रांची, जासं। Lalu Yadav News रांची के रिम्स के पेइंग वार्ड में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का कैदी के रूप में इलाज हुआ। इसके लिए उनके निजी खर्च पर रिम्स के पेइंग वार्ड का एक कमरा बुक कराया गया। दूसरा कमरा भी उनके लिए बुक था। जिसमें लालू यादव तो नहीं थे, लेकिन उनका निजी सामान वहां पर रखा गया था। इस मामले की किसी को जानकारी नहीं थी। लेकिन सूत्रों के अनुसार यह दूसरा कमरा रिम्स निदेशक के आदेश के बाद ही लालू यादव को दिया गया था।

इसका खुलासा अब जाकर हुआ, जब उस कमरे से लालू प्रसाद यादव के रखे सामान को वापस लाया गया। इस दूसरे कमरे का किराया 97 हजार रुपए तक पहुंच गया है, लेकिन इस बकाए राशि को देने के लिए कोई नहीं है और रिम्‍स प्रबंधन भी इस पूरे मामले की लीपापोती करने में जुट गया है। ताकि मामला तूल ना पकड़े। अब बकाए राशि का भुगतान कौन करेगा, यह किसी को पता नहीं। नियमानुसार रिम्‍स का पेइंग वार्ड निदेशक व उपाधीक्षक के आदेश के बाद ही निर्गत किया जा सकता है।

एम्स जाने के बाद उनका सामान रख दिया गया पेइंग वार्ड के दूसरे कमरे में

लालू यादव कमरा नंबर ए-11 में रहते थे। जबकि कमरा नंबर 10 में उनका सामान रखा गया था। 22 मार्च 2022 को वह रिम्स से एम्स नई दिल्ली गए थे। उनके जाने के बाद भी उनका पूरा सामान रिम्स पेइंग वार्ड के कमरा नंबर 10 में रखा हुआ था। रिम्स के पेईंग वार्ड के कमरे का किराया प्रति दिन 1000 रुपए है। हालांकि लालू यादव ने कमरा नंबर ए 11 का पूरा भुगतान तक कर दिया था। लेकिन उनके जाने के बाद भी उनका सामान रिम्स के पेइंग वार्ड में 97 दिनों तक रखा रहा। इसका प्रतिदिन 1000 के हिसाब से 97000 रुपए किराया बनता है, उसका भुगतान कौन करेगा रिम्स प्रबंधन या लालू प्रसाद यादव। इसका कोई जवाब नहीं मिल रहा।

इस बीच रिम्स प्रबंधन ने पत्र जारी किया है कि रिम्स के पेइंग वार्ड या कॉटेज को अब प्रारंभिक 3 दिनों के लिए ही अलॉट किया जाएगा। एक बार में 3 दिन का ही पैसा जमा होगा। यानी मरीज को हर 3 दिन पर कॉटेज अलॉट कराना होगा। जबकि लालू प्रसाद यादव का सामान बगैर किसी अलॉटमेंट के पिछले 97 दिनों तक रिम्‍स के पेइंग वार्ड में यूं ही रखा गया था।

इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। लालू यादव को किसके कहने पर पेइंग वार्ड का यह कमरा दिया गया था, इसकी जानकारी ली जाएगी। फिलहाल इस पूरे बकाए को लेकर कुछ भी अभी कहना उचित नहीं होगा। जांच के लिए पहल होगी। प्रो डा के मुरारी, पीआरओ, रिम्स

Edited By: Alok Shahi