दिव्यांशु रांची: बॉयोडायवर्सिटी के मामले में प्रकृति ने झारखंड को अपनी खास नवाजिसें दी हैं। यहां करीब 69 प्रकार के पक्षियों का बसेरा है। इनमें से 57 वाटर वर्ड की प्रजाति है। नवंबर की शुरुआत से आने वाले करीब 23 प्रकार के प्रवासी पक्षियों से यह परिवेश और समृद्ध होता है। लेकिन जलस्त्रोतों के प्रदूषण और इनके शिकार की वजह से इन मेहमान परिदों ने रांची से मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि अर्थव्यवस्था की तरह ही इनका नया ठिकाना चीन बन रहा है। चीन के दक्षिण पश्चिम का पेयोंग झील इन परिदों का नया ठिकाना है। यहां के जलीय पौधे वेलिसनेरिया का अनजाना स्वाद इन्हें पसंद आने लगा है।

रांची में गेतलसूद डैम, बड़ा तालाब, धुर्वा डैम, कांके डैम, पतरातू डैम विदेशी परिदों का पसंदीदी ठिकाना हुआ करता था। पिछले साल तक गेतलसूद डैम में 3500 परिदे, पतरातू डैम में 5500 परिदे आए थे। इसबार पहुंचने वाले मेहमान परिदों की संख्या काफी कम है। इनमें मंगोलिया, तिब्बत, लद्दाख, और चीन से आने वाले पक्षी, विंटर विजिटर शामिल हैं। झारखंड में नवंबर-दिसंबर से इनका आना शुरू होता है। फरवरी-मार्च के बाद ये पक्षी यहा से वापस लौट जाते हैं। रांची आए पक्षियों में 12 थ्रीटेंड स्पीशीज यानि खतरे के स्तर तक पहुंच चुके हैं। ये आकड़ा वाटर बर्ड सेंसस में सामने आया है। पर्यावरणविद और प्रवासी पक्षियों के व्यवहार पर नजर रखने वाले डॉ. नीतीश प्रियदर्शी बताते हैं कि जलाशयों का बढ़ा हुआ प्रदूषण इन परिदों को रास नहीं आ रहा है। ये परिदे साइबेरिया-मंगोलिया से अफगानिस्तान-पाकिस्तान के रास्ते भारत आते हैं। इस सफर के दौरान ये हिमालय पार करते हैं। चूंकि रांची के जलाशयों में इन्हें सही परिवेश नहीं मिल रहा है इसलिए ये अपना रास्ता बदल कर चीन पहुंच जा रहे हैं। चीन की अपेक्षाकृत कम दूरी और बेहतर पर्यावरण इन्हें रास आ रहा है।

इन मेहमानों का है आना जाना

रांची और आसपास के जलाशयों में आने वाली मेहमान परिदो की थ्रीटेंड प्रजातियों में रिवर लैपविग, डार्टर, व्हाइट नेक्ड स्टॉर्क, ओरिएंटल व्हाइट आइबिस, फ्यूवस व्हीसलिंग डक, फेरोजिनस पोचार्ड, वेस्टन मार्स हैरियर, ऑस्प्रे, यूरेसियन कर्लीव, रिवर टर्न, ब्लैक बिडल्ड टर्न शामिल हैं।

अभी भी जो मेहमान जोखिम उठाकर पहुंच रहे हैं उनमें कॉन मन सेंड पाइपर, कॉमन किंगफिशर, वुली नेक स्टॉर्क, कॉमन कुट, गेडॉल, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, व्हाइट ब्रेस्टेड वाटरहेन, टफ्टेड डक, नदर्न पिंटेल, बार हेडेड गूज सहित अन्य शामिल हैं।

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क्या है वजह

जलाशयों क आसपास रिसॉर्ट, मैरेज हॉल बन गए हैं। इस वजह से रात में भी यहां तेज आवाज और रोशनी होती है। मेहमान परिदे अपने शांत स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। उन्हें रात में अंधेरा और शांति पसंद है। लेकिन शोरगुल की वजह इनके प्रजनन और अधिवास में मुश्किल आती है। प्रदूषण की वजह से इन्हें भोजन नहीं मिलता। हाल ही में राजस्थान की सांभर झील में दस हजार के करीब विदेशी परिदे मृत पाए गए।

बेहद बुद्धिमान होते हैं प्रवासी परिदे

पक्षियों की यादाश्त बेहतरीन होती है। एकबार शिकार का खौैफ झेल चुके पक्षी के लिए उस जगह पर दोबारा आना मुश्किल होता है। इनका बॉयोलॉजिकल क्लॉक सूर्य की रोशनी, दिन रात का पूरा हिसाब रखता है। इस वजह से ये कहां आना है कहां नहीं आना है, इसका पूरा ख्याल रखते हैं।

Posted By: Jagran

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