफंड कंपनियां, जिन पर राज्य सरकार नियंत्रण कर लेती है, दूसरी सहारा जैसे लिस्टेड कंपनियां होती हैं। इनका रेगुलेटर सेबी है। उस पर राज्य बहुत नियंत्रण राज्य सरकार का नहीं है। यह मामला उच्चतम न्यायालय में भी चल रहा है। सेबी को न्यायालय के निर्णय का इंतजार है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद करीब 24 हजार करोड़ की राशि निवेशकों को वापस की जाएगी।
लाखों लोगों का पैसा फंसा
उन्होंने बताया कि कुछ राशि रिफंड भी हुई है। अबतक 17526 लोगों का लगभग 138 करोड़ रुपये वापस की गई है। उन्होंने बताया कि निवेशकों को उनकी फंसी हुई राशि मिले, इसके लिए वित्त विभाग प्रयासरत है। इस बाबत सेबी और सहारा कंपनी से पत्राचार भी किया गया है। यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा। इससे पूर्व भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने ध्यानाकर्षण में इस मामले को उठाते हुए कहा कि सहारा परिवार में झारखंड के करीब तीन लाख लोगों का लगभग 2500 करोड़ रुपया फंसा हुआ है। यह पैसा गरीबों का है, जिन्होंने अपनी दैनिक कमाई से 10-20 रुपया कर जमा किए थे। नवीन जायसवाल ने सरकार को सलाह दी कि वे एक हेल्पलाइन नंबर जारी करें ताकि एक डेटा तैयार हो सके, जिससे पता चले कि कितने लोगों की कितनी राशि जमा है। यह भी कहा कि जो राज्य तत्पर हैं, वहां जल्द रिफंड हो रहा है। स्थिति यह है कि सहारा में जो लोग काम करते थे, उनकी जान पर आन पड़ी है।