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खनिज संपदा हमारी, इस पर झारखंड की दावेदारी; झामुमो और कांग्रेस का हल्लाबोल

Published: Sat, 26 Sep 2026 11:50 AM (IST)

MMDR Act Amendment Jharkhand: झारखंड में केंद्र सरकार के एमएमडीआर एक्ट संशोधन के खिलाफ झामुमो और कांग्रेस सड़कों पर उतर ...और पढ़ें

एमएमडीआर एक्ट संशोधन पर झारखंड में सियासी घमासान। (सांकेतिक तस्वीर: एआई जेनरेटेड)

एमएमडीआर एक्ट संशोधन पर झारखंड में सियासी घमासान। (सांकेतिक तस्वीर: एआई जेनरेटेड)

HighLights

  1. झामुमो और कांग्रेस एमएमडीआर एक्ट संशोधन का विरोध कर रहे हैं।

  2. खनिज संपदा पर झारखंड के दावे और राजस्व हानि की चिंता।

  3. गांवों से विधानसभा तक विरोध, सुप्रीम कोर्ट में चुनौती की तैयारी।

अश्विनी रघुवंशी, रांची। भारत सरकार द्वारा खान और खनिज (विकास और विनियमन) कानून में संशोधन के बाद झारखंड के गांवों तक राजनीतिक माहौल गरम है। प्रदेश के सभी प्रखंड मुख्यालयों में प्रदर्शन कर झामुमो ने नारा दिया है, खनिज संपदा हमारी, इस पर झारखंड की दावेदारी। इंडिया गठबंधन के तहत सरकार में शामिल कांग्रेस भी अब सड़क पर उतरने को तैयार है।

सिर्फ राजनीतिक कार्यालयों में हलचल नहीं है अपितु राजधानी रांची के नेपाल हाउस के खान एवं भूतत्व विभाग के शीर्ष पदाधिकारी तनाव में हैं। विधि एवं न्याय विभाग के शीर्ष अफसर एमएमडीआर एक्ट के छिद्रान्वेषण में दिमाग लगा रहे हैं।

हेमंत सरकार में शामिल मंत्री परस्पर वार्ता में इस बात पर सहमत है कि एमएमडीआर एक्ट में संशोधन का झारखंड विधानसभा के भीतर जोरदार विरोध दर्ज कराना चाहिए।दूसरा पहलू है कि उच्चतम न्यायालय में भी इसे चुनौती दी जाय।

झारखंड में सरकार का नेतृत्व झामुमो के पास है। झारखंड आंदोलन के जमाने से झामुमो खनिज पर झारखंडियों का अधिकार जताता रहा है। इसीलिए झामुमो द्वारा जल, जंगल और जमीन का नारा लगाया जाता रहा है।

मसला सिर्फ नारा या विचारधारा तक सीमित नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में झामुमो ने मइयां सम्मान योजना के तहत बहुसंख्य महिलाओं को 25 सौ रूपये महीने की योजना शुरू की गई थी जो मास्टर स्ट्रोक माना गया। इंडिया गठबंधन को जोरदार जीत भी मिली।

हां, राज्य सरकार पर आर्थिक दबाव भी खूब है। एमएमडीआर एक्ट के तहत खनिज पर सेस की वसूली बंद हो गईतो झारखंड सरकार के लिए वित्त व्यवस्था को संभालने बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। एमएमडीआर एक्ट के विरोध के पीछे राजनीतिक मायने हैं, तो आर्थिक भी।

इंडिया गठबंधन का दूसरी बड़ी पार्टी कांग्रेस को भी झामुमो के आंदोलन के दौरान जनता के मन की थाह का अंदाजा लगा है। इस मसले की गंभीरता से कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व को अवगत कराया जा चुका है। अब कांग्रेस के कार्यकर्ता भी सड़क पर उतरने वाले हैं। झारखंड का वित्त मंत्रालय भी कांग्रेस के जिम्मे है जिसके मंत्री राधाकृष्ण किशोर हैं।

राधाकृष्ण किशोर का अनुमान है कि खनिज के सेस की उगाही बंद हुई तो झारखंडी जनता के लिए कल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाना बेहद मुश्किल होगा। 

