रांची में गांधीजी का पहला आगमन: आड्रे हाउस और झारखंड से गहरा नाता, इस कार से गए थे रामगढ़
महात्मा गांधी पहली बार जून 1917 में चंपारण आंदोलन के सिलसिले में लेफ्टिनेंट गवर्नर सर एडवर्ट गेट से मिलने रांची ...और पढ़ें

1940 में कांग्रेस अधिवेशन रांची से रामगढ़ इसी कार से गए थे गांधी जी।
HighLights
गांधीजी 1917 में चंपारण आंदोलन के लिए रांची के आड्रे हाउस आए।
टाना भगतों से मिले, 1925 में झारखंड के कई शहरों का दौरा किया।
गांधीजी 1940 में रामगढ़ कांग्रेस हेतु अंतिम बार रांची आए।
संजय कृष्ण, रांची। महात्मा गांधी पहली बार जून 1917 में गवर्नर गेट से मिलने पहली बार रांची आए थे। दो जून को पटना से रांची के लिए चले थे। चार जून को बिहार-ओडिशा के लेफ्टिनेंट गर्वनर सर एडवर्ट गेट से आड्रे हाउस में मुलाकात हुई। यह चंपारण आंदोलन के सिलसिले में भेंट थी। अब इस आड्रे हाउस को उसी रूप में संरक्षित किया गया है।
यहां कला प्रदर्शनी से लेकर अन्य आयोजन अब होते रहते हैं। इसी आड्रे हाउस को अब गांधी भवन का नाम देने की मांग हो रही है और गांधी के झारखंड के रिश्ते को लेकर फोटो गैलरी की बात भी उठ रही है। चूंकि यह सरकारी भवन है। गांधी पहली बार यहीं पर आए थे। इसलिए ब्रिटिश अधिकारी के नाम से बने भवन को गांधी भवन बनाने की मांग हो रही है।
वैसे, अंतिम बार रामगढ़ कांग्रेस में भाग लेने के लिए गांधीजी 1940 में आए थे। 1917 में ही पहली बार टाना भगतों से भेंट की थी। गांधीजी ने आठ जुलाई 1917 को अपनी डायरी में इसका उल्लेख किया है। लिखा है, आज मैंने टाना भगत नामक आदिवासी जमात के लोगों से बात की। ये अहिंसा और सदाचार को मानने वाले हैं।
13 से 18 सितंबर तक चार पहिया से घूमा झारखंड
गांधीजी 1925 में 13 से 18 सितंबर तक झारखंड की यात्रा की चार पहिया से। इस दौरान वे पुरुलिया, चाईबासा, चक्रधरपुर, खूंटी, रांची, मांडर, हजारीबाग में रहे और इन स्थानों पर आयोजित अनेक बैठकों को संबोधित किया।
17 को उन्होंने रांची के संत पाल स्कूल के मैदान में तीन बजे सभा को संबोधित किया। उन्होंने चरखा की बात की और लोगों ने एक हजार रुपये की थैली उस सभा में गांधीजी को भेंट की।
योगदा आश्रम में भी गए गांधीजी गांधीजी आगे लिखते हैं, 'छोटानागपुर प्रवास के दौरान और भी कई दिलचस्प बातें हुई जिनमें खद्दर पर एन.के. राय और उद्योग विभाग के एस.के. राव के साथ हुई चर्चा तो शामिल है ही ब्रह्मचर्य आश्रम (अब योगदा सत्संग आश्रम) का विजिट भी स्मरणीय है, जिसकी स्थापना कासिमबाजार के महराजा की देन है।
मोटरगाड़ी से ही हम रांची से हजारीबाग गए, जहां पहले से तयशुदा कार्यक्रमों के अलावा मुझे संत कोलम्बा मिशनरीज कालेज, जो बहुत पुराना शिक्षण संस्थान है, के छात्रों को भी संबोधित करने का आमंत्रण मिला। गांधीजी ने वहां भी संबोधित किया। फिर पलामू आदि की भी यात्रा की।

आड्रे हाउस को गांधी जी की याद में संरक्षित किया गया है।
मोटरकार से गए रामगढ़
मार्च, 1940 में कांग्रेस का अधिवेशन रांची से 40 किमी दूर रामगढ़ में हुआ। रांची से वे कार से गए। वह कार आज भी सुरक्षित है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इस महत्वपूर्ण अधिवेशन में मौलाना अब्दुल कलाम आजाद अध्यक्ष बनाए गए थे।
दामोदर नदी के किनारे जंगलों में सैकड़ों पंडाल लगाए गए थे, जिसमें महात्मा गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल, डा श्रीकृष्ण सिंह, डा.राजेन्द्र प्रसाद जैसे तमाम नेताओं की भागीदारी हुई थी। इस बार जब वे आए तो रांची में वे बिरला कोठी, लालपुर में ठहरे थे, जहां अब बीआइटी चलता है। वे रांची से फोर्ड गाड़ी में रामगढ़ पहुंचे थे।
रांची के स्वतंत्रता आंदोलन लक्ष्मी नारायण जायसवाल के पास फोर्ड कंपनी की बीआरएफ -50 गाड़ी थी। इस गाड़ी को खुद लक्ष्मी नारायण ड्राइव कर रहे थे। रांची और रामगढ़ इसी गाड़ी से आना जाना होता था।
गांधीजी 1940 में एक मार्च 20 मार्च तक रहे। हालांकि वे 12 मार्च की शाम ईसाई मिशनरियों से बातचीत करने के लिए रामगढ़ से चले आए। 14 मार्च को रामगढ़ में खादी ग्रामोद्योग प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
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