रांची, राज्य ब्यूरो। पाकुड़ के महेशपुर स्थित चंडालमारा में बांसलोई नदी पर निर्मित पुल के एक हिस्से के बह जाने की घटना को ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने गंभीरता से लिया है। मंत्री ने पुल के बहने के एक-एक कारणों को रेखांकित करने का आदेश विभागीय सचिव को दिया है। उन्होंने इसकी रिपोर्ट जहां 15 दिनों के अंदर तलब की है, वहीं दोषी अभियंताओं, अफसरों और ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई करने को कहा है।

कार्रवाई से पूर्व उन्होंने पुल निर्माण के सभी तकनीकी पहलुओं का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करने का निर्देश दिया है। बहरहाल, ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल की देखरेख में 2015 में जमाल कंस्ट्रक्शन द्वारा निर्मित इस पुल के बह जाने से आसपास के लगभग एक दर्जन गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

इधर, पाकुड़ उपायुक्त के निर्देश पर पुल बहने के मामले की जांच के लिए डीडीसी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई है। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने पुल की गुणवत्ता पर इसके निर्माण के समय भी सवाल उठाया था, परंतु उनकी बात अनसुनी कर दी गई थी। नतीजा सामने है।

चंडालमारा पुल का अधीक्षण अभियंता ने किया निरीक्षण

घाटचोरा व चंडालमारा गांव के बीचों बीच करोड़ों की लागत से बने ध्वस्त पुल का मंगलवार को ग्रामीण विकास विभाग विशेष प्रमंडल के अधीक्षण अभियंता प्रकाश चंद्र बिरवा, कार्यपालक अभियंता अशोक कुमार ने निरीक्षण किया। इन अधिकारियों ने पुल बहने के संबंध में अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वहीं जिला परिषद उपाध्यक्ष मुकेश कुमार शुक्ला ने भी घाटचोरा पहुंचकर पुल का जायजा लिया। इसके पूर्व स्थानीय विधायक प्रो. स्टीफन मरांडी ने सोमवार को ही पुल का जायजा लिया। विदित हो कि महज चार साल में ध्वस्त हो गए पुल की जांच के लिए डीडीसी रामनिवास यादव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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