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"मंईयां योजना पर हमला" या "कोयला चोरी" रोकने की कवायद? खनन संशोधन बिल पर झारखंड में छिड़ी सियासी जंग

Published: Sat, 26 Sep 2026 08:16 PM (IST)

MMDR Act Row: कांग्रेस और झामुमो ने एमएमडीआर संशोधन कानून को मंईयां सम्मान योजना पर हमला बताया, जबकि केंद्रीय मंत्री ...और पढ़ें

एमएमडीआर संशोधन कानून पर झारखंड में सियासी घमासान, कांग्रेस-झामुमो और भाजपा आमने-सामने।

एमएमडीआर संशोधन कानून पर झारखंड में सियासी घमासान, कांग्रेस-झामुमो और भाजपा आमने-सामने।

HighLights

  1. कांग्रेस ने एमएमडीआर संशोधन को मंइयां सम्मान योजना पर हमला बताया।

  2. केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कानून को निवेश-रोजगार बढ़ाने वाला कहा।

  3. झामुमो ने केंद्र से झारखंड के बकाया 1.36 लाख करोड़ पर जवाब मांगा।

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में एमएमडीआर (MMDR) संशोधन कानून को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। एक तरफ जहां कांग्रेस और झामुमो ने इसे मंइयां सम्मान योजना और राज्य के राजस्व पर सीधा हमला करार दिया है, वहीं केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने पलटवार करते हुए कहा है कि इस संशोधन से कोयला चोरी पर लगाम लगेगी और राज्य में नए निवेश व रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

सीधे तौर पर मंईयां सम्मान योजना पर हमला: कांग्रेस महासचिव

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव लाल किशोरनाथ शाहदेव ने केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा एमएमडीआर संशोधन कानून को लेकर दिए गए बयान पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि एमएमडीआर बिल लाना और खनिज संपदा से सेस का हटाया जाना, सीधे तौर पर मंईयां सम्मान योजना पर हमला है।

राज्य सरकार, गरीबों और वृद्धजनों के लिए कई अन्य कल्याणकारी योजनाएं भी चला रही है, ये सीधे-सीधे उन योजनाओं पर भाजपा का हमला है। शाहदेव कहा कि दरअसल बीजेपी महिलाओं को मिल रही सम्मान राशि योजना से परेशान थी और आर्थिक रूप से कमजोर करने के राज्य सरकार के स्रोतों पर हमला करने के लिए इन्होंने यह कदम उठाया है।

ताकि राज्य की सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सबल ना बना सके। इसीलिए इस बिल के माध्यम से जल, जंगल और जमीन लूटने की योजना बनाई है। राज्य की जनता भाजपा नेताओं से इसका बदला खुद लेगी।

कोयला चोरी को बढ़ावा देने के लिए एमएमडीआर का विरोध: अन्नपूर्णा देवी

केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने शनिवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम के लाभ बताए और राज्य सरकार पर कोयला चोरी काे बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि झारखंड, खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। कानून में बदलाव होने से राज्य में नए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

राज्य के युवाओं को अपने ही राज्य में काम मिलने की संभावना में वृद्धि होगी और पलायन पर भी काफी हद तक रोक लगेगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य खनन क्षेत्र में टैक्स व्यवस्था को पूरी तरह से सुसंगत और पारदर्शी बनाना है। इस संशोधन से राज्य सरकार की मनमर्जी पर लगाम लगेगी।

सेस एवं बकाया टैक्स के नाम पर व्यवसायी के साथ दोहन और शोषण होता था, इससे उन्हें मुक्ति मिलेगी। अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि यह अधिनियम केवल झारखंड में नहीं लागू हुआ है बल्कि ओडिशा, बंगाल, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल आदि जगहों पर भी लागू किया गया है।

इसमें से कई कांग्रेस शासित राज्य हैं, जहां इस अधिनियम के विरोध की बजाय स्वागत हो रहा है। केवल झारखंड में ही इसका विरोध किया जा रहा है। सभी राज्य अधिनियम के फायदे को बखूबी समझ रहे हैं।

झारखंड सरकार वैधानिक रूप से राजस्व नहीं चाहती है, यह राज्य के सरकारी खजाने में राजस्व नहीं चाहती है बल्कि यह व्यक्तिगत राजस्व में वृद्धि चाहती है। इसलिए इस अधिनियम का विरोध किया जा रहा है।

झारखंड के हित में बात करें केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी: विनोद पांडेय

झामुमो ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा राज्य सरकार पर लगाए गए आरोपों पर पलटवार किया है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि केंद्रीय मंत्री झारखंड की जनता को कानून के फायदे गिनाने के बजाय पहले यह बताएं कि झारखंड के खनिज और यहां के लोगों के हित से जुड़े सवालों पर केंद्र सरकार का रुख क्या है।

झारखंड ने उन्हें सांसद चुनकर दिल्ली भेजा है, इसलिए उन्हें कम से कम झारखंड के हित की बात करनी चाहिए। झामुमो महासचिव ने कहा कि खनन का दंश झारखंड दशकों से झेल रहा है। खनिज संपदा का बड़े पैमाने पर दोहन हुआ, लेकिन खनन प्रभावित इलाकों में प्रदूषण, विस्थापन और बुनियादी समस्याएं आज भी कायम हैं।

उन्होंने सवाल किया कि खनन से प्रभावित लोगों को उचित क्षतिपूर्ति क्यों नहीं मिलेगी? जिन इलाकों से कोयला और अन्य खनिज निकाले जा रहे हैं, वहां के लोगों के जीवन और पर्यावरण की कीमत कौन चुकाएगा?

उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को एमएमडीआर संशोधन कानून का गुणगान करने के बजाय झारखंड के 1.36 लाख करोड़ रुपये के कथित बकाये पर केंद्र सरकार से जवाब मांगना चाहिए।

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