झारखंड के भूगर्भ में यह खनिज

  • कोयला : धनबाद, बोकारो, रामगढ़, चतरा, गोड्डा, लातेहार, हजारीबाग, गिरिडीह, लातेहार
  • लौह अयस्क : पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम
  • तांबा : पूर्वी सिंहभूम, गिरिडीह, हजारीबाग, कोडरमा, देवघर
  • अबरख : कोडरमा, हजारीबाग, गिरिडीह
  • बाक्साइट : लोहरदगा, रांची, गुमला, लातेहार
  • यूरेनियम : पूर्वी सिंहभूम
  • ग्रेफाइट : पलामू, गढ़वा, लातेहार
  • चूना पत्थर : रांची, रामगढ़, पलामू, गढ़वा, पाकुड़, पश्चिमी सिंहभूम, बोकारो, लातेहार, गिरिडीह
  • मैगनीज : पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम
  • पन्ना : पूर्वी सिंहभूम
  • सोना : पूर्वी सिंहभूम, रांची, खूंटी, सरायकेला खरसावां, पश्चिमी सिंहभूम

(भूतत्व विभाग के सर्वेक्षण पर आधारित)

यह है इंडिया गठबंधन के सुर

खनिज से झारखंड की भावना जुड़ी हुई है और भलाई भी। अविभाजित बिहार में झारखंड आंदोलन की लड़ाई का प्रमुख मुद्दा खनिज पर अधिकार भी होता था। भारत सरकार ने सिर्फ कारपोरेट के दबाव में कानून बदल दिया है। उन्होंने संसद में अंकगणित के आधार पर कानून बदला है। इंडिया गठबंधन की सोच है कि झारखंड विधानसभा के जरिए झारखंड के लोगों की भावना से दिल्ली को अवगत कराया जाय। हम हर लड़ाई को तैयार हैं।
-विनोद पांडेय, केंद्रीय प्रवक्ता, झामुमो

खनिज संघीय मसला है। यह केंद्र और राज्य सरकार से जुड़ा साझा मसला है। कानून बदलने से पहले मोदी सरकार ने खनिज बहुल राज्यों से बात करना आवश्यक नहीं समझा।संसद के भीतर दस मिनट भी परिचर्चा नहीं की गई। ऐसा तब है, जब उच्चतम न्यायालय ने सेस लेना राज्यों का अधिकार माना है। बाकायदा न्यायिक आदेश है। अब विरोध के सिवाय कोई रास्ता नहीं है। आंदोलन होना ही है। देखते जाइए।
-प्रदीप बलमुचू, पूर्व राज्यसभा सांसद, कांग्रेस

ऐसा कानून तो अंग्रेज नहीं बनाया था। अंग्रेज सरकार भी कोई कानून बनाती थी तो दिखावा के लिए प्रभावित पक्ष से बाचतीत करती थी। मोदी सरकार ने आनन फानन में संसद के भीतर पुराने कानून में परिवर्तन कर दिया। काला कानून थोप दिया। ऐसा होता है क्या। मइयां सम्मान योजना, मुख्यमंत्री असाध्य बीमारी चिकित्सा योजना समेत तमाम कल्याणकारी कार्यों पर असर पड़ेगा। झारखंड के लोग भाजपा से बहुत नाराज हैं।
-संजय सिंह यादव, हुसैनावाद विधायक सह प्रदेश अध्यक्ष, राजद

भाजपा का दावा, झारखंड का भला होगा

एमएमडीआर कानून में संशोधन के बाद इंडिया गठबंधन के आक्रमक रूख के बीच भाजपा बार बार दावा कर रही है कि इससे झारखंड का भला होगा। सार्वजनिक तौर पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू लगातार कह रहे हैं कि सेस हटने से देश भर में खनिजों के दाम में एकरुपता आएगी।

झारखंड के खनिजों की मांग बढ़ेगी। भाजपा नेतृत्व का आरोप है कि ओडिशा, छत्तीसगढ़ समेत दूसरे राज्यों में लगातार नए खदान खुल रहे हैं जिससे वहां राजस्व बढ़ा है। झारखंड की हेमंत सरकार की नई खदान खोलने में रूचि नहीं है।

गोड्डा सांसद डा निशिकांत दुबे बेहद आक्रामक है। चुनौती दे रहे हैं कि झारखंड से खनिज रोका गया तो उसी आधार पर यहां के नेताओं का डीजल-पेट्रोल बंद हो जाएगा।