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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 21, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दबिश से घबराए माओवादी, मोबाइल और ईमेल किया बैन

By Sachin MishraEdited By:
Published: Mon, 21 Aug 2017 09:21 AM (IST)

रणनीति में बदलाव करने के बाद माओवादी संदेश भिजवाने के लिए पारंपरिक कुरियर सिस्टम अपनाएंगे।

दबिश से घबराए माओवादी, मोबाइल और ईमेल किया बैन
दबिश से घबराए माओवादी, मोबाइल और ईमेल किया बैन

प्रदीप सिंह, रांची। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की लगातार दबिश के कारण झारखंड समेत लगभग दस राज्यों में सक्रिय भाकपा (माओवादी) ने अपनी रणनीति में व्यापक बदलाव किया है। माओवादियों के शीर्ष नेतृत्व ने अपने छापादार दस्तों (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) को निर्देश दिए हैं कि नए तकनीक व संचार माध्यमों का उपयोग बिल्कुल नहीं करें। मोबाइल और ईमेल के इस्तेमाल की पूरी तरह मनाही की गई है। वाट्सएप समेत सोशल साइट्स का इस्तेमाल करने से भी रोक दिया गया है।

रणनीति में इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह यह है कि सुरक्षा एजेंसियां इसी आधार पर नक्सलियों के लोकेशन का पता कर धावा बोल रही हैं। इससे खासा नुकसान हुआ है। झारखंड में हाल के दिनों में कई दुर्दात नक्सली जहां मारे गए हैं, वहीं नकुल यादव, कुंदन पाहन जैसे माओवादियों ने हथियार डाल दिए हैं। संगठन के हथियारों का जखीरा भी पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है। इससे पहले नोटबंदी के कारण नक्सलियों का अर्थतंत्र चौपट हो चुका है। चौतरफा नुकसान से माओवादियों में बौखलाहट है। इस परिस्थिति में संदेश दिया गया है कि नए सिरे से संगठन में रंगरूटों की बहाली कर जनाधार को विकसित किया जाए।

दुर्दांत बच्चन रजवार का खुलासा

पलामू के एसपी इंद्रजीत महथा बताते हैं कि नक्सलियों की इस रणनीति का खुलासा होने के बाद पुलिस सतर्क है। बीते 14-15 अगस्त की रात पलामू में एक दुर्दांत नक्सली बच्चन रजवार उर्फ प्रवीण पुलिस के हत्थे चढ़ा था। उसने शीर्ष माओवादी नेतृत्व के इस नए निर्देश का खुलासा किया। इस नक्सली पर पांच लाख का इनाम है और विभिन्न पुलिस थानों में इसके खिलाफ आधा दर्जन आपराधिक मामले दर्ज हैं। महथा के मुताबिक आधार नंबर को मोबाइल नंबर से जोड़ने के कारण भी नक्सलियों को संदेश पहुंचाने में दिक्कत आ रही थी। पहले वे दर्जनों नंबर का धड़ल्ले से इस्तेमाल करते थे। नई परिस्थिति में वे ऐसा नहीं कर पा रहे।

पारंपरिक संदेशवाहक ले जाएंगे कोडवर्ड वाली चिट्ठी

रणनीति में बदलाव करने के बाद माओवादी संदेश भिजवाने के लिए पारंपरिक कुरियर सिस्टम अपनाएंगे। इसके तहत संगठन से जुड़े कैडरों का इस्तेमाल किया जाएगा। ये कैडर एक-स्थान से दूसरे स्थान पर चिट्ठी पहुंचाएंगे। चिट्ठी में कोडवर्ड के जरिए संदेश भेजा जाएगा ताकि पुलिस के हाथ में लगने पर भी रणनीति का खुलासा नहीं हो। पूर्व में इसी पद्धति का इस्तेमाल नक्सली किया करते थे। बदली परिस्थिति में फिर से इसे अमल में लाया जाएगा।

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