रांची । रांची शहर को खूबसूरत और शानदार बनाने में विभिन्न संस्थाओं, उद्यमशाील युवाओं और समाजसेवा की भावना के साथ जुटे समूहों का भी बड़ा योगदान है। नवंबर 2017 में जब उत्साही युवाओं ने मिलकर "जिंदगी मिलेगी दोबारा" फाउंडेशन की शुरुआत की थी, उस समय उनके मन में भी पीड़ितों का दर्द बांटने की इच्छा थी। हालांकि यह बाद में देखते देखते अभियान में बदल गया । राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के बाहर अक्सर मरीजों के परिजन बहुत परेशान दिखते थे, जिन्‍हें किसी अपने का निधन हो गया हो, अपनों के खोने के दुख के साथ एक समस्या तात्कालिक भी रहती थी, वो थी रिम्स से घर शव ले जाने के लिए वाहनों का नहीं मिलना। यह मुसीबत खासकर उन लोगों के लिए बहुत बड़ी थी, जो आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है। इसी दुख-दर्द को कम करने के उद्देश्य के साथ फाउंडेशन की स्थापना हुई। 

अश्विनी राजगढि़या के नेतृत्व में फाउंडेशन के अधिकारियों और सदस्यों ने ऐसे लोगों को निःशुल्क एंबुलेंस उपलब्ध कराने की सेवा शुरू की। रिम्स में राज्यभर से लोग इलाज कराने आते हैं, इसलिए शव ले जाने के लिए रांची के स्थानीय लोकेशन के अलावा धनबाद, जमशेदपुर, पटना, कोलकाता, देवघर, दुमका, गोड्डा स्थानों के लिए भी एंबुलेंस जरूरत के हिसाब से लोगों को उपलब्ध कराई जाती है।

एम्‍बुलेंस वाहन में पानी की बोतलें, फोन, सफेद चादर आदि की सुविधा भी दी जाती है, ताकि शोकाकुल परिवार की ज्यादा से ज्यादा मदद की जा सके। कई मामलों में परिजनों की इससे ज्यादा भी मदद की जाती है। एम्‍बुलेंस से शव ले जा रहे लोगों को एक पौधा भी दिया जाता है। साथ ही उनसे आग्रह किया जाता है कि जिस परिजन को उन्होंने खोया है उनकी याद में एक पौधा जरूर लगाएं। इस तरह इस नेक काम में पौधारोपण का अभियान भी जुड़ गया है।

ऐसे आया विचार
एक दिन समाचार देखने के दौरान टीवी पर ओडिशा के एक व्यक्ति को मजबूरी में अपनी पत्नी की लाश कंधे पर ले जाते हुए देखा, इसके बाद लोगों की मदद करने का विचार मन में आया था। साथियों से चर्चा की तो सब राजी-खुशी तैयार हो गए और एक समूह का गठन कर मदद का काम शुरू कर दिया गया। संस्था एक ऐसा स्टोर भी खोलने जा रही है जहां अंतिम संस्कार की सामग्री भी लोगों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। फाउंडेशन में आलोक अग्रवाल, अरविंद मंगल, हर्षवर्धन बजाज, जयप्रकाश सिंघानिया, निखिल केडिया, रमन साबू, साकेत सर्राफ, सौरभ मोदी, विपुल अग्रवाल, विनीत अग्रवाल, विवेक बागला समेत कई अन्य अधिकारी व सदस्य इस काम में सहयोग कर रहे हैं।

शोक संतृप्‍त लोगों का दुख बांटने की हर संभव कोशिश
जिस किसी भी व्यक्ति के परिवार के किसी सदस्य की मौत हो जाती है, उसपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है। जिंदगी मिलेगी दोबारा संस्था के लोग उनके दुख में शरीक होकर उनके साथ दुख में साथ खड़े रहते हैं। संस्था की ओर से जरूरतमंदों को अस्पताल पहुंचने व अस्पताल से घर जाने के लिए भी निःशुल्क एम्‍बुलेंस उपलब्ध कराई जा रही है। ब्लड डोनेशन कैंप लगाकर भी लोगों को स्वास्थ्य और रक्तदान के प्रति जागरूक करते हुए ब्लड बैंकों में रक्त की कमी को दूर किया जा रहा है। आने वाले दिनों में अस्पतालों में संस्था की ओर से व्हील चेयर, स्ट्रेचर व अन्य उपकरण उपलब्ध कराते हुए मरीजों को सहयोग की सेवा शुरू कराने की दिशा में भी काम हो रहा है।

ये है हेल्पलाइन नंबर
जिंदगी मिलेगी दोबारा फाउंडेशन ने जरूरतमंदों के लिए अपना हेल्पलाइन नंबर 9709500007 जारी किया है। इसपर फोन आते ही संस्था के लोग तत्काल जरूरतमंद तक सेवा पहुंचाते हैं। कई बार एक ही दिन में कई-कई कॉल आते है। इसी के अनुरूप वाहनों की व्यवस्था रखी गई है।

 

By Krishan Kumar